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13 मार्च 2016

|| द्रष्टा || - वरदान गढवी.

|| द्रष्टा ||
रहेवुं राजी तो , जोतो  रहेजे......!
करी कर्म छता , आगो रहेजे........१.
करजे दुनिया,दुकान,बजार पण,
करनारथी अलग उभो रहेजे..........२.
न बादशाही मांगजे न गरीबी....!
मळ्यु जे ते प्रसाद गणी राजी रेजे.....३.
आवशे सफळता,विफळता घणी..!
पण,अडे नही तेम थोभी रहेजे........४.
जे मळ्युं तेनाथी वधु ना मांगजे....!
प्रार्थनाने ना फरीयाद मां तोडजे.......५.
थाय घोंघाट के वागे संगीत पण,..!
तु तो हिमालयनी शांतीमा रहेजे.......६.
न वखाणथी कोईना उछळजे....!
निंदा थी, ना कोईनी पीडाजे...........७.
सरकी न जाय समय बहारनी दोडमां..!
'वरदान' ते पहेला भींतर उतरी जजे.......८.
                                  :- वरदान गढवी.

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