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19 अगस्त 2016

राग जिल्लो - त्रिताल रचना ::- शंकरदान जेठीदान देथा - लींबडी

```राग जिल्लो - त्रिताल```

```रचना ::- शंकरदान जेठीदान देथा - लींबडी```

समजी लेने प्यारा सत्यसार संसार मां रे... टेक.

जन्मयो ज्यारे आ संसारे, तारे साथ हतुं शुं त्यारें ;
लेवानुं पण नथी लगारे लारमां रे, समजी लेने .... टेक.

जीव देहनी थतां जुदाई, सरवे मिथ्या थशे सगाई ;
बधां रहे पछताई रोई घरबारमां रे, समजी लेने .... टेक.

उधम आ तनथी आदरवो, जेणे मटे जनमवो मरवो ;
फेरो पडे न फरवो खाणी चारमां रे, समजी लेने .... टेक.

शंकर कवि झट आवे छेडो, हरि नामथी कर तुं हेडो ;
पार थाय तो बेडो भव एकुपारमां रे, समजी लेने .... टेक.

टाइप बाय :- www.charanisahity.in

संदर्भ :- लघु संग्रह (कच्छ भुज की व्रजभाषा पाठशाळा के अभ्यासक्रम का प्रारंभिक पुस्तक) पाना नंबर :- 173 पर थी

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