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7 मार्च 2017

||रचना- दसावतार || || कर्ता - मितेशदान गढ़वी(सिंहढाय्च) ||

*||  दसावतार ||*
         *|| छंद - रणंकी ||*
       *|| कर्ता - मितेशदान महेशदान गढ़वी(सिंहढाय्च) ||*

वसुधा दःख दहक दहक थर कंपत,गरज कळळ वीज अळळ परे,
वायु चहु दिश अगन वह फरकत,गगन नाद पर
गळळ फरे,
कळजुग अकळ अति चडत भयंकर,तद हरी हर अवतार धरे,
परगट धर रूप प्रलय पळ भगवन,असुर नाश कर दरद दरे,(1)

प्रथमी पर दैत  वैद कर चोर बनी,समदर मही जब सचवाय रयो,
मनवर सत मनु हथ ग्रहण रहण मछ,रूप धरी
परखाय गयो,
अवतार मछय कारण भव तारण,वेद विहारण
मनुय सरे,
परगट धर रूप प्रलय पळ भगवन,असुर नाश कर दरद दरे,(2)

अळीयळ मही कृधर उरग दळ दानव,दैवन मंथन
लडत लळे,
कुरमा रुप गीर धर धरी नग पर बळ, पुदगऴ लपट कळत जकळे,
हळ हळ हळ धटक झहर जर विषघर,दैत दानवम नमण करे,
परगट धर रुप प्रलय पळ भगवन,अशुर नाश कर दरद दरे,(3)

हरणंख दैत प्रथमी कर पर धर अहम् रासातळ संग गियो,
भभकयो जद निकट मोत नीरख़त तद् अन हद मन  हहुकाट थियो,
वाराह  वटक तट विकट दंत कर हणण हटक हरणंख मरे,
परगट धर रूप प्रलय पळ भगवन असुर नाश कर दरद दरे,(4)

थड थड थड थंभ तौळ कर तडडड,धरण प्रगट नरसिंघ अळयो,
मानव तन वकळ सिंघ कोपन कर हैणक कश्यप दैत दळयो,
प्रहलाद भगत वंदन कर नरहर  निरख दैव उर हरख भरे,
परगट धर रूप प्रलय पळ भगवन असुर नाश कर दरद दरे(5)

नरपळ बली उंचळ विकळ बन सबळ,अहंकर दैत राज राखस भयो,
पातळ धरण नभ उछरं जण,वृख कसमल  धृत रासट्ट हयो,
वामन मंजुळ उदोत शिरा पद  वरखम धर इण दोष हरे,
परगट धर रूप प्रलय पळ भगवन असुर नाश कर दरद दरे,(6)

कपटीय  बण्या घट लाजन त्यागन धरम भूली अधरम्म वर्या,
जम दागन पुत्र क्रोध अति करण हणण क्षत्री धर विहीण कर्या,
परशु धर वरण वृख ब्राह्मण बण पातक सम सब गरल गरे,
परगट धर रूप प्रलय पळ भगवन असुर नाश कर दरद दरे,(7)

रावण मन कपट दुष्ट दानव दस वकळ धुरंधर अड़ीखम्मो,
पातक बण हरण सीया कर अनरथ वैरी वटक्यो गिरीसम्मो,
रघु नंदन युद्ध करण हथ मरण दसानन रखण सुधा
सुख सत्य सरे,
परगट धर रूप प्रलय पळ भगवन असुर नाश कर दरद दरे,(8)

फटक्यों जद फट फट प्रजुळ कंस मद भरियो लोभन अकळ चडी,
त्राहत अति आपन  गावन पर इण दुष्ट मती मन
भरल पड़ी,
अवतर अळ आठ धरण श्री कृष्णं, काल बण्यो इ कंश परे,
परगट धर रूप प्रलय पळ भगवन असुर नाश कर दरद दरे,(9)

नव मे पल नाथ बण्यो पृथ्वी पर कुशळ ज्ञान भंडार भण्यो,
ध्यानम कर घोर सिधारथ रूपम,बौद्ध धर्म को वेद वण्यो,
उपदेश दिनो दुःख में सुख सार तणो  अष्टांगिक मार्ग सरे,
परगट धर रूप प्रलय पळ भगवन असुर नाश कर दरद दरे,(10)

युग वित्ये मनु सच मूरख बनी सब भुलत मान संम्मान खरा,
नफ्फट बन काढत लोकन लाजा,अळा लजावन पाप धरा,
वसुधा पर धरम धजा लहे रावण कारण कल्कि रूप
वरे,
परगट धर रूप प्रलय पळ भगवन असुर नाश कर दरद दरे,(11)

साचो धन गण भक्ति मन मन महा नाथम तुज अवतार समो,
कर्मा थकी रहत नेक दन हर दन कर कर वंदन विष्णु नमो,
मीत मंगल गुण गावत हरी हर सुण छंद रेणकी चरण धरे,
परगट धर रूप प्रलय पळ भगवन असुर नाश कर दरद दरे,(12)

*🙏~~~~~मितेशदान(सिंहढाय्च)~~~~~🙏*

*कवि मीत*

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