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1 दिसंबर 2016

आई श्री सोनल माँ भाव : रचना :- दिलजीतभाई गढवी

*आई श्री सोनल माँ मढडा*
             *भाव*
राग..हे गोविन्द गोती दियो ने

मां मढडामां जनम्या छे ब्रह्म चारणी रे,
आई अवतारु महा दैयत मारणी रे, (2)
मढडामां जनम्या छे ब्रह्म चारणी रे,....टेक.

आधी व्याधी उपाधी हरे आपदा रे,
वड हथी विडारे बधी विपदा रे, (2)
मढडामां जनम्या छे ब्रह्म चारणी रे,....1

माना धामे राजा ने रंक आवता रे,
भावे भोजन जमाडे आई भावता रे, (2)
मढडामां जनम्या छे ब्रह्म चारणी रे,....2

मन माग्यू मळे छे माना धाम मां रे,
अष्ट सिध्धी नवे निध्धी नाम मां रे, (2)
मढडामां जनम्या छे ब्रह्म चारणी रे,....3

अरज सूणी ने आई वेगे आवता रे,
मोटा तोफाने थी मां बचावता रे, (2)
मढडामां जनम्या छे ब्रह्म चारणी रे,...4

पापी पावन थई पारे पूण्य पामता रे,
हेत वाळी हैयाने हरखावता रे, (2)
मढडामां जनम्या छे ब्रह्म चारणी रे,....5

कैक जूगो ना पाप जूना कापता रे,
दाद *दिलजीत*ने  दिल थी आई आपता रे, (2)
मढडामां जनम्या छे ब्रह्म चारणी रे,.....6

*आई श्री सोनल माँ मढडा*
*नी वंदना*
*दिलजीत बाटी* *ढसा जं*.

*मो..99252 63039*

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