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31 जुलाई 2019

छंद हरीगीत रचिता चारण विजयभा हरदासभा बाटी

🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉

*🌹🌹🌹छंद=हरीगीत🌹🌹🌹*

*चल छोड दे अब छोड दे तुं वृथा चिंता छोड दे.*
*ताहरे अधीन है कर्म तो तुं कर्म नाता जोड दे.*
*होनी हरीवर हाथ रखियो सकल फिर जंजाळ है.*
*ईश्र्वर चरण ग्रह ललीत मनवा अवर माया जाळ है.*

*अब चल पुरानी़ प्रगट ज्योती लक्ष पर तुही ध्यान दे.*
*पारस पडा़ है पास तेरे हर घडी मे ग्यान दे.*
*क्षण क्षण जिवन की स्वर्ण कर दे सच्च यही संभाळ है.*
*ईश्र्वर चरण ग्रह ललीत मनवा अवर माया जाळ है.*

*शाश्र्वत तुंही चेतन गतिमय पथ्थ जिवन परिणाम दे.*
*पुरूषार्थही पहचाऩ तेरी सबलकर अनजा़म दे*
*धर्मा आदि फल देवन प्रभु वो परखही प्रेमाळ है.*
*ईश्र्वर चरण ग्रह ललीत मनवा अवर माया जाळ है.*

*तेराही पथ्थ तुंही पथिक बन परख मंजिल धार दे.*
*अवीरत सतत तेरी गति पर हा नीयत विस्तार दे.*
*प्रारब्ध वश सब प्राप्त है जियो पूर्व की परीथाळ है.*
*ईश्र्वर चरण ग्रह ललीत मनवा अवर माया जाळ है.*

*अपनाही खुदका बन दियाँ तु विषद् संशय छान दे.*
*तेरा किया तुंज को मिलेगा कबुल कर भुगतान दे.*
*फल दिऐं बीन तो कर्म तेरे खडा ज्यु महाकाळ है.*
*ईश्र्वर चरण ग्रह ललीत मनवा अवर माया जाळ है.*

*अब उठो उद्यम् शील साधो परमहित कर ठान दे.*
*हे ग्यानग्रृह मंगलश्रवो धन त्याग तप परमान दे.*
*दंद्वा परे कर कर्म सुचीता वही पूजन माळ है.*
*ईश्र्वर चरण ग्रह ललीत मनवा अवर माया जाळ है.*

*परमादही परीवर्त संकट दुखद मुल आधार दे.*
*प्राक्रम करो वंदन बृहद तो सुखद मुल साधार दे.*
*सुक्रत करो शुभदा प्रवीन वर गुण ग्रहो निजढाळ है*
*ईश्र्वर चरण ग्रह ललीत मनवा अवर माया जाळ है.*

*अमलुख समय पहचाऩ पहले खडो अवसर हाथ दे*
*कुछ सोच़ मनवा सोच़ मनवा त्यों हरीवर साथ दे*
*हा वदत वेदाश्रय श्रुती विज कहत प्रभु किरपाळ है*
*ईश्र्वर चरण ग्रह ललीत मनवा अवर माया जाळ है.*

🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉

*रचिता=चारण विजयभा हरदासभा बाटी.*

*मो=97263 64949*

🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉

30 मई 2018

छंद कवित रचिता चारण विजयभा हरदासभा बाटी

🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
🌸🌸 *छंद = कवित* 🌸🌸

*परख ले बात अरु जात को भी जाँच लिजो.*
*नाहक न बाँधी लिजो वृथा दरसात है.*
*पोकळ सबंध कबु काम नाम राखे नही.*
*ऐसी हाथ ताली तुम छडो बडी घात है.*
*आवे बेठे पास अरु समय को खावे बडो.*
*उपजे ना वेला बीज बंझर दिन रात है.*
*मित के मुखोटे पेंन झुठी मुस्कान छावे.*
*विज ऐसे लोगन को छोडो सुखपात है.*

🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

*बेठे रेवे साथ पर साथ कछु देवे नही.*
*मार्ग मे तो मिले पर मार्ग उलजावे है.*
*हाथ तो मिलावे यार हाथ कछु देवे नही.*
*आवे अरु जावे खूब देखी फूसलावे है.*
*गले मिल जावे फिर यार गल पावे नही.*
*दोगल दोरंग बडी बात दोहरावे है.*
*कच्चे ऐसे मित मिले ताको कोई रंग नही.*
*विज ऐसे लोगन से भाग मुरझावे है.*

🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

*आनँद विनोद हूमे खूमची खूदे है खाली.*
*वेला विपरीत परे आँख मुंद खडे है.*
*मिळे है माल जदे जंबुक बन साथ रेवे.*
*खुटे अरु टुटे तदे हाथ बंद पडे है.*
*सरसो समय हेम कही वाह वाही छुटे.*
*विपत पडे है तद मौन मुख झडे है.*
*बहु हाथ ताली मित ताल कछु देवे नही.*
*विज ऐसे लोगन तो प्रेम भाव छडे है.*

🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

*रचिता=चारण विजयभा हरदासभा बाटी*

*मो=9726364949*

🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

19 मई 2018

छंद=हरीगीत

🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉

    *🌸🌸दोहो🌸🌸*

*डहंक डहंक डमरु बज्जे,धंमके गुगळ धूप.*
*जणणण पावे झांझरी,भैरव आगे भूप.*

*🌸🌸🌸छंद=हरीगीत🌸🌸🌸*

*शंणगार सजिया प्रगट पीठड मुखाकृत कोटी सुरज.*
*शिर लाल लोवड़ आंच मंगल छंद स्वर चर्चे चरज.*
*षंड राग छतिस रागिंनी आलाप धुन घेरा करे.*
*जय जय प्रबळ बळ अकळ पीठड जागती पृहमी परे.*..1

*पिंगळो पाडो शील सोजो रजत थी खरीयु जडी.*
*नथ्थ कनक नाके मणी झळके शिंगळा कुंढा वळी.*
*तिण पीठ आसन उन तणा शोभा अति सुंदर सरे.*
*जय जय प्रबळ बळ अकळ पीठड जागती पृहमी परे.*..2

*सोया सधु अशरण शरण पत रखण परगट परवरी.*
*धिन मात मालु कुख उजवळ सात बहनड़ अवतरी.*
*जवतल तणो ई वीर वेळो भलो भ्राता तरवरे.*
*जय जय प्रबळ बळ अकळ पीठड जागती पृहमी परे.*..3

*जिमवण कियो नवघण कटक दळ वरवडी भाणा दिये.*
*नरहिं नवड चिंधे सबळ मग सिंध पंथ पीठड हिये.*
*शरणा ग्रहो सोरठ धणी सोया तणी समरथ करे.*
*जय जय प्रबळ बळ अकळ पीठड जागती पृहमी परे.*..4

*रा' अयो नवघण भूप भारठ नेह पीठड निर्मळा.*
*संकट वयदो सघडा वयण सुण विगत बोली मंगळा.*
*वायु सखा झपडो चढ्ढो नेजा फतेका फरहरे.*
*जय जय प्रबळ बळ अकळ पीठड जागती पृहमी परे.*..5

*जद दधी खड तीर भंमर भाले शुकन चिंडीयारा लरे.*
*उण जगे आछो नीर छिंछरो भला घोडा परवरे.*
*उदधी उल्लंघन सिंध चोकी पठा पीर पीठड हरे.*
*जय जय प्रबळ बळ अकळ पीठड जागती पृहमी परे.*..6

*खल हमीर दल बल भंज भुंगळ सुमरा शिर खंडणी.*
*जस दियण क्रीर्ती जसा पळ शुभ पवाडा तुं मंडणी.*
*पत रखण परगट भुवण अणगण नकड नजरू जग फरे.*
*जय जय प्रबळ बळ अकळ पीठड जागती पृहमी परे.*..7

*चापडा बंधी लक्कड लाठी धृत सिंधुर हथ्थ रही.*
*शोभा अनृपम अकथ सुंदर बृहद ब्रद निर्मळ बही.*
*डह डहंक डंमर गहंक बाढी धूप गुगळ जरहरे.*
*जय जय प्रबळ बळ अकळ पीठड जागती पृहमी परे.*..8

*फलकु अफर फर नदी पडघम नगाडा़ नवळा बज्जे.*
*परगट स्वमंभु मात पीठड भुतडा अणगण भज्जे.*
*बावळी बढ्ढ चढ्ढ बिरद समरथ विजय करबध्ध शिर ढरे.*
*जय जय प्रबळ बळ अकळ पीठड जागती पृहमी परे.*..9

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*स्तुती रचनाकार=चारण विजयभा हरदासभा बाटी.*

*मो=9726364949*

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11 मई 2018

सोनल करण मुक्ता मणी - स्तुती रचनाकार चारण विजयभा हरदासभा बाटी

🌹🌹🌹 छंद = सारसी 🌹🌹🌹
🌹🌹 सोनल करण मुक्ता मणी 🌹🌹

🙏🙏🙏🙏🙏 दुहो 🙏🙏🙏🙏🙏

सोनल सोनल सिमरता,तरता भव जग तीर.
हमीररी भणे ई हालीयो, पडखे नो रे पीर.

🙏🙏🙏🙏🙏 छंद 🙏🙏🙏🙏🙏

चारण वरण तारण तरण  तिमरा हरण सुरजा समी.
भु गंग जरण उजळा करण करणी किरण अरजा अमी.
जग तुं भरण करही पुरण भयरा अरण भव भंजणी.
अशरण शरण अनगल वरण सोनल करण मुक्तामणी. १

सविता सुचित कर शब्द सरभर छंद घर घर गुंजती.
प्रग्ना पवित पर ज्योत जरहर अहर नीशीहर कुंजती.
लोहरा जंगर त्रोड लंगर भीड किंकर भंगणी.
अशरण शरण अनगल वरण सोनल करण मुक्तामणी. २

रीपु दल सकल मल बल विफल कर प्रबल हो पावनकरी.
ज्योती अचल जल अनल जलहल थल विमल कर तुं खरी.
चारण सबल बल पुरत पल पल अतुल फल रव रंजणी.
अशरण शरण अनगल वरण सोनल करण मुक्तामणी. ३

ताकव तरण वट दीयण घट घट प्रगट पट पर परवरी.
अोजस उमट जट कीरण तट तट अघ उलट महिमा भरी.
कीर्ती सुजस रट ललीत रस खट भज सुभट्ट भट्ट जस भणी.
अशरण शरण अनगल वरण सोनल करण मुक्तामणी. ४

उज्वल धवल भण प्रफुल्ल मुख तण छुटत छण छण निरमळी.
चो छंद वर्ण वण कंठ धणणण ग्रज गयण गण गळहळी.
उतरण रयण अण दीपत दण दण दीयत दरशण सरजणी.
अशरण शरण अनगल वरण सोनल करण मुक्तामणी. ५

धारा बृहद गत प्रभा परखत ग्यान गहकत गहगती.
आभा कमल वत जगी जगवत तुंही महकत महमती.
शुभ सदा सिमरथ निरव निरखथ मिनख मिनरथ शंभणी.
अशरण शरण अनगल वरण सोनल करण मुक्तामणी. ६

सघळी विपत हर शिखर सर धर महर कर करुणाभरी.
घोरा तमश पर प्रखर फररर धव्ज धरण तप ते धरी.
तत् सत् लहर लग जबर जररर घररर गो घर पंखणी.
अशरण शरण अनगल वरण सोनल करण मुक्तामणी. ७

अवीरत अजीत रीत अभीत नवनीत नवीन नीत नीत अवतरी.
जय जगत हीत तीत तुंही तीत तीत अमीट प्रीत लय तु खरी.
विज कथत कीत कीत अमर क्रीत क्रीत अकथ गीत गीत मंडणी.
अशरण शरण अनगल वरण सोनल करण मुक्तामणी. ८

🌹🌹🌹 छंद = कळश छप्पय 🌹🌹🌹

सोनल रे सुखदाई,आई चारण चिरताली.
सोनल रे सुखदाई,बाई बेगे बिरदाली.
सोनल रे सुखदाई,पाई प्रगट परचाली.
सोनल रे सुखदाई,साई रेजे रखवाली.
अटक काज सघळा उकेल,सफळ फळे सुखकारणी.
हरो रोग दुविधा सकल,ताकवरा लज तारणी.

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स्तुती रचनाकार = चारण विजयभा हरदासभा बाटी

मो.9726364949

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14 अप्रैल 2018

गीत शाणोर रचिता बाटी विजयभा

*🌸🌸🌸गीत=शाणोर🌸🌸🌸*

*दर्शनो थिया विण पद्य के गद्य मा सुकवि,शब्द नि सोड़मु कहो केम आवे.*
*निर्अथक शब्द ने जोडवा तोडवा,प्रयासो जबरजस्ती तणा केम फावे.*

भावार्थ=हे श्रेष्ट सज्जन कवि जनो कदी पण दर्शनो नी अनुभूती वगर काव्य(पद्य) के पाठ(गद्य) मां शब्दो नी साची सोड़म अहो केम करी ने आवी सके.

निर्अथक शब्दो ने जोडवा अने तोडवा ना जबरजस्ती थी थयेला प्रयासो अहो केम करी ने फावे.

*प्रशस्ति लक्ष्य छे जेहनु तेहनि कलम मां,अहो केम शब्द ब्रह्म बृहद बाढे.*
*कठीन छे खडग थी कलम नी मित्रता,शब्द ना दोष तो कहर काढे.*

भावार्थ=जे लोको खाली सस्ती प्रशस्ति ना लक्ष्य मां अनुरक्त छे तेनी कलम मां अहो आ बृहद शब्द ब्रह्म केम करीने आवी सके.

तलवार करता पण कलम नी मित्रता साचववी घणी कठीन छे कारण के शब्द दोष लागे तो समुळो विनाश थाय छे.

*वर्ण ना सबंधो घनिष्ठ व्यापक रह्या,ई तुटता काव्य ना देव कोपे.*
*जोडकण जोडवा वृथा श्रम वेठवो,रूठीयो शब्द तो जिवन लोपे.*

भावार्थ=अक्षरो(वर्ण) ना अक्षरो साथे घणा घनिष्ट(घाटा) अने अति व्यापक सबंधो छे जो कोई ते अक्षरो ना सबंधो तोडवा ना कारण बने छे तो काव्य ना देव तेना उपर कोपायमान बने.

अने पाछु व्यर्थ जोडकणा जोडवा नो वृथा श्रम पण वेठवो पडे छे साथो साथ ऐ भय पण छे के शब्द रूठीयो तो कर्ता ना जिवन नो लोप पण करी दिये छे.

*पूर्ण अभ्यास विण विषय नव छेडवो,खेलवो नई कदी दाव खोटो.*
*दोवू करजोड विज नवावे शीश ने,शब्द ब्रह्म मांहरे ईष्ट मोटो.*

भावार्थ=पूर्ण अभ्यास वगर कोई पण विषय ने नो छेडवो जोई ऐ आपणे खोटो दाव कदी खेलवो नो जोई ऐ नकर परिणाम विपरीत आवे.

हूं मारा(विज) बन्ने हाथ जोडी मारा शीश नमावी कहूं छुं के मारो ईष्ट शब्द ब्रह्म छे ते सहु थी मोटो छे.

*रचिता=बाटी विजयभा*

1 अक्टूबर 2017

छंद=छप्पय स्तुती रचनाकार = चारण विजयभा हरदासभा बाटी

🌺🌺छंद=छप्पय🌺🌺

नमो विमला मात,कीरीट पीठ वारी ज्योती.
मुकुट गिरो जे थान,आप प्रगटी जग प्रोती.
पछम बंग कहु देश,तीर हुगली तट वासो.
लालबाग लह कोट,ओट जह आप प्रकाशो.
ललीत रुप लेखण संवर्त,कर्त शिव कल्याण है.
कथो विज घाटी कीरत,सकळ सुष्ट्री सरजाण है.

वृन्दावन विखयात,मथुरा स्थित भुतेश्र्वर.
द्वीत्य पीठ जगमात,ज्योत जलहल करुणेश्र्वर.
केशपास जीण थान,लुळक गीर स्वर्णा भुषण.
कात्यायनी प्रणाम,गंजनी खल दल दुषण.
भैरव है भुतेश आप,पाप प्रजाडण नाथ है.
चवे बिरद विज भाव से,जोडहाथ समराथ है.

महिषासुरमर्दीनी,जगत माता जय जननी.
महाराष्ट्र मे थान,गाँव कोल्हापुर धरनी.
त्रिचख शुभ जह गीरो,जयो युग द्रष्ट्रा देवी.
लछमीजीरो वास,आसपुरणी पद सेवी.
क्रोधशीश रीपु काम नाम,धाम धन्य धणी आप है.
करजोड नाथ विज चावीयो,हरण जीवजग ताप है.

श्री शक्ति सुन्दरी,भुवण त्रय लोक धीराणी.
पर्वत पीठ सुशोभ,क्षोभ भंजण दे वाणी.
थल लद्दाख सु थान,देश कश्मीर निवासी.
दछिण तल्प भई अंग,गीरी पर गीरीवर वासी.
सुंन्दरानंद सुंदर वदन,हरन दुख सुख धाम है.
नित्य भजन कर विज नेम,क्षेम कुशल विशराम है.

विशालाक्षी मात,आद अनाद अनंता.
पीठ शक्ति प्रऩिपात,नमो जगजीव नियंता.
काशी वाराणसी,मीर सु घाट प्रकाशी.
कनक मणी निपात,करण दछिणा राशी.
महा काल भैरव सदा,सकल रोग हर आप है.
कोटी कोटी विज कर नमन,सघन देव हर ताप है.

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स्तुती रचनाकार = चारण विजयभा हरदासभा बाटी.

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15 सितंबर 2017

रमा नस्मते रक्तवर्ण स्तुती रचनाकार = चारण विजयभा हरदासभा बाटी

छंद = नराच
रमा नस्मते रक्तवर्ण
हरी प्रिया कृपा करो हरो दरीद्र माहरा.
दियो सदा मूं धर्म यूक्त अर्थ वेद थाहरा.
न हो गृहे ग्रहण कदी मुणा गृहस्थ आसरा.
रमा नमस्ते रक्त वर्ण हर्ण कष्ट दासरा.(1)

श्री यंत्र मंत्र बीज मूल यूक्त सूक्त मंगला.
पफूल्ल कंज पंकजा विराज क्रांत संखला.
सुगंध गंध सौम्यता श्री रंग रम्य पासरा.
रमा नमस्ते रक्त वर्ण हर्ण कष्ट दासरा.(2)

श्रीमन्न मोद मोहनी हरी सुसंग भोगनी.
पनंग शेष पालखी सुभाग राग जोगनी
अदम्य दम्य पूष्प पान ह्रीं श्रीं बासरा.
रमा नमस्ते रक्त वर्ण हर्ण कष्ट दासरा.(3)

प्रतिष्ठ शिष्ठ दे अभिष्ठ द्रव्य गम्य वैभवी.
अभिन्न धन भिन्न भिन्न सर्व श्रेष्ठ मैधवी.
पमुख सुख उर्र्धव हो अभूत्व हो सुवासरा.
रमा नमस्ते रक्त वर्ण हर्ण कष्ट दासरा.(4)

सदैव यूक्त हो सशक्त मुक्त ताप मेदनी.
अभैव विश्र्व विंद मात तेज पूंज वेदनी.
हिरण्यगर्भ प्रेयसी भुजा अढार आसरा.
रमा नमस्ते रक्त वर्ण हर्ण कष्ट दासरा.(5)

श्री विष्णु वाम भाग अंग संग संग सोहनी.
दधी सुता विविध विध जिष्णु कार्य दोहनी.
सुरक्ष रक्ष हो प्रतक्ष चार लक्ष धर करा.
रमा नमस्ते रक्त वर्ण हर्ण कष्ट दासरा.(6)

समस्थ रोग हो परास्थ देह स्वस्थ आतमा.
उपस्थ हो समक्ष द्रव्य भय मुक्त प्राथमा.
अनिष्ठ तथ्य नष्ट प्राय विश्र्व शांत हो धरा.
रमा नमस्ते रक्त वर्ण हर्ण कष्ट दासरा.(7)

परीश्रमे क्रमे क्रमे प्रयत्न यत्न लभय्ते.
प्रसिध्ध सिध्ध हो विदीत कार्य क्षेम प्रजव्ते.
हो यत्र तत्र सर्वते 'विजय' श्रय दे वरा.
रमा नमस्ते रक्त वर्ण हर्ण कष्ट दासरा.(8)


स्तुती रचनाकार = चारण विजयभा हरदासभा बाटी
बावळी(ध्रांगध्रां) मो.9726364949
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11 सितंबर 2017

पींड ब्रह्मांड म ऐेक रचनाकार चारण विजयभा हरदासभा बाटी

छंद = सवैयो
पींड ब्रह्मांड मे ऐक समायो
रुण विहाणोय राखत हो प्रभु यो करुणाकर आप कहायो.
कहायो सदा सुख धाम महालय नाम निरजंण नाथ सुहायो.
सुहायो हरी शुभ भाव मनोहर दाखत दैवत देव चवायो.
चवायो तुंही ब्रह्म वेद पुरान मे पींड ब्रह्मांड मे ऐक समायो.
समायो अणु रुप खंड न खंडन मंडन पाट अखंड बिछायो.
बिछायो अविरल खेल महाभड आवत ना जिण अंत पठायो.
पठायो महा भूतभावन मोहन आवन जावन भ्रम भळायो.
भळायो तुंही ब्रह्म वेद पुरान मे पींड ब्रह्मांड मे ऐक जणायो.
जणायो महा तत् आप अगोचर जो सचराचर खेल रचायो.
रचायो अति मन मोद विनोद मे ऐह पटतंर आप जमायो.
जमायो बडो जिव जंगम खोयण चाक धुरी बन नाथ चलायो.
चलायो तुंही ब्रह्म वेद पुरान मे पींड ब्रह्मांड मे ऐक लखायो.
लखायो सभी गुणखाण अमोलख हद निहद बेहद बसायो.
बसायो जहाँ शून्य ऐक हुते प्रभु आप तहाँ अहो अंक बिठायो.
बिठायो गनित अजित अनंत मे लेखित हाथ हिसाब मिलायो.
मिलायो तुंही ब्रह्म वेद पुरान मे पींड ब्रह्मांड मे ऐक पुरायो.
पुरायो बहु जब प्रेम प्रकाशीत और उमंग सुयंग उजायो.
उजायो उछव निछावर प्राण उजागर आप जीवन पुजायो.
पुजायो सदा तुम सत्य सुधामय मृत्यु महाधन खेप खपायो.
खपायो तुंही ब्रह्म वेद पुरान मे पींड ब्रह्मांड मे ऐक दिखायो.
दिखायो नही तुम द्रंद्व कबु अरु छंद स्वछंद अणंद  बहायो.
बहायो अति गूढ व्यूढ महाबळ चेतण वाहणविंद गणायो.
गणायो सबे काल खावण जोगण आप वडामुख मोल भणायो.
भणायो तुंही ब्रह्म वेद पुरान मे पींड ब्रह्मांड मे ऐक  सुणायो.
सुणायो अनाहत ओहंम अखर ब्रह्म कुटीर मे ध्यान लगायो.
लगायो पीछे सूर सोहंम साहेब ग्यान त्रिकृट को आप तपायो.
तपायो निजानंद कंद आणंदह सुंदर मंगल रूप सवायो.
सवायो तुंही ब्रह्म वेद पुरान मे पींड ब्रह्मांड मे ऐक करायो.
करायो तुंही बहुधा सब घाट मे आप अघाट वैराट वसायो.
वसायो अनेक मे ऐक लीलाधर मोहक मोहन आप मनायो.
मनायो कथा कविता कर केशव विज कहे प्रभु ज्योत जगायो.
जगायो तुंही ब्रह्म वेद पुरान मे पींड ब्रह्मांड मे ऐक वचायो.

स्तुती रचनाकार = चारण विजयभा हरदासभा बाटी (कवि विज)
बावळी(ध्रांगध्रां) मो.9726364949

1 अगस्त 2017

जगदंब मोगल जे भणी चारण कवि विजयभा हरदासभा बाटी

जगदंब मोगल जे भणी 

छंद = सारसी
ओखा धरे,नवलख फरे,गरबो धरे,मथ्थ उपरे.
नवरात रे,नवला परे,जडहड जरे,ज्योतु फरे.
आनंद रंगे,बव उमंगे,शक्त संगे,लइ घणी.
धजबंध जे धिंगोधणी,जगदंब मोगल जे भणी.
    जगदंब मोगल जे भणी. (1)
सणगार सोळा,कयरा बोळा,पाय तोळा,शेष ना.
प्रक्रत अजोळा,वणे चोळा,बाइ तोळा,वेष ना.
बाजुयबंधा,नाग संधा,चडे कंधा,लट बणी.
धजबंध जे धिंगोधणी,जगदंब मोगल जे भणी. (2)
वादळ अषाढा,थीया बाढा,बने गाढा,भेळीया.
विजडी प्रगाढा,कोर काढा,जबक जाढा,रेळीया.
नवलख जडुके तारला विजडी कडुके जो घणी.
धजबंध जे धिंगोधणी,जगदंब मोगल जे भणी. (3)
लडवडे माळा,हिम पहाळा,त्रेण गाळा,कंठडे.
हुंफे हुफाळा,गळे थाळा,हिम वाळा,थे लडे.
हिम ओगडी ता जळ ढोळी,पद पखोळी गंगणी.
धजबंध जे धिंगोधणी,जगदंब मोगल जे भणी. (4)
सुर चंद नयना,तपे कयना,आभ अयना,जडहडे.
दो दश मयना,नेण बयना,वक्र लयना,चडवडे.
बारेय राशी,मुख हाशी,ग्रह ग्रासी,ते तणी.
धजबंध जे धिंगोधणी,जगदंब मोगल जे भणी. (5)
नवसौ नवाणा,नदी ताणा,गाय गाणा,खडखडी.
समंदर तमाणा,बिरद बाणा,बव वखाणा,फिणफडी.
डमरु डंमके,भु धंमके,गौ हंमके,रव रणी.
धजबंध जे धिंगोधणी,जगदंब मोगल जे भणी. (6)
विंझणा तोळे,पवन ढोळे,वा हिलोळे,वारणा.
तुम्मरा होडे,वयडा टोळे,नाद घोळे,चारणा.
समंदर वजाडे,ढोल ढाळे,गडगड गाळे,धोरणी.
धजबंध जे धिंगोधणी,जगदंब मोगल जे भणी. (7)
भेरव भेळो,करे केळो,वडो मेळो,जोगणी.
ब्रह्मांड बेळो,मथ्थे तेळो,निर्मळ नेळो,जो गणी.
सारसी छंदे,विज वंदे,जयो अंबे,तुं धणी.
धजबंध जे धिंगोधणी,जगदंब मोगल जे भणी.
       जगदंब मोगल जे भणी. (8)

- चारण कवि विजयभा हरदासभा बाटी ध्रांगध्रां
मो.9726364949

11 जनवरी 2017

दहाळ राजला अव्वल - रचिता~चारण कवि विजयभा हरदासभा बाटी

दहाळ राजला अव्वल
           दुहो
नवरोजा मथ्थे नख्ख,दख्ख ऐसो दरसाय.
राजल रजपुत रख्ख,नवरोजो दीयो छुडाय.
       छंद-नराच
पीथल लज कज सज सिंह रुप धारणी.
सुणी पुकार गौ दुता ता आगरे पधारणी.
चराडवे चडी वडी संभाळ बाळ तारणी.
दहाळ राजला अव्वल चाळ सुण चारणी.
बिकाण भुप हाण जाण तुं पलाण सिंहणी.
बिराण हाक डाक भैर क्रुध्ध कालीका बणी.
अनील वेग ले चली कतीब नीब डारणी.
दहाळ राजला अव्वल चाळ सुण चारणी.
विपल पल मे सबल तुं उथल भु सता.
मगा अगा जा ले भवा डगा मगा मिया पुता.
कराल कोप शंकरी हरी स्वरुप ले बणी.
दहाळ राजला अव्लल चाळ सुण चारणी.
अली मदद रद तद पीर हद पे भया.
नमाज वाजरा अवाज आज मुख से गया.
डणंक डाळीयाल मात जा तळाप मारणी.
दहाळ राजला अव्वल चाळ सुण चारणी.
अळेळ वाट आभ फाट तुं जपाट ले चडी.
हथालरी थपाट लाट भोम पाटरी फटी.
अथोक कोप भेंकरी लटाक लाक मारणी.
दहाळ राजला अव्वल चाळ सुण चारणी.
नोरोज बोज खंडणी प्रचंड चंड दंडणी.
छतीस साख खतीया तुं ओट लोवडी भणी.
रुआब दाब पातशाह तुं गरुर गारणी.
दहाड राजला अव्वल चाळ सुण चारणी.
मगे रगे जलालुदीन खीन खीन मुगला.
अबे शरण थाहरे सहार तार हिंगुला.
सदा सेवगा सहाय भीड भंज कारणी.
दहाळ राजला अव्वल चाळ सुण चारणी.
छप्पन कोड चामुंडा चोरास चारणा भळी.
नवे ही लाख लोवडी विशाभजा भजा वडी.
नराच छंद मे "विजो" भणो खमा धणी घणी.
दहाळ राजला अव्वल चाळ सुण चारणी.
           कवित
अकबरा काल माइ,छतीस शाखा पे आइ.
खतीया पे मोगलाइ,हुकम चलाइ है.
मीट न मंडाइ जाइ,उथपे न बात पाइ.
नको मुंछे ताव लाइ,कुरनीश बजाइ है.
जीण ने जुकायो नाइ,शीश कट जावे ताइ.
कातो दे लडाइ लाइ,राज रजडाइ है.
उण दीण मे भराइ,नवरोज ले के आइ.
"विज" वे राजल साइ,पीथल बचाइ है.
रचिता~चारण कवि विजयभा हरदासभा बाटी.
बावळी

छंद-त्रिभंगी - रचिता चारण विजयभा हरदासभा बाटी

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             दुहो
गज आनन गण नायका,गुण सागर गणवीर.
गवरी सुत गरवा गुनेश,भ्रग सुंनु सुंनु भडवीर.
ढुंढीराज तव पद ढला,धी कमले लव ध्यान.
भाव विभोरा दे भला,भजवा मुं भगवान.
       छंद-त्रिभंगी
भ्रग गण वीर नायक,भक्त सहायक,मंगल दायक,इंकदंता.
गवरी गुण गायक,विघ्न विदायक,हथ्थ दंडायक,भगवंता.
विध विध गुण सायक,वर वरदायक,चौ छंदायक,श्रुतीअंगा.
जय जय गज आनन,शिव सुत प्रानन,जपु जिभानन,भीडभंगा...१
शुध्ध बुध्ध वरदाता,विधी विधाता,लेखण ग्याता,कविराया.
वेदा वद वाता,निगम सुजाता,कवण प्रदाता,गुणगाया.
संगीत गीत धाता,सुर मुर्दु गाता,मुदंग बजाता,ध्वनीसंगा.
जय जय गजआनन,शिव सुत प्रानन,जपु जिभानन,भीडभंगा...२
चौ भुज महमंडी,विघ्न विखंडी,खल दल दंडी,चतुरंगी.
प्रहरी मुल खंडी,अजय अखंडी,प्रबल प्रचंडी,सतसंगी.
चवतो चित चंडी,भंज उदंडी,दंडा दंडी,प्रणवंगा.
जय जय गज आनन,शिव सुत प्रानन,जपु जिभानन,भीडभंगा...३
परब्रह्म परखंदा,चितरत छंदा,योग गहरंदा,ब्रह्मरंन्धा.
भंजण चित द्वंदा,व्रृती वेधंदा,नित निरखंदा,गुणग्रंधा.
काया पडछंदा,आनंद कंदा,तोडण फंदा,भवजंगा.
जय जय गज आनन,शिव सुत प्रानन,जपु जिभानन,भीडभंगा...४
शोभत चंद भाला,देह विशाला,भद्र भुवाला,नीत न्यारा.
शुभ लाभ सुबाला,रीध्धी सिध्ध वाला,नीध्ध निहाला,हर प्यारा.
बेजु गोवाला,लंक वचाला,शिव छुडाला,ध्रुमरंगा.
जय जय गज आनन,शिव सुत प्रानन,जपु जिभानन,भीडभंगा...५
मुषक असवारी,गज मुखहारी,फरसा धारी,फडकंदा.
गणपत गुणकारी,दोष निवारी,कष्ट सहारी,हरनंदा.
बिरद बलहारी,बाह पसारी,ले मुज तारी,दिव्यंगा.
जय जय गज आनन,शिव सुत प्रानन,जपु जिभानन,भीडभंगा...६
वेदा सरवाणी,पुजता प्राणी,प्रथम पुराणी,गणध्यक्षा.
योगे अगवाणी,रुजु प्रमाणी,सप्त सुजाणी,व्रणरक्षा.
ज्रागत कर खाणी,मंगल गाणी,गुणवर ग्याणी,क्रमसंगा.
जय जय गज आनन,शिव सुत प्रानन,जपु जिभानन,भीडभंगा...७
छंद लयखो त्रिभंगी,मत गत संगी,भाव उमंगी,बिरदायो.
लंबोदर अंगी,शब्द सुचंगी,क्षती कर भंगी,सभरायो.
तव पद "विज" पंगी,किंकर ढंगी,रख तव संगी,क्रृपमंगा.
जय जय गज आनन,शिव सुत प्रानन,जपु जिभानन,भीडभंगा...८
      छंद - छप्पय
गज आनन गण नाथ,गुण सागर गहरेशा.
महर करो माराज,मुल महला महरेशा.
जल राशी जगनाथ,महा कलशा जगराया.
रसो देव रस राज,कुंडला नेवड गाया.
ढळा पाय ढुंढी ढलाण,शुढी धर सरमोड है.
तळा तम हरणो "विजय",करो कीरत करजोळ है.
रचिता चारण विजयभा हरदासभा बाटी
मुळ - बावळी(ध्रांगध्रा)

सोनल करण मुक्तामणी - रचिता कवि -बाटी विजयभा हरदासभा

ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ
             दुहो
सोनल सोनल सिमरता,तरता भव जग तीर.
हमीररी भणे ई हालीयो, पडखे नो रे पीर.
          सोनल करण मुक्तामणी
                छंद - सारसी
चारण वरण तारण तरण तिमरा हरण सुरजा समी.
भु गंग जरण उजळा करण करणी किरण अरजा अमी.
जग तुं भरण करही पुरण भयरा अरण भव भंजणी.
अशरण शरण अनगल वरण सोनल करण मुक्तामणी. १
सविता सुचित कर शब्द सरभर छंद घर घर गुंजती.
प्रग्ना पवित पर ज्योत जरहर अहर नीशीहर कुंजती.
लोहरा जंगर त्रोड लंगर भीड किंकर भंगणी.
अशरण शरण अनगल वरण सोनल करण मुक्तामणी. २
रीपु दल सकल मल बल विफल कर प्रबल हो पावनकरी.
ज्योती अचल जल अनल जलहल थल विमल कर तुं खरी.
चारण सबल बल पुरत पल पल अतुल फल रव रंजणी.
अशरण शरण अनगल वरण सोनल करण मुक्तामणी. ३
ताकव तरण वट दीयण घट घट प्रगट पट पर परवरी.
अोजस उमट जट कीरण तट तट अघ उलट महिमा भरी.
कीर्ती सुजस रट ललीत रस खट भज सुभट्ट भट्ट जस भणी.
अशरण शरण अनगल वरण सोनल करण मुक्तामणी. ४
उज्वल धवल भण प्रफुल्ल मुख तण छुटत छण छण निरमळी.
चो छंद वर्ण वण कंठ धणणण ग्रज गयण गण गळहळी.
उतरण रयण अण दीपत दण दण दीयत दरशण सरजणी.
अशरण शरण अनगल वरण सोनल करण मुक्तामणी. ५
धारा बृहद गत प्रभा परखत ग्यान गहकत गहगती.
आभा कमल वत जगी जगवत तुंही महकत महमती.
शुभ सदा सिमरथ निरव निरखथ मिनख मिनरथ शंभणी.
अशरण शरण अनगल वरण सोनल करण मुक्तामणी. ६
सघळी विपत हर शिखर सर धर महर कर करुणाभरी.
घोरा तमश पर प्रखर फररर धव्ज धरण तप ते धरी.
तत् सत् लहर लग जबर जररर घररर गो घर पंखणी.
अशरण शरण अनगल वरण सोनल करण मुक्तामणी. ७
अवीरत अजीत रीत अभीत नवनीत नवीन नीत नीत अवतरी.
जय जगत हीत तीत तुंही तीत तीत अमीट प्रीत लय तु खरी.
विज कथत कीत कीत अमर क्रीत क्रीत अकथ गीत गीत मंडणी.
अशरण शरण अनगल वरण सोनल करण मुक्तामणी. ८
          छंद - छप्पय
सोनल रे सुखदाई,आई चारण चिरताली.
सोनल रे सुखदाई,बाई बेगे बिरदाली.
सोनल रे सुखदाई,पाई प्रगट परचाली.
सोनल रे सुखदाई,साई रेजे रखवाली.
अटक काज सघळा उकेल,सफळ फळे सुखकारणी.
हरो रोग दुविधा सकल,ताकवरा लज तारणी.
रचिता कवि -बाटी विजयभा हरदासभा
बावळी.

जपा जगदंब जोराळी रे - रचिता विजय बाटी

चराडवे चारणी चंडी,वेह्मंडे महिमा मंडी.
खल दल बल ने खंडी,आयव आंटाळी रे.
जपा जगदंब जोराळी रे. टेक
पीथल नी पारखी पीडा,भायगा भोरींग ना भीडा.
कमधजरा ना धीडा,कांठडे भाळी रे.
जपा जगदंब जोराळी रे. टेक
हेकण जा साद हुंकारे,पुगे त्या तो प्रथमी पारे.
अडधा डगले डारे,भव भालाळी रे.
जपा जगदंब जोराळी रे. टेक
लालादेरी लजीया काजे,खतीयारी ओजले बाजे.
खाडा ने खपरा गाजे,आज डाढाळी रे.
जपा जगदंब जोराळी रे. टेक
मीना बजार मजारे,हैया नी हिंमतु हारे.
पीथो राजल पुकारे,भेळीया वाळी रे.
जपा जगदंब जोराळी रे. टेक
सांभळो जा साद गौ दुता,हाली तुं आभ अभुता.
वायु ना विंजणा हुता,नोरता वाळी रे.
जपा जगदंब जोराळी रे. टेक
लीधो ते आगरे आंटो,दल्ली गढ भेयळवो घाटो.
नारसिंघी यवना कांटो,कढ पंजाळी रे.
जपा जगदंब जोराळी रे. टेक
पतशा ना पाप पछाळी,कायढा नवरोज नेजाडी.
लीधा खत वट ने खाळी,परचा वाळी रे.
जपा जगदंब जोराळी रे. टेक
चोरासी चारणा चंडी,खमा भणो आज अखंडी.
फरे तोळी आण लोखंडी,लोवडी वाळी रे.
जपा जगदंब जोराळी रे. टेक
बाटी विज बारणे उभो,गडगडा साद गळुभो.
राजबाइ बाळ वळुभो,चरणे तोळी रे.
जपा जगदंब जोराळी रे. टेक
रचिता विजय बाटी

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