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3 मार्च 2018

इश्वर माणस ने कहे छे एवी चारण कवि दाद बापु

💐 *इश्वर माणस ने कहे छे एवी चारण कवि दाद बापु नी गजल* 💐

एक रंगो नहीं रंग पलटी ने आव
तने मानव घड्यो छे जरा हटी ने आव

अरे शेर मां शेर, अने पाशेर मा पाशेर?
सरखो जोखामा कां वधी कां घटी ने आव
तने मानव घड्यो छे जरा हटीने आव

चीलामा ने चीलामा तो निर्जीव चाले
तुं चेतक घड्यो छे आडो फंटीने आव
तने मानव घड्यो छे जरा हटीने आव

कोकनी मशाल लइने तुं दोडमा
कोक अंधारे खुणे दिवो प्रगटी ने आव
तने मानव घड्यो छे जरा हटीने आव

मेंतो कीडीने चलावी छे विश्वास राखजे
थंभ धखतो नथी एने लपटीने आव
तने माणस घड्ये छे जरा हटीने आव

वखाण सुणी-सुणी हवे थाकी गयो छुं
मारो वालो करुं जराक वढीने आव
तने मानव घड्यो छे जरा हटीने आव

हे सीधा बोला थोडुं अवडुय बोल
मने गमसे 'मरा मरा' रटी रटीने आव
तने मानव घड्यो छे जरा हटीने आव

मोती चोकमा छे छुपाव्युं नथी
"दाद" साचो होयतो साच वाटीने आव
तने मानव घड्यो छे जरा हटीने आव

💐 *रचना =चारण कवि दादबापु* 💐

🌷 *टाइपिंग=राम बी. गढवी* 🌷
*नविनाळ-कच्छ*
*फोन. -- 7383523606*

👏🏼 *भुलचुक क्षमां* 👏🏼

💐 *वंदे सोनल मातरमं* 💐

19 अगस्त 2017

याद हेमुं आवशे कविश्री दाद

कविश्री दादुदानजीअे हेमु गढवी नी रचेल एक रचना

( छंद सारसी )
चडशे घटा घनघोर गगने मेघ जळ वरसावशे ,
नील वरणी ओढणी ज्यां धरा सर पर धारशे ,
गहेकाट खातां गिर मोरां पियु धन पोकारशे ,
एे वखत आ गुजरातने पछी याद हेमुं आवशे ,            ||1||

चडशे गगनमां चांदलो ने रात नवरात्युं हशे ,
संध्या मळीने साथीडा जे"दी रासडे रमता हशे ,
तेदी" रमण राधा काननां कोई गीतडां ललकारशे ,
एे वखत आ गुजरातने पछी याद हेमुं आवशे ,           ||2||

तु:खी पियरनी दिकरी कोई देश देशावर हशे ,
संतापना सासरवासना अे जीवनभर सहेती हशे ,
वहअे वगोव्यानी रेकर्डु ज्या रेडियो पर वागशे ,
एे वखत आ गुजरातने पछी याद हेमुं आवशे ,          ||3|| 

मोंघामुली "सौराष्ट्रनी रसधार" जे रचतो गयो ,
ए कलमनी वाचा बनी तुं गीतडां गातो गयो ,
अे लोकढाळो परजना कोई   "दाद"   कंठे धारशे ,
एे वखत आ गुजरातने पछी याद हेमुं आवशे ,           ||4||

( दुहा )
कंठ गयो के"णी गई , गई , मरदानगीनी वात ,
हद थई के हेमुं गयो , गरीब थयुं गुजरात ,

संगीतमां सोंपो पड्यो , गमे सुणवुं गाम ;
तुं मरतां मिजलस गई , दिलनी हेमुदान ,

( भूल होयतो सुधारीने वांचवु )

:- रचयता कविश्री दादुदान प्रतापदान गढवी ,

:- टाईप मनुदान गढवी

.        🙏 वंदे सोनल मातरम् 🙏

27 अक्टूबर 2016

।। नदी रुपाळी नखराळी।। रचयिता -कवि दादूदान प्रतापदान मीसण

।। नदी रुपाळी नखराळी।।
     
             ।।छंद – त्रिभंगी।।
डुंगर सूं दडती, घाट उतरती, पडती पडती, आखडती।
आवै उछळती, जरा नि डरती, हरती फिरती, मद झरती।
किलकारां करती, डगलां भरती, जाय गरजती जोराळी।
हिरण हलकाळी,जोबन वाळी,नदी,रुपाळी, नखराळी।।1।

आंकडियां वाळी, वेल घटाळी, वेलडियाळी, वृखवाळी।
अवळां आंटाळी, जांमी झाळी, भेखडियाळी, भे वाळी।
तिणने दे ताळी, जातां भाळी, लाखणियाळी लटकाळी।
हिरण हलकाळी, जोबन वाळी,नदी,रुपाळी, नखराळी।2।

जोगंद्र जटाळा, भूरी लटाळा, चाल छटाळा चरचाळा।
डणके डाढाळा, सिंहण बाळा, दस्स हथाळा, दे ताळा।
मोटा माथाळा, ग्रजवै गाळा, हिरणियाळी, हुंकारी।
हिरण हलकाळी, जोबन वाळी, नदी,रुपाळी, नखराळी।3।

गांगडिया वाळी, मां ममताळी, खोडल माडी, खपराळी।
बैठी वहां बाळी, कायम काळी, जतन कराळी, जोराळी।
थांनक लै थाळी, नैवध वाळी, मानव आवत, सरधाळी।
हिरण हलकाळी, जोबन वाळी,नदी,रुपाळी, नखराळी।4।

डेडां डळवळतां, झुंड झळुबतां, मग्गर फरता मुंह फाडै।
जळ कुकड चरतां,बतख विहरतां,दादर डहकत,दिन दाडै।
माछलियां टोळां, करे किलोळां, बुगला बहोळा,बहु भाळी।
हिरण हलकाळी, जोबन वाळी, नदी,रुपाळी, नखराळी।5।

आंबा आंबलियां, उम उंबरियां, खेर खिजडियां, बोरडियां
केसुडां कळियां,वा खाखरियां,हेम री कळियां, आवळियां।
जण प्रथी उतरियां, हूरां परियां, वेलड वळियां, जळ गाढी।
हिरण हलकाळी, जोबन वाळी, नदी,रुपाळी, नखराळी।6।

रायण कोळंभा, ले अवळंबा, जोय जळंबा, जळबंबा।
कर केश कलंबा, बिखर लंबा, जै जगदंबा, वन अंबा।
“दादल” दिल रंगी, छंद त्रिभंगी, बण्यो उमंगी, बिरदाळी।
हिरण हलकाळी, जोबन वाळी, नदी,रुपाळी, नखराळी।7।

वरखा रुत घेली, जोम भरेली, नदी नवेली, नवढा सी।
सह नदीयां पहली, जात वहेली, शायर वहाली,चपला सी।
ठेबां दे ठेली, हा हडसेली, मारग मेली, खरताळी।
हिरण हलकाळी, जोबन वाळी, नदी,रुपाळी, नखराळी।8।

फळ फूल खिलंतां, कोक किलंतां, पंछी फिरंतां, पचरंगी।
थै थै थनगनतां, मोर नचंतां, नित नरखंतां, नवरंगी।
ढेलडियां ढूंगां, चढती रुंखां, एहडा मुंगा, दरसाळी।
हिरण हलकाळी, जोबन वाळी, नदी,रुपाळी, नखराळी।9।

खळ खळ ता झरणां, लीलां तरणां,चरतां हिरणां,ठेक भरै।
कई श्वेत सु वरणां, नीलां वरणां, कंकु चरणां, फूल करै।
मधुकर गुंजारं, भांत अठारं, बनि बहारं, बिरदाळी।
हिरण हलकाळी, जोबन वाळी,नदी,रुपाळी, नखराळी।10

रचयिता -कवि दादूदान प्रतापदान मीसण
                    प्रेषक
             आशुतोष चारण
🌹 🌹 जय महाकाल ग्रुप 🌹 🌹

20 अगस्त 2016

याद हेम आवशे

कंठ गयो, के'णी गई, गई मरदानगी नी वात,
हद थई के हेमु गयो, गरीब थयु गुजरात।
संगीत मा सोपो पड्यो, सुणवुं गमे ना गान,
तुं मरता मीजलस गई, दिल नी हेमुदान
चडशे घटा घनघोर गगने मेघ जळ वरसावशे,
नीलवरणी ओढणी ज्यां धरा सर पर धारशे,
गहेराट खातां गीर मोरां पीयु धन पोकारशे,
ऐ वखते आ गुजरात ने पछी याद हेमु आवशे।
चडशे गगन मां चांदलो ने रात नवरात्युं हशे,
संधा मळी ने साथीडा जे दी' राहडे रमता हशे,
ते दी' रमण राधा कान नां कोई गीतडां ललकारशे,
ऐ वखते आ गुजरात ने पछी याद हेमु आवशे।
दुःखी पीयर नी दिकरी कोई देश देशावर हशे,
संताप सासरवासना ऐ जीवनभर सहेती हशे,
वहुऐ वगोव्या नी रेकर्डुं ज्यां रेडीयो पर वागशे
ऐ वखते आ गुजरात ने पछी याद हेमु आवशे।
मोंघा मुली सौराष्ट्रनी रसधार जे रचतो गयो,
ऐ कलम नी वाचा बनी तुं गीतडां गातो गयो,
ऐ लोक ढाळो परज ना कोई 'दाद' कंठे धारशे,
ऐ वखते आ गुजरात ने पछी याद हेमु आवशे।

लोक गायक स्व. श्री हेमु भाई गढवी ने 51 मी पुण्य तीथी ऐ श्रध्धांजली

17 अगस्त 2016

चारण कवि दादबापु रचीत रवेची मां नी चरज

 चारण कवि दादबापु रचीत रवेची मां नी चरज 
तुं हालने जट होय त्यांथी,कहुं छुं उगता दने
वाटुं नीहाळे वावडे मां तलखतां छोरु तने
उभी न रेजे एक घडीए,धाबळी लइ धाळजे
रव राय लाजुं राखवा,अण वखत वेली आवजे
भुला पड्या भवसागरे मां,गळालग डुबी गयां
छेटा पड्या तुजथी जनेता,आंखेथी अणदिठ थयां
लांबा करीने कर लाबडीना,तत क्षण बधाने तारजे
रव राय लाजुं राखवा,अण वखत वेली आवजे
तुं सोड्य ताणी सुइ गइ के,घेनमां घेराइ गइ
पांपण चड्या कइं पडळ के,गढपणे घेराइ गइ
तोय लाकडीनो टेकाे लइने,उतावळी जट आवजे
रव राय लाजुं राखवा,अम वखत वेली आवजे
जे आंगणा जोव नता,त्यां जाचवा जावुं पड्युं
जे कर्म नोतुं पुर्वोजोनुं,तोंय हा करवुं पड्युं
हवे अकर्म ने अविचार मांथी,मावडी तुं मुकावजे
रव राय लाजुं राखवा,अण वखत वेली आवजे
भले तुटे तार जगतथी,तुजथी कदी न तुटजो
सागर भले शोषाय,झरणा प्रेमना नव खुटजो
कहे "दाद" छोरु मातना, सबंधने संभाळजे
रव राय लाजुं राखवा,अण वखत वेली आवजे
 रचना - चारण कवि दादबापु 
 टाइपिंग - राम बी. गढवी 
नविनाळ - कच्छ
फोन नं. - 7383523606
 भुलचुक सुधारीने वांचवी 
 वंदे सोनल मातरमं 

16 अगस्त 2016

कविश्री दादनी रचना :- प्रभु तुं आपे अेटलुं ज लउ

कवि श्री दादनी रचना

*प्रभु तुं आपे अेटलुं ज लउं*

नही ओछुं वधुं कंई कउं , प्रभु तुं आपे अेटलुं लउं .

आ संसारमां तारी समृद्धीना,भंडार भर्या छे बउं.
मुखमां समाशे अेटलुं ज मागीश, नही उंडळमां लउं ,
प्रभु तुं आपे अेटलुं लउं .

मोंघा होय तोय मोती खवाय नही खाय सौ बाजरो ने घउं.
मीलना मालीकथी ताका पे'राय नही, सवा गज पहेरे सौ .
प्रभु तुं आपे अेटलुं लउं .

समदर पीधे प्यास बुझे नही,अपचो थई जाय बउं.
मीठडुं नानुं झरणुं मळे तो अमृत घुंटडा लउं .
प्रभु तुं आपे अेटलुं लउं .

घरना गोखमां प्रभु मळे तो हालुं शीद गाउना गाउ .
*"दाद"* कहे प्रभु तारी दुनियामां तुं राखे अेम रउं .
प्रभु तुं आपे अेटलुं लउं .

रतियता :- कविश्री दाद
टाईप    :- मनुदान गढवी

                वंदे सोनल मातरम्

2 मई 2016

कवि श्री दाद नी रचना :- रवराय लाजु राखवा

कवि श्री दादनी रचना :- रवराय लाजु राखवा
तुं हाल्य ने जट होय त्यांथी कोई वा'रु नहि कने ,
वाटुं नरखता वावडे मा तलखता छोरु तने ,
उभी न रहेजे अेक घडीअे धाबळी लई धोडजे,
रवराय लाजुं राखवा अण वखत वहेली आवजे .
भुला पड्या भव सागरे अम गळा लग डुबी गया ,
छेटा थया तुजथी अने तव आंख थी अळगा रह्या ,
हेते लंबावी हाथ मा कांठे बधांने काढजे ,
रवराय लाजुं राखवा अण वखत वहेली आवजे .
जे आंगणां जोवां न'तां त्यां जाचवा जावुं पड्युं ,
जे करम नहि अम पूर्वजो नुं अे करवुं पड्युं ,
अकरम अने अविचार सघळा मावडी मुकावजे ,
रवराय लाजुं राखवा अण वखत वहेली आवजे .
सोड्य ताणी सूई गई के घेन मां घेराई गई ,
पांपणे चडीया पडोळे के घडपणे लेवाई गई ,
तोय लाकडी टेको लई उतावळे जट आवजे ,
रवराय लाजुं राखवा अण वखत वहेली आवजे .
सागर भले सुकाओ पण अमी झरण तव खुटो नहि ,
हवे बांय झाली मावडी मजधार मां मुको नहि ,
कहे "दाद" छोरु मातना संबंध ने संभाळजे ,
रवराय लाजुं राखवा अण वखत वहेली आवजे .
रचयता :- कवि श्री दाद
टाईप :- मनुदान गढवी
       वंदे सोनल मातरम्

16 मार्च 2016

कवि श्री दाद नी रचना

कवि श्री दादनी एक रचनाओ 
मारा फळियाना वड केरी डाळे
    हींसको हीरले भरीयो.
पंखीडा आवी आवीने उडी जाय ..... टहुको तारो सांभरीयो .....
तने वढवाना घणाय मनमां कोड ,
पण तें गुंनो ना एकेय करीयो .
तारा दु:खमां हुं भागीदार थाउं .
पण तें निसासो ना एकेय, भरीयो..(के)..टहुको तारो  सांभरीयो ,
धीडी (दीकरी) तुं हसमुखी अने हेताळ.
वालपनो जाणे विरडो.
तारा गीतडे मधमधे आखुं गाम .
चौटो ने पाणी शेरडो. .(के)..टहुको तारो  सांभरीयो ,
तारो बापु ! अे बापु ! केरो साद.
गुंजामा भरी में तो राखीयो.
ज्यारे आवे छे तारी बहु याद.
त्यारे छानो छानो चाखीयो. .(के)..टहुको तारो  सांभरीयो ,
भाईना मीठडां लीधेला आठे पोर .
ई टचकडाअे ओरडो भरीयो.
टचकडा उघाडे छे तारो वीर .
एनाथी एकेय ना उपड्यो . .(के)..टहुको तारो  सांभरीयो ,
धीडी तें गजा उपरवट कीधां काम .
डील(शरीर) नो ना धडो करीयो.
तें मांड रे उघाडी . ज्या आंख्य .
त्या तो वरघोडो आवी उभो रीयो. .(के)..टहुको तारो  सांभरीयो ,
धीडी तारी अेटली छे गरवाई.
के गरवो टुंको पडीयो.
तने सौ सौ सलामुं मारा फुूल.
तारी पांहे "दाद" हु नानो पडीयो. (के) ..टहुको तारो सांभरीयो..
आ रचना मोकलवा बदल श्री मोरारदान भाई नो आभार.
टाईपमां भुल होयतो क्षमा करजो
रतयता :- कवि श्री "दाद"
टाईप   :- मनुदान गढवी - महुवा
 
             वंदे सोनल मातरम्

20 दिसंबर 2015

कवि श्री दादनी एक रचना { टेरवां } ....

कवि श्री दादनी एक रचना { टेरवां } ....
धिरां धिरा रे वगाड , काळजामां वागे छे टेरवां
लपतां ने छपतां आवी , उभां छे बारमां ;
खोले छे हैयाना द्वार , टकोरा मारे छे टेरवां.
हसतां भीत्युंअे ओल्यां चाकळे चंदरवे ;
मांड्युं छांड्युं मां मलकाय , टोडले टहुके छे टेरवां.
ता णा वा णा जेम चोट्यां गो कु ळ ने ,
गोपीने हैये गूंथाई , वनरावनमां गुंजे छे टेरवां.
जीवन जंजाळ घडीक ममताने खोळले ;
बाळक बनीने उंघी जाय , माथडा पंपाळे छे टेरवां.
डूकी गयां होय भले नदियुंनां वेन "दाद"
अंतरनां नीर उभराय , वीराडा गाळे छे टेरवां.
भुल होयतो सुधारीने वांचवा विनंती
रचयता :- कविश्री दाद
टाईप :- मनुदान गढवी -
➡ एक विनंती आप  कोईबंधू पासे कविश्री दाद अने कविश्री कागबापुनी रचनाओ ( साहित्य ) होयतो आ 9687573577.मोकलवा नम्र विनंती छे
जेथी करने आ साहित्यनो लाभ बधाने मळी शके .
सहकार बदल सहुनो आभार
      वंदे सोनल मातरम् 

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