.

"जय माताजी मारा आ ब्लॉगमां आपणु स्वागत छे मुलाक़ात बदल आपनो आभार "
आ ब्लोगमां चारणी साहित्यने लगती माहिती मळी रहे ते माटे नानकडो प्रयास करेल छे.

Sponsored Ads

Sponsored Ads

.

Notice Board


Sponsored Ads

रचनाओ लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
रचनाओ लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

30 जनवरी 2020

संभार लेवा बाळनी अविलंब अंबा आवजे रचियता :- आईश्री खीमश्री मां

प्रात:स्मरणीय प.पू.आईश्री खीमश्री मां (मोटा भाडिया मांडवी-कच्छ)नो 79 मो प्रागटय दिवस महा सुद-6 ता.31-01-2020 ना उजवाशे ऐ निमित्ते आई श्री खीमश्री मां रचित रचना

               छंद
  रचियता :- आईश्री खीमश्री मां

मद दोश गंजन भकत रंजन, भीड भंजन भगवती
आदीन अंता शिव संता, नित वंदता सद्व्रती
परमेश्वरी पुरण कृपाळु रहेम नजरू राखजे
    संभार लेवा बाळनी अविलंब अंबा आवजे...1
अग हारणी ब्रह्मचारणी, सुख कारणी खल मारणी
तारणी देवी अम लोक पर, नजरुं कर नारायणी
सद्बुद्धि आपजो सर्वने, दिल कुबुद्धि कापजो
     संभार लेवा बाळनी अविलंब अंबा आवजे...2
ब्रह्मांड पोषणी जगत माता, साद मारो सांभळो
तलवार लईने तत्काळ आवो,द्रहिष पातकने डरो
जंजार तोरण जोग माया, पवित्र तुं पथरावजे
    संभार लेवा बाळनी अविलंब अंबा आवजे...3
आदि अनादि अनुपम निज, अटल रिद्धि आपजे
ब्रह्मांड हाले बोलथी चारण अलोकी अवतरे
छळ कपट जुठ अन्याय, वखत पे वरतावजे
    संभार लेवा बाळनी अविलंब अंबा आवजे...4
भगवती मैया मेर कर, द्रढ चारण नव लजे
छोरुं कछोरू बने तोय, माता नव तजे
भय निवारण भेडीयारी, जयोत सत जगावे
   संभार लेवा बाळनी अविलंब अंबा आवजे...5
तपवान विधावान दातार सुर, सजताने सज चडे ऐवा बनावजे
आशा पुरण नीरखता, नहेणला अमारा  ठरे
"खीमश्री" बाळक तणी आ अरजी तुं स्नेह सहित स्वीकारजे
   संभार लेवा बाळनी अविलंब अंबा आवजे...6

प.पू.खीमश्री मां जन्म जयंती उजवणी कार्यक्रम
ता.31-01-2020 अने शुक्रवार
सवारे 9 कलाके :- समाधी पूजन
सवारे 10 कलाके :- धर्मसभा
बपोरे 1 कलाके :- महाप्रसाद
स्थळ :- आई श्री खीमश्री मांनी वाडी, मोटा भाडिया-नानी खाखर रोड , मोटा भाडिया मांडवी कच्छ


9 सितंबर 2019

कानदासजी मेहडु कृत हनुमान वंदना

कानदासजी मेहडु कृत हनुमान वंदना

                          दोहा

सुरस्वती उजळ अती, वळि उजळी वाण।
करु प्रणाम जुगति कर, बाळाजती बखाण॥1॥

अंश रुद्र अगियारमो, समरथ पुत्र समीर।
नीर निधि पर तीर नट,कुदि गयो क्षण वीर॥ 2 ॥

खावण द्रोणाचळ खमै, समै न धारण शंक।
वाळण सुध सीता वळै, लिवि प्रजाळै लंक॥ 3 ॥

पंचवटी वन पालटी, सीत हरण शोधंत।
अपरम शंके धाहियो, हेत करै हडमंत॥ 4॥

                         छंद त्रिभंगी।

मन हेत धरंगी, हरस उमंगी, प्रेम तुरंगी, परसंगी।
सुग्रीव सथंगी, प्रेम पथंगी, शाम शोरंगी, करसंगी।
दसकंध दुरंगी, झुंबै झंगी, भड राखस जड थड भंगी।
रामं अनुरंगी, सीत सुधंगी, बिरद उमंगी, बजरंगी॥ 1 ॥

अवधेश उदासी, सीत हरासी, शोक धरासी, सन्यासी।
अणबखत अक्रासी, बोल बंधासी, लंक विळासी, सवळासी।
अंजनी रुद्राशी, कमर कसंसी, साहर त्रासी, तौरंगी।
रामं अनुरंगी, सीत सुधंगी, बिरद उमंगी, बजरंगी॥ 2 ॥

करजोड कठाणं, पाव प्रमाणं, दधि प्रमाणं, भरडाणं।
भचकै रथ भाणं, धरा ध्रुजाणं, शेष समाणं साताणं।
गढलंक ग्रहाणं, एक उडाणं, पोच जवाणं, प्रेतंगी।
रामं अनुरंगी, सीत सुधंगी, बिरद उमंगी, बजरंगी॥ 3 ॥

हलकार हतूरं, फौज फतूरं, सायर पूरं संपूरं।
कर रुप करुरं,वध वकरुरं, त्रहकै घोरं, रणतूरं।
जोधा सह जुरं, जुध्ध जलुरं, आगैवानं, ओपंगी।
रामं अनुरंगी, सीत सुधंगी, बिरद उमंगी, बजरंगी॥ 4 ॥

आसो अलबेली, बाग बणेली, घटा घणेली, गहरेली।
चौकोर भरेली, फूल चमेली, लता सुगंधी, लहरेली।
अंजनि कर एली, सबै सहेली, हेम हवेली, होमंगी।
रामं अनुरंगी, सीत सुधंगी, बिरद उमंगी, बजरंगी॥ 5॥

नल नील तेडाया, गरव न माया सबै बुलाया, सब आया।
पाषाण मंगाया, पास पठाया, सब बंदर लारे लाया।
पर मारग पाया, राम रिझाया, हनुए धाया, हेतंगी।
रामं अनुरंगी, सीत सुधंगी, बिरद उमंगी, बजरंगी॥ 6॥

लखणेश लडातं, सैन धडातं, मुरछा घातं, मधरातं।
साजा घडी सातं, वैद वदातं, प्राण छंडातं, परभातं।
जोधा सम जातं, जोर न मातं, ले हाथं बीडो लंगी।
रामं अनुरंगी, सीत सुधंगी, बिरद उमंगी, बजरंगी॥ 7॥

हनुमंत हुंकारं, अनड अपारं, भुजबळ डारं, भभकारं।
कर रुप कराळं, विध विकराळं, द्रोण उठारं, निरधारं।
अमरं लीलारं, भार अढारं, लखण उगारं, दधि लंघी।
रामं अनुरंगी, सीत सुधंगी, बिरद उमंगी, बजरंगी॥ 8 ॥

सिंदूर सखंडं, भळळ भखंडं, तेल प्रचंडं, अतडंडं।
किय हार हसंडं, अनड अखंडं, भारथ डंडं, भुडंडं।
चारण कुळ चंडं, वैरि विहंडं , प्रणवै कानड कवि पंगी।
रामं अनुरंगी, सीत सुधंगी, बिरद उमंगी, बजरंगी ॥ 9

5 सितंबर 2019

आई श्री आवड़ चरित्र महिमा रचियता जय सिंह सिंढायच मण्डा राजस्थान

🌸 आई श्री आवड़ चरित्र महिमा 🌸
                       🌹दोहा🌹
जग मावड़ आवड़ जयो,सगत सरब सिरमौड़ ।
आगै बड़पण आपरै,  हुवै न   किण  सूं  होड़ ।।
बडा    बडी   भुजबीस   हो, राज   तैमड़ाराय ।
क्रोड़ वखत पदकमल में,नमन करूं सिरनाय ।।
                 🌸छंद रोमकंद🌸
कलिकाळ महाविकराळ हळाहळ,घौर कुजोर बढै जवनां ।
भव भार उतारण दास उबारण, कारण याद करे वचनां ।
बिसरी नहि अम्ब दयाळ  अजै, गण चारण ने वर राज  दयो।
जय मावड़ आवड़ बीसभुजा बड, लाखिय लौवड़वाळ  जयो।
जिय माड धिराणिय माय जयो ।। १ ।।

उपहास सहै  सुत बंश बिना, घण मामड़ चित्त उदास भयै  ।
शरणै जद मामड़ सात समै,  घण आस लियां     हिंगल़ाज  गये ।।
अरदास सुणी उर आण दया, हरसाय हिये वरदाण  दयो।
जय मावड़ आवड़ बीसभुजा बड, लाखिय लौवड़वाळ जयो  ।।
जिय माड धिराणिय माय जयो ।। २ ।।

अवतार धरूं धर सात सरूपम, पूरण तो सब     आस करूं।
लिय साथ में भैरव भ्रात महीरख, बंश बधारण तौय सरू।
उतरूं तव आंगण आभ विवाण सूं, श्री मुख ऐम उवाच कयो।
जय मावड़ आवड़ बीसभुजा बड, लाखिय लौवड़वाळ  जयो ।
जिय माड धिराणिय माय जयो  ।। ३ ।।

धिन आठ सदी धिन आठ ही संवत, मास मधू नवरात मही ।
अवतार धरे नवमी शुभ वासर, थावर  आण सुभौर थही ।
निज भैरव भ्रात महीरख साथ में, धारण सात सरूप कयो ।
जय मावड़ आवड़ बीसभुजा बड, लाखिय लौवड़वाल़ जयो।
जिय माड धिराणिय माय जयो ।। ४ ।।

दुसकाल़ महाविकराल़ लखी जद माड धरा मझ आप मया ।
कर मात दया जन संग सभी, गढ नानण सिंध प्रदैश गया  ।।
चरखा बिन पाण चलाय लखी जन, कातत सूत अचंभ कयो।
जय मावड़ आवड़ बीसभुजा बड, लाखिय लौवड़वाळ जयो।
जिय माड धिराणिय माय जयो ।। ५ ।।

हद कौड़ कियां नद नीर नहावत, साथ मिल़ी निज बैन सभी ।
छिपियौ नृप म्लेच्छ तणो सुत छूवत, पैरण के पट आय तभी।
तन नागण रूप सु धार सभी, नद नावत नीर पयाण  कयो ।
जय मावड़ आवड़ बीसभुजा बड, लाखिय लौवड़वाळ जयो।
जिय माड धिराणिय माय जयो ।। ६ ।।

जवनापति नीत अनीत लखी, सब मात क साथ पयाण कियो।
मझ मारग मांय महानद मात नें, होय अजांण न जांण दियो ।
कर कोप घणो नद.हेक चल़ू भर, सोख मया मझ मग्ग कियो ।।
जय मावड़ आवड़ बीसभुजा बड, लाखिय लौवड़वाळ  जयो ।
जिय माड धिराणिय माय जयो ।। ७ ।।

थट पूरण कौस कई लग हाकड़,नीर अथाह बहै भरियो ।
मदमाय बहै मरियाद मिटाय'र ,कष्ट बढ़ा जन चैन हर्र्यौ ।।
करुणानिधि कष्ट मिटावण कारण, हैक चल़ू भर चाख लयो।
जय मावड़ आवड़ बीसभुजा बड, लाखिय   लोवड़वाल़  जयो।
जिय माड धिराणिय माय जयो   ।। ८   ।।

नद हाकड़ सीर समैत निठा, कर आनन पान अलोप करे ।
उगडै दल़ मौतिय मांय अमौलक,कोड़ सभी कर ठांम भरे ।।
कर क्रोड़धजां निज दास कई, दुख दारिद माड नशाय दयो ।
जय मावड़ आवड़ बीसभुजा बड, लाखिय लौवड़वाळ जयो।
जिय माड धिराणिय माय जयो ।। ९ ।।

धर माड सिधावत जाणं जदै मन म्लेच्छ महीपत क्रोध जगे ।
मग रोकण मात तणो सठ आतुर, फौज चढायर लार भगे ।।
कर कौप हुँकार भरन्त हि  आवड़, सैन समैत भसम्म कियो ।
जय मावड़ आवड़ बीसभुजा बड, लाखिय लौवड़वाळ जयो ।।
जिय माड धिराणिय माय जयो ।। १० ।।

कुल़ सैन समैत नशाय खळां ,अवनी अघ आप उथाप तभी ।
थिर राज सुथाप समा जदु भाटिय , सिंध धरा बगसाय सभी ।।
जस कीरत आप अमाप दशोदिश, छावत मौद उछाव छयो।
जय मावड़ आवड़ बीसभुजा बड, लाखिय लौवड़वाळ जयो ।
जिय माड धिराणिय माय जयो ।। ११ ।।

जन जाणं जदे जगमात ने आवत, होड़  हिये हद मोद भरे ।
पग मंण्डण मग्ग बिछायर मौतिय, स्वागत चौक पुराय करै ।।
सरसै सुख सातहि सात सरूप में,  लाभ        अमौलक  लौक लयो ।
जय मावड़ आवड़ बीसभुजा बड, लाखिय लौवड़वाळ जयो ।।
जिय माड धिराणिय माय जयो ।। १२ ।।

रण कंकण रात रुके मग जावत, पन्नग पीवण भ्रात डसे ।
जद जाणिय हाणिय प्राण सहोदर, लौवड़ ताणिय प्राचि दिसे ।
झट लौवड़ औट  लुकाय रवी रथ, ऊगत बैग रुकाय दयो ।
जय मावड़ आवड़ बीसभुजा बड, लाखिय लौवड़वाळ जयो ।।
जिय माड धिराणिय माय जयो ।। 13 ।।

पद दाब दिराय थिरा गति थामिय, सामिय लौवड़ तांण रवी ।
अनुजा निज खोडळ भेज पयाळ सु, पायस बेग मंगाय तभी ।।
झट भ्रात जिवाय पिलाय अमी, रवि षौड़स पौर रुकाय लयो ।
जय मावड़ आवड़ बीसभुजा बड, लाखिय लौवड़वाळ  जयो ।।
जिय माड धिराणिय माय जयो ।। 14  ।।

विनती सुणके घण राव तणू,किरपा उर आप अती विकसै ।
धन सम्पत आप समाप मया, मन भावन माड धरा बगसै ।।
बणके  कुळदैविय  सांग बिराजिय, भाटिय वंश सनात कयो ।
जय मावड़ आवड़ बीसभुजा बड, लाखिय लौवड़वाळ  जयो ।।
जिय माड धिराणिय माय जयो।। 15 ।।

लख माड  धरा मझ त्रास महा, झट मैटण आप   उपाय करे ।
निज पांण त्रिशूळ हि तांण दयानिधि, तैमड़ दाणवं प्रांण हरे ।।
गिरि कंदर अंदर दैय शिला, निज पाण सुं थाण  महाण थयो।
जय मावड़ आवड़ बीसभुजा बड, लाखिय लौवड़वाळ जयो।
जिय माड धिराणिय माय जयो ।। 16 ।।

कर धार त्रिशूळ महा सुख मूळ  सबै विध सेवक सायं  खड़ी ।
जुग आद अनाद सरूप नमो, सुरराय सुशौभित सिंह चढ़ी ।।
वरदा वरदाय सदा सुखदाय, निभाय मया निज दास लयो।
जय मावड़ आवड़ बीसभुजा बड, लाखिय लौवड़वाळ  जयो।
जिय माड धिराणिय माय जयो  ।। 17  ।।

विनती वरदाय करूं पड़ पाय, सुणों सुखदाय मया श्रवणां।
तन मानुष पाय गमाय वृथा, गुणगान न गाय सक्यो रसना।
भगती बगसाय सदा सुखदा, शरणै "जय 'बाल़" नें राज लयो।
जय मावड़ आवड़ बीसभुजा बड, लाखिय लौवड़वाळ  जयो ।
जिय माड धिराणिय माय जयो ।।18 ।।
जिय मामड़ियाळिय माय जयो ।
जय  श्री  जय  तैमड़राय  जयौ ।।     
             🌹दोहा🌹
प्रणत शरण निज पात नें, सरसावण सुख सात।
सात सरूपम सौहणी, जय आवड़ जग मात।।१
शौभित  दिव्य  सरूप  में,सातूं बहिनां साथ ।
भळकै आभा भांण सम, जय आवड़ जगमात।।
                      🌸छप्पय🌸
जय आवड़ जग मात,धजाबन्ध  माड धिराणी ।
जय आवड़ जग मात,कळा  पूरण कतियांणी ।।
जय आवड़ जगमात,सकळ कुळ भांणसुहांणी।
जय आवड़ जगमात, प्रगट तिहुलोक पुजाणी।।
तुंहि राय तखत मढ़ तैमड़ै, तुहिं आस पूरणी डावड़ां।
जुग पांण जौड़ शिशु "जय "जपै, जयति मात
जय आवड़ा ।।

जय आवड़ जग मात, बावन मेख बिडारै ।
जय आवड़ जग मात,नांम बावन निज धारै ।।
जय आवड़ जग मात,बावन धांम विराजै ।
जय आवड़ जग मात,वीर बावन संग साजै ।।
प्रिय धाम परम राजै प्रसन्न, तुंहि प्रणत हैत मढ तैमड़ा।
जुग पांण जौड़ शिशु "जय "जपै, जयति मात जय आवड़ा।।
                     
                    🌹दोहा🌹
हुं पायक पद कमल़ रो, प्रतिपाल़क तूं पात।
विरद अभय वरदायिनी, जय आवड़ जग मात।।१
भाव नशो हिरदे भरो, हरख धरो सिर हाथ ।
आस पुरण व्रद आपरो, जय आवड़ जगमात।।२
शरणागत निज दास नें, सबविध करत सनात।
है आदू बड़पण आपरो, जय आवड़ जगमात।।

    विनीत :- जय सिंह सिंढायच मण्डा      
                       (राजसमन्द )
                     7790934036

2 सितंबर 2019

स्तुति श्री करणी माँ की रचियता जयसिंह सिढ़ायच

       ★★ स्तुति श्री करणी माँ की ★★
                        ।। दोहा ।।
करणी घण करणी कृपा ,धरणी उर धणियाप ।
  माँ करणी  मोटा  धणी , माँ करणी मां बाप ।।
  चार धाम करणी चरण , सह तीरथ सिरमोड़ । 
  पद करणी चख परसता ,पातक कट करोड़ ।।
                     ।। छन्द :— नाराच ।।
    नमो अनन्द कन्द अम्ब , मात मैह नन्दिनी ।
    निकन्द फन्द दास द्वन्द, विश्व सर्व वन्दिनी ।।
    कृपा निधाण किन्नियांण , बीस पाण धारणी।
    नमौ धिराण दैशणोक, तीन लौक तारणी ।।
                           माँ,सर्व काज सारणी ।।१।।
    बिराजमाण थाण आप, धाम यू देशाण में ।
    दिपायमाण भाण जैम , भौर आसमाण मे ।।
    सुताज  मैह तू  सदैव ,   नैण  नैह  धारणी ।
    नमौ धिराण दैशणोक , तीन लोक तारणी ।।
                          मॉ , सर्व काज सारणी।।२।।
     नयन्न नैह न्हाळ मॉ , निहाळ बाळ न करे ।
     मिटाण शूल पात केत , शूळ हाथ में धरे ।।
     दया अपार   बार बार , दास हेत धारणी ।
     नमौ धिराण दैशणोक, तीन लौक तारणी ।।
                           मॉ, सर्व काज सारणी।।३।।
      महा समन्द मायने तूं , दास जौय डूबतां ।
      बधाय माय बांह बायं, दूध  गाय  दूवतां ।।
      करी सहाय छिन्न माय, नाव से निकारणी ।
      नमौ धिराण दैशणोक, तीन लौक तारणी ।।
                          मॉ, सर्व काज सारणी ।।४।।
      पसार पाण किन्नियांण , दास ने उबारतां ।
      समन्द नीर भींज चीर , नाव तीर सारतां ।।
      निचौर चीर सीर नीर , धाम भौम धारणी ।
      नमौ धिराण दैशणोक , तीन लोक तारणी।।
                          मॉ , सर्व काज सारणी।।५।।
      करी पुकार बार बार , राव  शैख  राज ने ।
      उबार मोय बैग आज , सार दास काज ने ।।
      दया अपार चित्त धार , शिघ्र ही सिधारणी।
      नमौ धिराण दैशणोक ,तीन लोक तारणी ।।
                         मॉ , सर्व काज सारणी ।।६।।
      कटाण कैद शैख हैत ,शैत  होय सॉवळी ।
      भरी उडाण आसमाण ,आपहो उतावळी ।।
      छुड़ाय लाय सिन्ध जाय,कैद मुक्त कारणी ।
      नमौ धिराण दैशणोक ,तीन लोक तारणी ।।
                          मॉ , सर्व काज सारणी।।७।।
      बहन्त मग्ग बीच पग्ग , चौथ घघ्घ टूटियो ।
      अलग्ग होय संग सग्ग , वन्न माय  छूटियो ।।
      न जोय के अधार कोय , तौय ने पुकारणी ।
      नमौ धिराण दैशणोक, तीन लौक तारणी ।।
                           मॉ, सर्व काज सारणी।।८।।
      सुणी अदैर  दास टैर , चित्त म्हैंर ,सौचगी ।
      करी न दैर,पाव प्हैर, छौड़ शैर   पौछगी ।।
      सरूप धार तूं सुथार , कष्ट  सर्व  टारणी ।
      नमौ धिराण दैशणोक ,तीन लौक तारणी ।।
                          मॉ ,सर्व काज सारणी ।।९।।
    बिकाण पे चढाण आण,की अचाण कामरो ।
     करी पुकार जैत कैत ,आप  शर्ण आ परो ।।
     दयाळ दास हैत तू , बडापणो  बिचारणी ।
      नमौ धिराण दैशणोक, तीन लोक तारणी ।।
                         मॉ, सर्व काज सारणी।।१०।।
     अखन्ड जोत , मंढ होत , बौत जैत बीनवै।
  बिकाण री धिराण आज,जाय लाज तो थवे ।।
      दया निधाण मंढ माण, पाण ने पसारणी ।
      नमौ धिराण दैशणोक, तीन लोक तारणी ।।
                        मॉ, सर्व काज सारणी ।।११।।
      कबाण पे चढ़ाण बाण,बाण आप बोलियां।
      नचीत जीत हौय तौय, हार हौय  कैवियां ।।
      हुँ साय हौय जंग तौय , संग में सिधारणी ।
      नमौ धिराण दैशणोक, तीन लौक तारणी ।।
                       मॉ , सर्व काज सारणी ।।१२।।
खपाण खोज म्लैच्छ फौज,चित्त चोज तू चढ़ी।
    भरी हुँकार खाय खार, शूल धार ने बढ़ी ।।
     हजार शीश हैक लार ,  वार तुर्क मारणी ।
     नमौ धिराण दैशणोक , तीन लौक तारणी ।।
                        मॉ, सर्व काज सारणी ।।९३।।
    कृपा अपार जैत हैत, केत  खैत  तू  करी ।
    खळा दळा दिया खपाय,कन्ध ब्राज कैसरी।।
    हराय तुर्क  कामरौ, तू जैत  नै जितारणी ।
    नमौ धिराण दैशणोक , तीन लौक तारणी।।
                        मॉ, सर्व काज सारणी ।।१४।।
    कृपा निधान तो समान, कौन  हे जहान मे ।
    मिटाण बंक अंक मूळ , पूर्ण आप पाण में ।।
    महा  समर्थ  बीसहथ्थ , दास  हैत  धारणी ।
    नमो धिराण दैशणोक , तीन लौक तारणी ।।
                         मॉ, सर्व काज सारणी।।१५।।
    सुणन्त  टैर  आ  अदैर, जौर  जंग  माय ने ।
    भरैज  नीर  भौप  घैर , माट  शीश लाय ने ।।
    दया निधान ऐम कौन , दास दुख्ख हारणी ।
    नमो धिराण दैशणोक , तीन लौक तारणी ।।
                       मॉ , सर्व काज सारणी ।।१६।।
     महा समर्थ , बीसहथ्थ, दास शीश धारिये।
     शिशू अबौध जाण मौद, नैह सू निहारिये ।।
     रखाय मोय शर्ण राज, लाज री रुखारणी ।
     नमो धिराण देशणोक , तीन लौक तारणी ।।
                        मॉ, सर्व काज सारणी ।।१७।।
     पसार पाण किन्नियांण, आण शर्ण तो गही ।
     सहाय माय तौ सिवाय,कौय नाय मो मही ।।
     सदा हि दास शर्ण जाण जन्म,‘जै‘ सुधारणी।
     नमो धिराण दैशणोक , तीन लौक तारणी ।।
                       मॉ , सर्व काज सारणी ।।१८।।
                         ★★ दोहा★★
    आस काँई उण री करू, हे जिण रे दो हाथ।
 मैं लीनी जिणरी शरण,(वो)बीसभुजाळी मात।
   मां  करणी  म्हॉरे  धणी, हूँ  करणी  रो  दास ।
धरणी पर करणी सिवा, करू न किणरी आस ।
   'क' कहता किरपा करे,'र' कहता रिछपाळ ।
   "नी" कहता निरभय करै, सारा संकट टाळ ।।

          विनीत:- जयसिंह सिढ़ायच
                       मण्डा(राजसमन्द)
   मौ,न, 7790934036,7014791881

14 फ़रवरी 2019

अनुरोध रचियता पबु गढवी 'पुष्प ' भुज -कच्छ

अनुरोध
------------

कश्मीर को बचाने,  सरकार, आप जागो,
आतंक को भगाने,  सरकार, आप जागो ।

आतंकियों के डर से जो हो चुके पलायन,
उनको वहीं बसाने, सरकार, आप  जागो ।

कश्मीर हो या कच्छ हो, भारतके दुश्मनोंका,
नामो निशां मिटाने, सरकार, आप  जागो ।

देखो, अभी न हो तो, फिर तो कभी न होगा,
छप्पनका सीना ताने, सरकार,आप  जागो ।

कश्मीर के लिए  जो  पहले  कभी  किये थे,
वादे सभी निभाने,  सरकार,  आप  जागो ।

जो भी किया भरोसा,  अब  टूटने  लगा है,
थोड़ा यकीं  दिलाने,  सरकार, आप जागो ।

ऐसे  नहीं  चलेगा,  कुछ तो  जनाब करना,
सरकार फिर बनाने, सरकार, आप जागो ।

फौजी  शहीद होते,  उनकी  शहादतों  पर,
दो बूंद ही बहाने, सरकार,   आप  जागो ।

आक्रोश   फैलता है,  जनता  पुकारती  है,
इस आग को बुझाने, सरकार, आप जागो ।

दे दो अभी इजाजत, इस देश के बलों को,
फिर हौसला बढ़ाने, सरकार, आप जागो ।

फिरसे अमन बनाकर, रंगीन  घाटियों  के,
इस मुल्क को सजाने,सरकार,आप जागो ।

मै 'पुष्प ' एक  शायर, अनुरोध कर रहा हुं,
शम्मा नई जलाने,  सरकार,  आप  जागो ।

                 --- पबु गढवी 'पुष्प '
                         भुज -कच्छ
               Mobile :9825857394

9 फ़रवरी 2019

छंद हरिगीत रचियता :- कविश्री आल

प्रातः स्मरणीय प.पु.आई श्री हांसबाई मां (मोटा रतडिया मांडवी कच्छ)नो 91 मो जन्म महोत्सव वसंत पंचमी ता.10-02-2019 ना रोज उजवाशे ऐ निमिते कविश्री आल नी ऐक रचना आपनी समक्ष मुकववानुं नानकडो प्रयास करेल छे.

छंद हरिगीत
रचियता :- कविश्री आल

संसारनो करी त्याग शकित, संबंध राख्यो शिवथी
सत्य अहिंसा धर्म साचो, जाळव्यो तें जीवथी
भगवती भोळी भेळियाळी, जपत कायम जापने
कर जोड वंदन करूं करनी, आई हांसल आपने...1
त्याग ने वैरागथी तें, रागने रगदोळियो
जग जाळ त्रोडी कठिन जगदंब, भजयो हरदम भोळियो,
कोळियो नहि लियो कै साल, अन्न खावा आपने
कर जोड वंदन करूं करनी, आई हांसल आपने...2
उच्च विचारो अति उत्तम, वदे चारो वेदथी
साव जीवन संत जेवुं, भूरी दूरी भेदथी
सुरसरी जेवुं शुद्ध अंतर, पुंज बाळे पापने
कर जोड वंदन करूं करनी, आई हांसल आपने...3
तुं अमाणी संपत्ति छो, सुख अमाणो तुं सदा
आसरो नहीं कोई अवरो प्रेम ऐक ज तव पदा
आधि व्याधि ने उपाधि, त्रणे टाळो तापने
कर जोड वंदन करूं करनी, आई हांसल आपने...4
अशरण जनने शरण आपी दुःख-दरद थी तारिया
पतित सघळा कर्या पावन, अधमने ओधारिया
अरजी सुणी कवि "आल" नी तुं, कष्ट सघळा काप ने
कर जोड वंदन करूं करनी, आई हांसल आपने...5
रचियता :- कविश्री आल


7 फ़रवरी 2019

अनुभा गढवी नी रचना

प्रातः स्मरणीय प.पु.आई श्री हांसबाई मां (मोटा रतडिया मांडवी कच्छ)नो 91 मो जन्म महोत्सव वसंत पंचमी ता.10-02-2019 ना रोज उजवाशे ऐ निमिते अनुदान गढवी नी ऐक रचना आपनी समक्ष मुकववानुं नानकडो प्रयास करेल छे.
.               छप्पय
गोत्र नराने गात तात नाराण तपेश्वर
धरा रतडिया धाम गाम अविनाशी अवनि पर
गर्व दुष्ट जन गंज भंज मम भीड भवानी
बरनुं कीर्ति बरदान कान सुणी अमर कहानी
सामर्थ्य दे शकित दे सुख सदन विध्नरु कष्ट बिदारनी
'अनुदान' आखत इमी, चंडी हंसमा चारणी
.             कवित
क्रूर कलिकाल हु में लाल को बेहाल देखी
आय रखवाल माय सुतपान है
हांसल की दया हूं को मंडाणो अपार मेह
गूंजे जयकार हुं से धरा आसमान है
नाराण दुलारी धन्य तारण तरण तुंने
चारण की जग में बढ़ाई कुलकान है
'अनुभा' भनंत तोहे आदि अवतारी कही
दुनिया युं सारी तेरो गावे गुणगान है

रचियता :- अनुभा  गढवी 

टाईप बाय :- www.charanisahity.in

संदर्भ :- आई श्री हांसबाई मां गुणगाथा पुस्तक मांथी

आवती काले माणेकभाई थार्या गढवीनी रचना  आपनी समक्ष मुकवानो नानकडो प्रयास करीश.

      वंदे सोनल मातरम् 


5 फ़रवरी 2019

शिव स्तुति रचियता :- प.पु.आईश्री हांसबाई मां

प्रातः स्मरणीय प.पु.आई श्री हांसबाई मां (मोटा रतडिया मांडवी कच्छ)नो 91 मो जन्म महोत्सव वसंत पंचमी ता.10-02-2019 ना रोज छे ऐ निमिते तेमनी ज रचेल ऐक रचना आपनी समक्ष मुकववानुं नानकडो प्रयास करेल छे.
               शिव स्तुति
           --------------------
रटो शिवनाम
जपो ओमकार
तमे हो जंगल के वासी ....
आजु ऐ बाजु ऐ झाडी बिराजे
वचमां भूतनाथनुं धाम....
डाबी बाजु उमियाजी बिराजे
खोळे बेठा गणनाथ....
तमारे चरणे गंगाजी वहे
जेनां निर्मळ नीर ...
मध दरियामां बेडी अमारी
तारी करो भवपार....
दो कर जोडी "हांसबाई" गावे
तम चरणे शिश नमावे....

रचियता :- प.पु.आईश्री हांसबाई मां

टाईप बाय :- www.charanisahity.in

संदर्भ :- आई श्री हांसबाई मां गुणगाथा पुस्तक मांथी

वसंत पंचमी सुधी रोज हांसबाई मांनी विविध कविओ रचेल रचनाओ आपनी  समक्ष मुकवानुं नानकडो प्रयास करीश.

आवतीकाले चारण महात्मा पालु भगत ववार कच्छ हाले काळीपाट राजकोटनी रचना

माडी तने वंदन हांसबाई मात....

      वंदे सोनल मातरम् 

18 जनवरी 2019

जुद्धे मोगल जोगणी रचना: दौलतदान अलराजजी बाटी

.             *जुद्धे मोगल जोगणी*
.     *रचना: दौलतदान अलराजजी बाटी*
.          *प्रेषक: जोगीदान चडीया*

*उभ्भय चवहठ अठहरां,हथविस सोळ हजार*
*असस्त्र मौगल दल अहट,करत जुद्ध जयकार*

.                   *छंद पद्धरी*

सथ अंब मही संगर सरोष, रत बीज कालीका लरत रोष
धन थट्ट भट्ट आसूर धनेक, हथ बीसौं चंडी हाकल हनेक

बंधूक नाल तौपां बहार, पड पडत पाल वह सह प्रहार
हीय हहरी काद भागत नीहार,बली बेठ यज्ञ सुर पुर बिहार

मद मस्त सहत मृदगांनी मार, टूक टूक वपुन्न हिय प्रदनी हार
मुद लहत लंक त्रुट्टत मकोड, प्रोवत वपुक प्रंडी पकोड

पेखंत थरर कायर पलाय, रण रंग बीर पा टीक रहाय
धण करत वेढ भट थटनी घेर, फट कटत शिस नहीं पडत फेर

हिय हार दुगल दिव्यांण हेर, टिक पाय टाय भट्ट करत टेर
घडी दो घडी को यह है घीयाण, प्रय उद्व गती लीहरो पीयांण

मथ गिरत धरण नहीं होत मोत, हथ गिरत जुरत संधान होत
आसूर अनेक माया उपाय, जानत जगंब नहीं जान्ही जाय

तप कीयल तेज ताको प्रताप, मिली अंत धुरा आपही आप
अधरांग कैक बहरत उभार, कटी आड वाड दरसत कटार

उपवीत्त वाढ करी परत अंग, ढही मुंड काल काटत कुढंग
उट्ठत कबंध फिर लरत आप, परि मुंड भौम बोलत प्रलाप

मिली मगत भैज भूतड भ्रखंत, दधी फुट्ट माट्ट मुंन्डी दिखंत
उच्चार करत शबदां अदोह, श्रृंगाल श्याल कूकत कदोह

बहुं रोत प्रेत बोलत कुवाक, डंनकीनी नाच डह डहक डाक
बाजत निफेरी भैरी बिहाव, हुकळंत भूत कुत हाव भाव

फुट्टत पखाल ईव छरद फेल, झुक पियत डाकीनी उकल झेल
खलबल मतंग ढही खाल खस्त, हसी आत चलत लैखनी हस्त

दौलत भनंत औखन अधात, जद मच्यौ जुद्ध मौगलां मात
बज तुर त्रंब भट्ट सूर बाढ, गल गदीत मलछ कां छुटत गाढ

🙏🏻🔱🙏🏻🔱🙏🏻🔱🙏🏻🔱🙏🏻

8 दिसंबर 2018

चारण कवि श्री गीगाभाई जेठाभाई कुंचाळा ( आंगणका) रचित रचनाओ


चारण कवि श्री गीगाभाई जेठाभाई कुंचाळा ( आंगणका) रचित रचनाओ (पीडीऐफ) फाईल


ई-बुक (PDF) डाउनलोड 

(1) रचनाओ Part-1 :- Click Here

(2) रचनाओ Part-2 :- Click Here

आ पुस्तक नी PDF फाईल चारणी साहित्य ब्लॉग पर मुकवा माटे मोकलवा बदल श्री गीरीशभाई कुंचाला अने धनजयभाई कुंचाला नुं खूब खूब आभार


         

अवनवी माहिती, चारणी साहित्य , रचनाओ, ऑडियो , पुस्तक, तेमज अपना विस्तारना धार्मिक प्रसंग, समाचार  मोकली सहकार आपवा विनंती 

Email - vejandh@gmail.com

WhatsApp No - 9913051642



अवनवा समाचार, माहिती, जोब समाचार अने साथे चारणी साहित्य (जेमां काव्य,छंद, ऑडियो, बुक वगेरे....) स्वरूपे बधा सुधी पहोचे ते माटे Broadcast लीस्ट बनाववामां आवेल छे

जो तमने पण Broadcast लीस्ट मां जोडाववो मांगता होय तो आ नंबर 9913051642 सेव करी आपनुं पुरू नाम अने सरनामुं लखी मेसेज करो ऐटले टुंक समय मां ज आपने अपडेट ना मेसेज मळता थई जाशे.

आ Broadcast नो हेतु ऐटलो ज छे  वधारे चारणो सुधी माहिती पहोंचे अने उपयोगी थाय ऐ माटे आपना सहकार नी अपेक्षा छे.

खास नोंध :- आपना नंबर कोई ग्रुपमां ऐड करवामां नही आवे परंतु पर्सनल आपने मेसेज आवशे जेनी नोंध लेवा विनंती

                         सहकार बदल आपनो आभार
                               

                               वंदे सोनल मातरम

31 जुलाई 2018

आइ सोनल जा मढडे में मुकाम

 *आइ सोनल जा मढडे में मुकाम=कच्छी चरज* 
मुजी माताजी जा मढडे में मुकाम...२
कण्येरी में अइं रे आयल आंजा ओरडा...मोरी मात
आइ सोनल जा उगमणा दरबार...२
जोड रे कमाडें आयल तोजा ओरडा...मोरी मात
आइ सोनल जा..
मुजी आइ सोनल के भेरीये जो भाव...२
(आंव) भेरीयो रे मंगायां मोंगे मुल जो...मोरी मात
आइ सोनल जा...
मुजी आइ सोनल के कांबीयु से बव प्यार...२
(आव) कांबीयुं घडांयां मोघे मुल ज्युं...मोरी मात
आइ सोनल जा...
 *रचना कोनी छे ए खबर नथी श्री वीजयभाइ गढवी ना ओडीयो मांथी टाइप करेल छे जो कोइ पासे आखी रचना होय तो नीचे आपेला नंबर पर मोकलवा विनंती* 

ओडीयो :- Click Here

 *टाइपिंग=राम बी गढवी* 
*नविनाळ=कच्छ*
*फोन=7383523606*
 *भुलचुक सुधारीने वांचवी* 
 *वंदे सोनल मातरमं* 

3 मार्च 2018

चारणी जोगमाया मढडावाळा आइ सोनबाइ रचित चरज "विंझणो"

🙏🙏 *जय मां सोनल* 🙏🙏

🌹 *चारणी जोगमाया मढडावाळा आइ सोनबाइ रचित चरज "विंझणो"* 🌹

माडी ते तो शेनो रे गुंथ्यो छे,अावो रुडो विंझणो...
माडी ते तो केवो रे गुंथ्यो रे,अनुपम विंझणो

माडी तें तो केवो रे गुंथ्यो रे अनुपम विंझणो (२)
माडी तारे विंझणले घुमे छे ब्रह्माड चौद रे
जगदंबा तारो विंझणो....

माडी तारे विंझणले,त्रणे गुण जोने रमी रीया (२)
माडी एमां भरत चीतर छे, बहू रंग रे,
जगदंबा तारो विंझणो....

माडी तारा विंझणले,जड चेतन कापड झळहळे (२)
माडी एनी जातु ने भातु छे,अपरंपार रे
जोगमाया तारो विंझणो....

माडी तारे विंझणले,ब्रह्मांदिक जोने भमी रीया (२)
माडी एतो करे छे सृष्टि ना रुडा काज रे,
जोगमाया तारो विंझणो....

माडी तारे विंझणले,चांदो ने सूरज टांकीया (२)
माडी एमां झळके छे नक्षत्र मोतीडा नी माळा रे,
जगदंबा तारो विंझणो.....

माडी तारे विंझणले,गगन सागर गाजता (२)
माडी तारे विंझणले मेघराजा मुशळधार रे,
जोगमाया तारो विंझणो....

माडी तारो विंझणलो,अमी नी फोरम फोरतो (२)
माडी तारा विंझणले अनोंधा रस ने रुप रे,
जोगमाया तारो विंझणो....

माडी तुम तो अखंड घुमावे माया विंझणो (२)
माडी तारा रुप ना दर्शन केम नथी थाता रेे,
जोगमाया तारो विंझणो....

माडी तमे अमृत छोडीने विष आरोगता (२)
माडी अमे भुली रे बेठा शान ने भान रे,
जोगमाया तारो विंझणो....

माडी तारा विंझणले,वशीकरण ने कामण भर्या (२)
माडी तने विसरी बेठा,अमे मुढ बाळरे,
जोगमाया तारो विंझणो....

माडी अमने खोळले,बेसाडी दया दाखवो (२)
माडी अमने पिवरावो,अमीरस ना पान रे,
जोगमाया तारो विंझणो....

माडी तारो विंझणलो,पारखे ने तुजने ओळखे (२)
माडी एनी आवण,जावण नी रीत मटी जाय रे,
जोगमाया तारो विंझणो....

माडी तारी बाळक,"सोनले" गायो विंझणो (२)
माडी अमणा अळगा, करोने उर अंधकार रे,
जोगमाया तारो विंझणो....

माडी ते तो शेनो रे गुंथ्यो रे,आवो रुडो विंझणो
माडी ते तो केवो रे गुंथ्यो रे अनुपम विंझणो
जगदंबा तारो विंझणो.....

👏🌹 *रचना=परम पुज्य आइ सोनल मां  (मढडा)* 👏🌹

🌻 *टाइपिंग=राम बी गढवी* 🌻
*नविनाळ-कच्छ*
*फोन=7383523606*

🙏👏 *आइ सोनल ना चरणे वंदन* 🙏👏

💐 *वंदे सोनल मातरमं* 💐

Sponsored Ads

ADVT

ADVT