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"जय माताजी मारा आ ब्लॉगमां आपणु स्वागत छे मुलाक़ात बदल आपनो आभार "
आ ब्लोगमां चारणी साहित्यने लगती माहिती मळी रहे ते माटे नानकडो प्रयास करेल छे.

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30 नवंबर 2019

कहो वीर चारणो केवा रचना जोगीदान चडीया

.       *कहो भड़ चारणो केवा*
.      *रचना: जोगीदान चडीया*
.     *ढाळ: सुना समदर नी पाळे*

.                 *दोहो*
*कलमु किरपांणुं ग्रही, पकड्यो चारण पंथ*
*जोधो अणनम जोगडा, कंकणवाळी नो कंथ*

.                  *गीत*
कहो भड़ चारणो केवा रे ,जोधा जमरांण ना जेवा...
भुले नइ आ भोमका जेने ई भड़ युगो युग याद रे एवा रे...
लळी लळी वारणां लेवा....टेक

पड्यां होय माथडां भोंये रे, तरवारुं ई झीकता तोंये...
झारा ना ई जुद्ध मां होम्यां हाड कहो ई विर ते केवा रे...
लळी लळी वारणां लेवा....01

केवो ओल्यो खीलजी कामी रे, हमीर नो कोय नई हामी
बारुजी उपड्यो चारण देव रांणा ने राज ई देवा रे
कहो वीर चारणो केवा रे,..02

फरता दुशमन र्या फाटी, मुछ्ये भड़ ताव दे माटी
उभो आंबरडी टींबे ई, काळ विहळ नी वातडी केवा रे...
लळी लळी वारणां लेवा....03

नोता एना राज झोंटांणा रे, नोता कोय वेर वेंटांणा...
अंगरेजो थी आटक्या तोये ई केहरी ने परतापसिं केवा रे...
लळी एनां वारणा लेवा...04

नतो भड़ डाढ समाया रे,जोधा जगदंब ना जाया, 
निती ध्रम कारणे जोगी दान होमाया ना होय जो हेवा रे...लळी एना वारणां लेवा...05

🙏🏻🖋🔱⚔📿⚔🔱🖋🙏🏻

(दोहा मां मात्रा वधे छे पण उलट थी आव्यो छे एटले फेर बदल नथी करतो..

गीत ना प्रथम अंतरा मां झारा ना युद्ध मां सहिद थयेल चारणो ने श्रद्धा सुमन छे..

बीजा अंतरा मां ज्यारे रांणो हमिर निराश थई मृत्यु ना खोळे पोढवा जाय छे त्यारे वच्चे वरवडी मांये तेमनो कोढ मटाडी बारुजी ने पांचसो घोडे तेमनी सहायता करवा मोकलेल जे समये तेममे पोतानो पडछांयो साथ नोहतो देतो ते समये चारण व्हारे चड्यो,ऐ चारणे जतन करेल वंश वेली मां पछी भारत ने रांणा प्रताप मळ्या 

त्रिजा अंतरा मां आंबरडी विहळ राबो अने मित्रो के जेमणे मस्तक न नमाव्या अने कुंडाळे मरण नी प्रतिज्ञा निभावी ई विहळ, धानरव, साजण, नागाजण, रविया, लखमण, तेजरव, खीमरव, आलग, पाल, वेरसल चारणो अने केशवगर ने वंदना

चोथा अंतरा मा जेना कोय राज नोता पडावी लेवाया के नोता बाप दादा ना वेर छतां मां भारती पर गुलामी नी बेडीयुं जोई जे परिवार स्वतंत्रता नी लडत मां सहीदी वोरवा तैयार थयेल ते केसरिसिंहजी अने कुंवर प्रतापसिंहजी ने याद करी वंदन 

छेल्ला अंतरा मां ए तमाम चारणो ने वंदन के जे सत्य अने निति धर्म ने मार्गे होमावा तत्पर छे,जे कोय नी डाढ मां नथी समाया अने जे सभान छे के अमे जगदंबा ना दिकरा छीये ए तमाम ने वंदन...)
🙏🏻🖋🔱⚔📿⚔🔱🖋🙏🏻

2 नवंबर 2019

कळजग ना कामा रचना: जोगीदान चडीया

.          कळजग ना कामा
.       रचना: जोगीदान चडीया

माडी थावा मलकमां, कैक करी रइ कोड
जामी ऐनी जोगडा, हवे, हद रे बारी होड

.               गीत

कळजुग तेंतो केवा आ मांड्या कांमा..
माताजी थावा बायुं मरे रेलोल... 
धुंणी ने पाछी करे छे नकरा ढोंग
जोई ने मारो जीव बरे रेलोल...टेक

माताजी कदी फरे नई वादण वेहे
सापोलीयां ने हाथे धरी रेलोल...
माताजी कदी जोवे ना दख ना दांणा 
बाधायुं न दे बाधा हरे रेलोल...

माताजी ने तो वाछीदां ने कुंढीयुं वाली
फेसन मां न फाटी पडे रेलोल...
माताजी कदी मेकप न चोपडे मोढे
अत्तर नव अंगे धरे रेलोल...

माताजी करे वेद पुरांणो नी वातुं
ने चडीया मारग चिंधे रेलोल..
माताजी एवुं जीभ के जोगीदान..
त्यां सोनबाई सामे फरे रेलोल...

रचना: जोगीदान चडीया. 9898360102
🙏🏻🔱🙏🏻🔱🙏🏻🔱🙏🏻🔱🙏🏻

26 अक्टूबर 2019

रुपचौदश नी हार्दीक शुभः कामनाओ

*कमलासनी दुय कालिका,प्रेमे हो परशन्न*
*जुवो अमावस जोगडा, दिपावली दरशन्न*

बेय कमलासनी एटले के सरस्वती पण कमल पर आसन करनार,अने लक्ष्मी पण कमल पर आसन करनार..अने त्रीजी कालीका..एटले के...
*वाक (वांणी) बारस* ...महा सरस्वती नी उपासना नो दीवस (जेने खबर नथी ए वाघ बारस कहे छे)
*धन (लक्ष्मी) तेरस* महालक्ष्मी नी उपासना नो दिवस
*काली(कालीका) चौदश* महाकालीका नी उपासनानो दिवस...कालीका मां छे..अने बाळक ने तो मां काळी होय तोय रुडी लागे तेथी रुप चौदश पण कहीये
एम त्रण दीवसो...वाक बारस सरस्वती,धनतेरश,लक्ष्मी,अने चौदश मां कालीका...त्रणेय महादेवी नी उपासना करो पछी जिवन मां जे आवे तेने दिवाळी केहवाय...ई अमावस्या नो अंधकार होय तोय दिवडा जळहळी ने प्रकाश नो तेहवार थई जाय

*रुपचौदश नी हार्दीक शुभः कामनाओ*
🙏🏻🔱🙏🏻🔱🙏🏻🔱🙏🏻🔱🙏🏻

5 सितंबर 2019

शिक्षक रचना:जोगीदान चडीया

*शिक्षकदिन नी शुभः कामना सह...मारुं आजनुं आ काव्यपुष्प...आप ने चरणे*

.           *शिक्षक*
.  *रचना:जोगीदान चडीया*

साव निखालस सरळ स्वभावी
विनयी जिवन वितावे शिक्षक
अहम वगर नुं कर्म आचरी
वर्ग खंड विकसावे शिक्षक..01

भूल करे कोई भुलकाओ तो
ताडुकी ततडावे शिक्षक
वळी पीठ पंपाळी पाछो
स्नेह भर्युं सहलावे शिक्षक..02

करवा खोटुं काज धसोतो
आडो रई अटकावे शिक्षक
मानो नई तो मजबुर थै ने
सोटडीयुं सटकावे शिक्षक..03

विना स्वारथे व्याकुळ थातो
सखत बनी सणकावे शिक्षक
भलुं वाचतो सौ नुं भोळो
सुंदर पाठ भणावे शिक्षक..04

वेर नही पण फकत वेदना
खुब बळ्ये खखडावे शिक्षक
जोगीदान भला जिवतर मां
याद घणुं ऐे आवे सिक्षक..05

अघरा मां अघरा ने एवुं
सरळ करी समजावे शिक्षक
घुंट ज्ञान नो भरी घटो घट
ज्योती पुरण जगावे शिक्षक..06

टोकी टक टक शबद टांचणे
सुंदर घाट सजावे शिक्षक
पोते थई बस पथ नो पत्थर
वाट्युं आभ वतावे शिक्षक..07

मात समी ममता मेहकावा
वालप बउ वरसावे शिक्षक
पंड्य तणुं ई करी पगथीयुं
चडीया टोच चडावे शिक्षक..08

*रचना: जोगीदान चडीया.9898360102*

शिक्षकदिन निमित्ते मारा तमाम शिक्षक गुरु ने कोटी कोटी वंदन .🙏..हुं आप सउ ने खुब याद करुं छुं...मारा पर आप नो अनन्य स्नेह रह्यो छे..जगदंबा सदैव ए स्नेह ने पात्र मने बनावी राखे एवि परमेश्वरी ने प्रार्थना....

🙏🏻✍🏻🙏🏻✍🏻🙏🏻✍🏻🙏🏻✍🏻🙏🏻

4 मई 2019

बहुचर बिरदाळी - जोगीदानभाई गढवी

*अखात्रिज नी आई श्री बहुचरा नी याद*
.           *बहुचर बिरदाळी*

प्रसंग बहु विशाळ छे पण टुंकमां कहुं तो..

हाल ना पाकिस्तान सिंध ना उमरकोट पासे नुं खारोडा गाम एटले बापल देथा नुं गाम..के ज्यां बापल देथा ना माताश्रीये गळे कटार नाखी त्रागुं कर्युं..ई वातनी हिंगळाज ना परम उपासक बापल देथा ने जांण थई त्यां दुनिया पर नो तमाम मोह एने हैये थी साप नी कांचळी उतरे एम उतरी ग्यो..जोके चारणो नो एक जातीगत स्वभाव छे के ते जन्मजात संन्यस्त भाव मां होय छे..अडधो बावो अडधो संसारी..माटेतो कोई चारण पुर्णतह संसार मां सफळ रह्योज नथी..कारण के तेनुं सर्जनज संन्यास माटे छे..

बापल देथा हिंगळाज ना चरणे पोतानो आत्मा धरवा निकळीपड्या...आमतो पोते पेहला पण घणींवार हिंगळाज परसी आवेल..जेम ईस्लाम ने जिवनमां एकवार हज करवी जरुरी छे तेम चारणे जिवन दरम्यान एकवार हिंगळाज परसवा जरुरी..हिंगळाज परसी ने आवेल चारण कोई ना चरणो मां मस्तक नथी नमावी सकतो..अने तेने अग्निदाह पण नथी देवातो साधु नी जेम तेनी समाधी करवामां आवे छे..

बापल देथा हिंगळाज ने चरणे देह छोडे ई पेहला हिंगळाज ना फळांये तमने देहत्याग न करवा अने मांडवा (पोकरण, उजळा गामनी बाजु मां)गामे पोताना अंशावतार आई देवल (भलाजी भांसळीया नी दिकरी)साथे लग्न करवा आदेश कर्यो..
भलाजी ने हिंगळाजे स्वप्न मां आवि विदित कर्या..बापल देथा ना आई देवल साथे लग्न थयां..बापल देथा अश्व वेपार अरथे सोरठ आवता..तळाजा ना वाळा राज परिवार साथे नी सरदयता वधी.. सोरठ मां बापल देथा ये नाम पर बापलका वसायुं जेनो कारभार दिकरो खीमाभाई संभाळता..अने ब्रह्मचारिणी व्रत धारणी *आई बहुचराजी..बुटभवानी अने बलाड* .. वगेरे पोताना वृद्ध माता देवल आई नी सेवा करतां..141 वर्ष नी उमरे देवल आईये देह छोड्यो..ते वखते आई बहुचराजी नी उमर 100 वर्ष लगभग नी हती..आईयुं हवे देव दर्शन करता करता भाई पासे बापलका तरफ निकळ्या..वरांणा खोडीयार दर्शन करी मोढेरा सुरज नारायण नी वंदना करी संखलपुर ना पादर आसपास पोहच्या त्यां मेपो बारैया अने बिजा चोर लुटारु ..शिकार खेलवा अने चोरी लुट माटे त्यां भटकता हता तेमनो भेटो थई ग्यो..
आईयुंये समजाव्या पण मान्या नई..माटे चारणी  मर्यादा अने परंपरा प्रमांणे मोटां बेन आई बहुचराजीये कटार पेहरी ..त्रागु कर्युं ..अने तमाम चोर लुटारु ने सात अवतार पुरुसत्वहिन थवा नो श्राप दिधो..त्यांतो ऐ लोको नुं जोम अने कौवत हराई ग्युं..भुल नो पसतावो भारी थयो..माताजी ने घणुं करगर्या..मा मा कही आंसुडा सार्या..आखरे मा छे ने...आईये तेमने श्राप निवारण माटे कह्युं के आवती काले अखात्रिज ना रोज मारो देह पडशे..अहीं मारा देह पड्या ने थानके तमे स्त्री ना कपडां पेहरी साचा रदय थी पश्चाताप करजो अने जिवन मां क्यारेय महापाप नही करवा प्रतिज्ञा करजो..तो काळ क्रमे श्रापमुक्त थशो..
माताजी ने बाजुना गाम संखलपुर लई जवाया आखो दिवस ने रात माताजी नी सेवा करी बिजे दिवसे अखात्रिज ना रोज माताजी ये नारायण ने नमन कर्यां अने देह छोड्यो..हाल नुं बहुचराजी के ज्यां ते पंच महाभुत मां विलिन थयां..
देथा साख ना चारणो आजे पण बहुचराजी ना गया ना शोक मां अखात्रिज नथी उजवता...
बापलका तेमना नवा मकान ने मोतीया ना भमरडा मुकाववानुं काम बाकी हतुं ने आ समाचार मळ्या..अने ते बाकी रह्युं...त्यारथी देथा चारणो पोताना मकान ना मोतीया ने भमरडा नथी मुकावता....अने देथा साख मां पुत्र ना लग्न थाय त्यारे..देथा कुळ नी दिकरी बहुचराजी ने लग्न प्रसंगे पुत्र नो मोड तथा पुत्रवधु नी चुंदडी बेचराजी ने त्यां आजे पण मोकलाय छे..

*चडीया देश चुंवाळ मां, एनींय फरके आंण*
*जेनुंय वाहन जोगडा,आ, वातुं मधरां वांण*

*सोलंकी सरदार नी, चावी मात चुंवाळ*
*जय बहुचर जोगडा, बापल देथा बाळ*

*बापल हंदी बेटडी,चारण कुळ मे चाई*
*जेह चुंवाळे जोगडा, आवेल बहुचर आई*

*घर चुंवाळा नी घणी, बहुचर लागी बाई*
*जगदंब हालि जोगडा, अखाय त्रिजे आई*

*बुट बलाळ ने बेचरा,संगे बेनड सात*
*मोटी सौथी मात, जोई चुंवाळे जोगडा*

*भांणज ई भलीयातणी, कानड दरशन कीध*
*लाव अनेरो लीध, जग चुंवाळे जोगडा*

*अखात्री उजवे नही, दोयल देथा दन्न*
*जे दिन बेचर जोगडा, गईती सात गगन्न*

*बेचर मात बोलावीये, भगतां तार भुपाळ*
*जादव आव्यो जोगडा, चारण काज चुंवाळ*
🙏🏻🔱🙏🏻🔱🙏🏻🔱🙏🏻🔱🙏🏻

8 मार्च 2019

नमियें तुंने हींद नी नारी रचना: जोगीदान चडीया

*नारी दिवस ना सौ नारी रत्नो ने वंदन*

.            *|| नमियें तुंने हींद नी नारी ||*
.            *रचना: जोगीदान चडीया*
.          *ढाळ: ठाकर अमुं मेल्य मां ठेली*

दरिया भर हेत दुलारी, खिजवे त्यारे काळ थी खारी
हिंम्मत ना कोय दी हारी, नमियें तुंने हिंद नी नारी..टेक

आवीयो मोल उमेदसिं तेदी, हाडी दीधेलाय हाथ
धर्म त्रीया नो धारीयो साचो, माळ पेरावेल माथ
विरो नी लाज वधारी..नमियें तुंने हिंद नी नारी...01

जणीयो जोधो जिवतीं बाई, परख्यो रांण प्रताप
रंग राख्यो ऐंणे राजपुताई, जपता क्षत्रीय जाप
सोनगरी मात सन्नारी, नमियें तुंने हिंद नी नारी...02

जणींयो बाळक बाई जीजांये, सिंह साचो सिवराज
देस आखे तारा दुध ना डंका,  यवन संभारे आज
भडवीर थ्यो तर्क पे भारी, नमियें तुंने हिंद नी नारी...03

आंण वरती अंगरेज नी तेदी, पाडीयो तें पड़कार
गगन आखुं गुंजावतो थ्योतो ,लक्षमी नो ललकार
आझादीय नाम उचारी, नमियें तुंने हिंद नी नारी...04

कैक जनेता नी कुंख ना जाया, सहिद थीयां संतान
विध्या वती ना लाल ने वंदीं, ज्वारीयें जोगीय दान
आखे आखो देश आभारी, नमियें तुंने हिंद नी नारी...05

🙏🏻🔱🙏🏻🔱🙏🏻🔱🙏🏻🔱🙏🏻

7 मार्च 2019

हस्ता रेहवुं रचना: जोगीदान चडीया

.                 *हस्ता रेहवुं*
.         *रचना: जोगीदान चडीया*

हस्ता रेहवुं हस्ता रेहवुं, वळी रदय मां वस्ता रेहवु.
भाव भरो पण भाव भरेलो, साव न पाछुं सस्ता रेहवुं. 01

जरुरयात नी जमीयुं माथे, वादळ जेम वरस्ता रेहवु.
कोय कडाको कर्या वगर बस, आपी दई ने अस्ता रेहवुं. 02

दरद बिजा ने नव देखाडी, काळज मांज कणस्ता रेहवुं.
व्हालप सौ ने वेंहच्ये राखी, दिल खुश भाव दरस्ता रेहवुं. 03

मरम भरेली महर करीने, डापण थी नव डस्ता रेहवुं.
हशे कही ने अती हेतथी, पांपण नेह परस्ता रेहवुं. 04

चडीया साची राह न चुकी, धरम दीवाले धस्ता रेहवुं.
खोट्य पडे कोई खांडणीये तो, दरद खांडवा दस्ता रेहवुं. 05

हळीये मळीये हेत प्रसरीये, एकल कांव अमस्ता रेहवुं.
अमरत दरीयो आप्यो हरीये, तो सीद साव तरस्ता रेहवुं. 06

दुस्मन पण मांडे जो दलनी, भलुं बुरुं ना भस्ता रेहवुं.
माफ करी थई मोटा दलना, प्रेमे हुंफ पिरस्ता रेहवुं. 07

चिंधी मारग सतनो चडीया, राह भुल्या ना रस्ता रेहवुं.
जगमां जोगीदान फकत बस, खोटा जणथी खस्ता रेहवुं. 08

उजळो करवा नीज आतमने, घणा सजग रई घस्ता रेहवुं.
काट न लागे ए कारण थी, कर्म सरांणे कस्ता रेहवुं. 09

कोंण कहे छे वगर विचार्ये, फंदा मां जई फस्ता रेहवुं.
त्रिकम ने मळवा कज तोडी,  गोमतीये पग गस्ता रेहवु. 10

*रचना: जोगीदान चडीया. मो.नं. 9898360102*
🙏🏻🔱🙏🏻🔱🙏🏻🔱🙏🏻🔱🙏🏻

13 फ़रवरी 2019

खोडल खपराळी रचना: जोगीदान चडीया

*महा अष्टमी ने दिवसे जगदंबा खोडीयार ना चरणो मां वंदन*

.             *||खोडल खपराळी ||*
.              *छंद: भुजंग प्रयात*
.          *रचना: जोगीदान चडीया*

प्रगट्टी धरा सिंध मे मां प्रचंडी, चली चाळका नेहडे मात चंडी
प्रसन्नी रहौ मां सदा ये प्रचाळी, खमा खोडली खेल्य तुं खप्पराळी..||01||

थडो मात हिंगोळ ने पर्स थापे, अमी कुंभ तुं आवडाई ने आपे
दुधड नेश व्रांणां द्रसाणा दियाळी, खमा खोडली खेल्य तुं खप्पराळी..||02||

जिभां जोगीदाना जपां लाख जापो, अमूं बाळ तोळां अहो दर्स आपो
भवां भोळ ग्वाळे भजी जेम भाळी, खमां खोडली खेल्य तुं खप्पराळी..||03||

तुंही व्योम खांडा तणा खेल खेले, मदे अंध ने मात भाळ्या न मेले
बणें चंडीका रुप चारण चूडाळी, खमा खोडली खेल्य तुं खप्पराळी..||04||

जगत जोगणीं भ्रात ने ज्युं जगारो, अमां कळजगां वक्ख से मा उगारो
विधाता बणीं ल्यो विकारोय वाळी, खमा खोडली खेल्य तुं खप्पराळी..||05||

धरा पाप से मा हुती जांण धगती, शिला दित्य ए सातमो राय सगती
रमां रोही शाळा हु तो पाप पाळी, खमा खोडली खेल्य तुं खप्पराळी..||06||

अहा हाकले आरबो मात आया, धरा वल्लभी पुर पे जोध धाया
गणेणी उठ्युं गोम ने प्हाड गाळी, खमा खोडली खेल्य तुं खप्पराळी..||07||

मनाव्यो छतां मात ना वात मान्यो , पछाड्यो धरा जग्त आखे प्रमान्यो
भ्रकुटी मरोडे किधूं रूप काळी , खमा खोडली खेल्य तुं खप्पराळी..||08||

जपे राव ने साव जोगण जुनांणे, धरा गुर्जरी तो पुजे पांण पांणे
खडेड्यो लीये आभ ने मात खाळी, खमा खोडली खेल्य तुं खप्पराळी..||09||

जदै जोगीदानम् जीभे रास जामे, प्रचो मात तोळो पूरो जग्ग पामे
ग्रजे चौद ब्रह्मांड दै हत्थ ताळी, खमा खोडली खेल्य तुं खप्पराळी..||10||

नमो खोडल्अंबे तणां नाम नाजे , गगन भेद नादोय गोहिल्ल गाजे
वखतसिंग आता वखत मां वडाळी, खमा खोडली खेल्य तुं खप्पराळी..||11||

अढारौ सतक पादरो मात आप्या, वधी वंश वेली अरू विश्व वाप्या
मगर वाहनी मेर करजो मढाळी, खमा खोडली खेल्य तुं खप्पराळी..||12||

🙏🏻🔱🙏🏻🔱🙏🏻🔱🙏🏻🔱🙏🏻

9 फ़रवरी 2019

भारत तणी हे भव्यता रचना: जोगीदान चडीया

.           *भारत तणी हे भव्यता*
.         *रचना: जोगीदान चडीया*

कंचन मुकी ने कथीर चाहे लोक कांनव लाजतुं
अनुकरण बस अंग्रेज नुं देखीन दल बउं दाजतुं
वहरी विदेशी कुडी वातुं धरम ने ध्रुज्जावती
भारत तणीं ए भव्यता मने याद हैये आवती.01

चडीया लगावे जुवो चेतक प्रथम बाजी प्राणनी
स्वामीभगत ई केम सहेतो हांण पत हिंन्दाणनी
पर चंड वातुं ऐ प्रतापी पुस्प सम प्रसरावती
भारत तणीं ए भव्यता मने याद हैये आवती.02

प्राचीन ने सौथी पवितर भोम मत खो भेद मां
नवखंड ने छे नाज ई विज्ञान मुळ छे वेद मां
अहीयां विदेसी नेय वसुधा खंतथी खवरावती
भारत तणीं ए भव्यता मने याद हैये आवती.03

मां भौम नो झंडो मीसर लग फडड फडडड फरकतो
अभिमान नई अमिरात झरतो गर्व आभे गरकतो
सिंधु ने झेलम सदा निरमळ नेह थी नवरावती
भारत तणीं ए भव्यता मने याद हैये आवती..04

सम्राट थई ने मौर्य सिखवे अखंडीतता अंकने
संगे खमीरता एक सरखी राव ने अने रंक ने
दुश्मन तणां दळ कटक ने जे चंडीका थई चावती
भारत तणीं ए भव्यता मने याद हैये आवती.05

चिडीया नहीं आ चंडीका छे राजपुती रीत छे
हिम्मत कदी ना हारती ए जुग जुगांन्तर जीत छे
जननी मुके रण बीच जायो गीत विरता गावती
भारत तणीं ए भव्यता मने याद हैये आवती.06

अाभौम करशन बुद्ध म्हावीर बचन अमुलख बोलता
सुंणतांय सिेंकर बणीं सावज द्हाडदई ने डोलता
शिव शिसवासी सांन्तनु कज गीत प्रीती गावती
भारत तणीं ए भव्यता मने याद हैये आवती.07

जगदंब जोगीदान माता जनक तनया जानकी
राघवसभा निज तातसामे उभी मुरती आनकी
अबळा तणां ई एक सादे धरम रखवा धावती
भारत तणीं ए भव्यता मने याद हैये आवती.08

क्रमशः.......
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

7 दिसंबर 2018

क्षमा याचन स्तोत्र रचना:जोगीदान चडीया

.               *क्षमा याचन स्तोत्र*
.           *रचना:जोगीदान चडीया*
.               *छंद:भुजंग प्रयात*

गियो हीबकी हुं तुने खुब गोती, जनेता छुपी रई बधुं आप जोती.
पखाळुं हवे पांपणें ढोळ पानी, क्षमा कर क्षमा कर क्षमा कर भवानी.
01

भुलो होय तो मां भूलो भाव भोळे, खिलावो सदा बाळ ने लईन खोळे.
गणीं ने न त्याजो अमुंने गुमानी, क्षमा कर क्षमा कर क्षमा कर भवानी.
02

रह्यां व्योम ने धर रुंवे रुंव राची, सनातन तणों सार तुं ऐक साची.
तरे भव तवां नाम जो गाय तानी, क्षमा कर क्षमा कर क्षमा कर भवानी.
03

खम्मां बोलनारी तुं ही तुं खलक्के, पुकार्याय भेळी पुगे तुं पलक्के
जण्यां ना दरद ने सदा जाय जानी, क्षमा कर क्षमा कर क्षमा कर भवानी.
04

घणां लोक थाक्या पुकारी पुकारी, अमुं ने लीधा एक सादे उगारी.
कृपाळी हवे छोडज्यो ना कबांनी, क्षमा कर क्षमा कर क्षमा कर भवानी.
05

अरज मा अमारी सुंणी आप आवी, प्रगट्टी भवां बाळ तारो प्रखावी.
मयां तोतरी आरदा लीद्ध मानी, क्षमा कर क्षमा कर क्षमा कर भवानी.
06

अदेहा छतां दिव्य देहे द्रसाती, वळी व्योम नो विंझणो मात वाती.
उभी क्रोड सुर्यो तणां तेज तानी, क्षमा कर क्षमा कर क्षमा कर भवानी.
07

द्रस्या अणद्रस्या चौद ब्रह्मांड चंडी, दियाळी तमांणे तो ए पांव दंडी.
अनंता द्रस्युं ई तवां ऐक आनी, क्षमा कर क्षमा कर क्षमा कर भवानी.
08

अमुं बाळ तोळां महा आप माता, जुगोथी पुरांणां मया बाळ नाता.
तुंही सर्व मां सर्व सर्वा समानी, क्षमा कर क्षमा कर क्षमा कर भवानी.
09

अमे शुं तमांणा गुंणो मात गाये, विराटा सतक व्योममां न समाये.
छतां काली घेली बक्यां बाळ बानी, क्षमा कर क्षमा कर क्षमा कर भवानी.
10

प्रगट छो भवानी प्रलंबा प्रमानी, जिभासण बिराज्यां मया दास जानी.
कबुं जोग चडीये वदी हो कुबानी, क्षमा कर क्षमा कर क्षमा कर भवानी.
11

(अगियार नो अंक एटले लिधेल कारण के तेमां बे एक छे..अर्थांत बेय एक छे..दैत नथी..अने एक पोते एक मां मळे तो बे थाय..शिव शिवा..दैत दर्सावनी अद्वैता महा शक्ति ने वंदन)

*रचना: जोगीदान चडीया, मो.नं.9898360102*

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12 अप्रैल 2018

तत्व चारण तणुं जाय तळीये

.         *तत्व चारण तणुं जाय तळीये*
.            *रचना: जोगीदान चडीया*
.                *ढाळ:गीत सांणोर*

तुट्या मणकाय वण तार जग तारणी,मथ्या बउं तोय नव थियल माळा
भुल्या गंभिरता भुवण भवनेहरी, चारणो लीयाव्या चेन चाळा
सत्व दैवत्व शगती तणां छोरुंडा, भद्र अण भद्र मां केम भळीये
जोग चडीयो भणुं जाग जगदंबिके, तत्व चारण तणुं जाय तळीये..01

हिमाळे सांभळी हिया ना हाकला, डाकला वगर मां दोट्य देती
अभय करवा अमुं लीयण अवतार तें, जीवणी कबुं थई कबूं जेती.
क्रोड खमकार करती नभां कांगरे, नाखतां गुंगळ नुं धुप नळीये
जोग चडीयो भणुं जाग जगदंबिके, तत्व चारण तणुं जाय तळीये..02

प्रतिस्ठा पामवा पुजे पग पारका, ध्रुजे ई जोवतां हाड धरणी
स्वार्थ मा अंध कां बन्या छे सारणो, कारणो जडे नई मात करणी
देखियां कैक ए द्रस्य मे ज्यां दणी, काळजां कपायां हाय कळिये
जोग चडीयो भणुं जाग जगदंबिके, तत्व चारण तणुं जाय तळीये..03

अहाहा शुं तने कउं हवे अंबिका, कैक कांटा लगे जीभ केतां
पीये दारु अने खाय परमाटीयुं, देज काजे वधुं दाग्य देता
फेरवो हाथ आ माथडे फेरथी, वरण दैवे वळी मात वळीये
जोग चडीयो भणुं जाग जगदंबिके, तत्व चारण तणुं जाय तळीये..04

पटाधर थई हवे आव प्रथमी परे,प्रतिष्ठायुं तणा पुर परचा
तोज चारण तने मानशे तारणी, चारणी कही करे तोज चरचा
नकी तुज रिहणां थियां छे मा नके,चारणो धरम पथ केम चळीये
जोग चडीयो भणुं जाग जगदंबिके, तत्व चारण तणुं जाय तळीये..05

क्यां लगी मावडी रहिश तुं क्रोध मा, सोध मां अमे बउ फर्या सगती
भुवा भोपा कनें भेळीया भाळतां, भवां अबतो डगे अचळ भगती
धोम दैवत्व जे खोळीये धबकतुं, प्रखातुं नई हवे एक पळीये
जोग चडीयो भणुं जाग जगदंबिके, तत्व चारण तणुं जाय तळीये..06

खुमारी रई हवे खुंणे के खांचरे, करम खोटां नको जेह करता
सत्त ना उपासक पुजे संपत सता, मता कारण बिजा केम मरता
अहोया समां छे जेहनां आंगणा,  फरी जई जांचता एज फळिये
जोग चडीयो भणुं जाग जगदंबिके, तत्व चारण तणुं जाय तळीये..07

टीका नी टीका पर सर्व पडता फिका, बिकायल कोय नव बात बकता
बळी मरती जुवे बाप नी बेटडी, तोय कायर कनीं राह तकता
हळाहळ झेर आ भाळीयें हाथमां, गळचटुं कई छतां केम गळीये
जोग चडीयो भणुं जाग जगदंबिके, तत्व चारण तणुं जाय तळीये..08

*रचना:जोगीदान चडीया*
*मो.नं.9898360102*
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25 जनवरी 2018

खोडल तारा खेल रचना: जोगीदान गढवी (चडीया)

*आई श्री खोडीयार नी महा अष्टमी ना दिने भगवती खोडल ने कोटी वंदन...*

.©         *|| खोडल तारा खेल ||*
.        *रचना: जोगीदान गढवी (चडीया)*

पोगेय तुं  पताळमां,  गगने करती गेल.
जोया चारण जोगडे, खोडल तारा खेल.||01||

(हे मा खोडल..तुं पलक मां पाताळे पोगे तो बीजी क्षणे गगन मां गेल करती होय..तारा खेल ने अमे जोई शकीये पण एनो पार न पामी सकीये)

मामडीया मादा तणी, आठेक सदीये आई
जो वढीयारे जोगडा, राज थळां नी राई.||02||

(हे मामडीया मादा चारण नी दीकरी मां खोडल.. राजस्थान नी धरती परथी तुं वढीयार नी धरा पर आशरे आठमी सदी मां दरसाई )

आवड खोडल आवियुं, सातेय बेनड साथ
जननी जायो जोगडा, हाड मेरखियो हाथ.||03||

(मां खोडल ने आवड वगेरे सातेय बेनुं अने साथे हाड वालो भाई मेरखीयो पण हारे हतो..)

डसीयो वीर ने डोकरी, नफ्फट काळो नाग
जानल हाली जोगडा, ताण लियां घर ताग.||04||

(ज्यारे ते धरती पर वीर मेरखिया ने सर्प दंश थयो त्यारे हे मां खोडल त्यारे तारुं नाम जानल हतुं तुं घरणी नो ताग लेवा पाताळे पोगी..)

आवड वीर अहांगळे, (थोडु) मांठुंय बोली मां
जानल पग मां जोगडा,(के )कर खोडी थई कां.||05||

(वीर मेरखीया नो घरती पर ढळेलो देह जोई ने विर नो अहांगळो करती मां आवड जानबाई ने आवतां वार लागेल जोई ने थोडुं मांठुं बोल्यां..के जानल खोडी थई के शुं??)

आँयां सूरज उगशे, (ऐवी) जो थई आवड जांण
(त्यारे)जटक्यो छेडो जोगडा, भोंय गरीग्यो भांण. ||06||

(हमणां सूरज उगशे अने भाई ने भारे पडशे ई जोगमाया आवडने जांण थतां भेळीया नो छेडो झटक्यो अने सुरज पाछो भुमी मां गर्त थयो..)

अमियल कुंपो आंणीयो , व्रांणा धर वढीयार
जानल त्यांथी जोगडा, खोड थतां खोडीयार.||07||

(अमिनो कुंप लई ने मां जानल आव्यां पण मां आवड ना वेंण हतां के क्यांय खोडी थई के शुं?? माटे मां जानल ने खोड थई अने त्यारथी ते खोडीयार तरीके (हालना वरांणां वढीयार थी) प्रसिद्ध थयां..)

आवड खोडल उरथी, वड़ दियुं वरदान
मोटी खोडल मावडी, जग पर जोगीदान.||08||

( त्यारे मां खोडीयार ने भगवती आवडे वरदान आप्युं के भले जन्मे हुं मोटी छुं..पण जगत तने मोटी मानशे..)

नई दउं आवड नाम हुं, धीडीयुं मामड धार
जानल खोडल जोगडा, वर आंणा वढीयार.||09||

( मां आवडे खोडल ने वरदान आप्युं के हुं ज्यां पण रहीश मारुं नाम आवड तरीके नही आपुं..जेथी जगत मां मारी बेन खोडीयार नुं नाम मोटुं थाय...जेना द्रस्टांत रुप आप जोई शको छो के राजस्थान मां जेटलां पण आवड ना मंदीर छे..तेनां नाम आवड नही पण..भादरीयाजी..तनोट राय..तेमडाराय..बेडाराय...चाळकनेसी ..वगेरे थी पुजाय छे..आ वर(वरदान)आंणा (मेळव्युं) ते धरती ऐटले वरांणा(वरआंणा)..)

अमरत खातां उठीयो, मेरखीयो दई मट्ट
जेर उतरतां जोगडा, तोगड दे तलवट्ट.||10||

(अमि कुंपा थी उठी ने वीर मेरखीयाये. आंख खोली..त्यारे नानी बेन तोगडे तलवट्ट लावी ने भाई ने खवराव्या...आ प्रसंग नी यादी मां आजे पण माताजी ने (भाई मेरखीया माटे) तलवट धराववा मां आवे छे जेने ते लोको घांणी कहे छे..जेमां तल अने गोळ खांडेला होय छे...आ स्थळ सिवाय बिजे कोई मंदीरे खोडीयार ने तलवट नथी देवाता..)

फरती भाळी फुनडे, भोळ गोवाळे भोर
जोगण खोडल जोगडा, दुधड नेहे दोर.||11||

(नजीक ना  दुधड नेह ना भोळ गवाळ फुनडा ने पोते त्यां होवानी खात्री आपी अने भोळ गवाळ  फुनडाये माताजी खोडल ने अहीयां भाळी ..पछी माताजी नुं तथा माताजी ना भाई मेरखिया क्षेत्रपाळ नुं त्यां स्थापन करायुं ईस.1365 ने आसो सुद अस्टमी ने रविवारे...)

आंम मॉं जानल  नुं नाम खोडीयार थवुं, मॉं आवड नुं वरदान, तथा उगता सुरज ने रोकवा नी घटना ना साक्षी ऐवा वरांणा नी धरती ने मारां वंदन छे..

*रचना: जोगीदान चडीया*
*मो.नं. 9898 360 102*
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