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"जय माताजी मारा आ ब्लॉगमां आपणु स्वागत छे मुलाक़ात बदल आपनो आभार "
आ ब्लोगमां चारणी साहित्यने लगती माहिती मळी रहे ते माटे नानकडो प्रयास करेल छे.

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5 जनवरी 2019

पू.आईश्री सोनल मां

बधा आश्रमो गृहस्थाश्रमने आधारे छे, ऐटले गृहस्थाश्रमने दूध जेवो मानेल छे. दूधथी जेम बधानुं पोषण थाय छे, ऐम गृहस्थाश्रमथी सौनुं पोषण थाय छे. पण दूधमां जो मीठु पडी जाय तो ? तेने वाडमां नाखी देवुं पडे. माटे गृहस्थाश्रमने पवित्र राखवो.
                  *- पू.आईश्री सोनल मां*
संदर्भ :- सोनल संजीवनी मांथी
         *वंदे सोनल मातरम्*

4 जनवरी 2019

आई श्री सोनल मांनुं आदेश (पोस्ट ता.04-01-2019)

आई श्री सोनल मांनुं आदेश (पोस्ट ता.04-01-2019)

आर्थिक रीते गरीब तवंगर वगेरेना जे भेद छे तेमां मनुष्योना पूर्व कर्मो प्रारध्ध, तेनी वर्तमान कर्म प्रवृति , आळस, प्रमाद वगेरे भाग भजवे छे. ऐमानुं घणु बधु ऊपर वाळाना हाथमां छे. आर्थिक गरीबी ऐ साची गरीबी नथी पण जीवनमां ऐनाथी विशेष नीचे उतारनारी गरीबी, ऐटले व्यसनो, ईर्षा, ऐकबीजा वच्चे वैमनस्य, ऐक बीजाने तोडी पाडवानी वृति - आ बधी गरीब भावनाओ छे. जे मनुष्यने रंकत्व आपे छे. मनुष्य शा माटे आवो रंक - आवो पापी बने ? शा माटे कोईनी ईर्षा करीने पोताना आत्माने अभडावे ? जीवन द्रष्टिऐ नीची उतारनारी आवी नानी बाबतोमां शा माटे पडो छो ? ऐ दुषणोने जल्दीमां जल्दी काढी मूको.
             *-  पू.आई श्री सोनल मां*

संदर्भ ::- सोनल संजीवनी मांथी

3 जनवरी 2019

प्.पु.आई श्री सोनल मां

कोईनो उद्धार बीजुं कोई करे, ऐम हुं मानती नथी.
                     पोतानो उद्धार सौऐ पोते ज करवानो छे.
भोमियो तो मार्ग बतावे चालवानुं तो पोतेज होय छे.
                            - प्.पु.आई श्री सोनल मां

2 जनवरी 2019

मढडा संमेलन प्रथम दिवस सं-2010 अक्षय तृतीया वैशाख सुद-3 बुधवार ता.05-05-54 ना रोज आई मां नुं मंगळ प्रवचन

*मढडा संमेलन प्रथम दिवस सं-2010 अक्षय तृतीया वैशाख सुद-3 बुधवार ता.05-05-54 ना रोज आई मां नुं मंगळ प्रवचन*

    " आज अमारा अहोभाग्य के ज्ञाति गंगाना दर्शन थया. घणा दिवस नी ईच्छा हती ते आजे पूरी थई. तमे सौ तकलीफ वेठीने अहीं पधार्या, ते माटे तमारो सौनो आभार मानुं छुं. हुं अभण छुं. अने भाषण करतां आवडतुं नथी, ऐटले मारी वाणी मां कंई भूल थाय तो माफ करजो" आम कहीने आछु हस्या अने फरीने गंभीरताथी बोल्या.
    " जगत जननीनो आशीवार्द छे के चारणोनी हवे चडती थवानी छे, तेनी सौ खात्री राखे. आटली मोटी संख्यामां भेळा थया छो, ते ज्ञाति तरफना प्रेमने लईने ज ने ! *अने ज्यां आटलां बधा माणस प्रेमथी भेळा मळे, त्यां जरूर सारू ज परिणाम आवे.* तमे सौ ऐवा ठराव घडजो के जेथी ज्ञाति आगळ वधे"
   *"आगळना जमाना मां चारणो देव कहेवाता. देव ऐटले ? जेना मां दैवी शकित होय, सत्त्वगुण होय, शुद्ध आचार होय, भजन पूजन होय, ते देव. जेनामां शुभ लक्षण होय तेनुं नाम चारण "*
   " आपणामां नव लाख लोबडियाळीउ थईउ छे. ऐमना पथरा पूजाय छे. तो जीवतीऊं केम न पूजाय ? आपणे देवपण साचवीऐ तो आज पण आपणी बेनुं दिकरीउ जगदंबाउ बने. जगदंबा ऐटले ? जे विषयने आधीन न थाय ई जगदंबा ने जे विषयमां लपटाय ऐनुं नाम स्त्री."
   *" आपणे देव हता. पण अत्यारे आपणामां खोटां लक्षण आवी गयां छे, ते काढी नाखवा जोईऐ. माताजीनुं भजन स्मरण करवुं जोईऐ. गीता, रामायण, हरिरस भणवां विचारवां जोईऐ. कोई बेनुं दिकरीऊं मांगे नहि. भाई मांगवा शीख्या, तेनो चेप बेनु ने पण लागी गयो. ते बंध थावुं जोईऐ. कन्याना पैसा लेवानुं पण बंध करवु जोईऐ अने सौऐ पुरुषार्थ करवो जोईऐ. पुरूषार्थ विना आपणो उद्धार थवानो नथी. पुरूषार्थ ऐटले ज परचो. पुरूषार्थ ऐटले ज देव."*
     " बधा आश्रमो गृहस्थाश्रमने आधारे छे, ऐटले गृहस्थाश्रमने दुध जेवो मानेल छे. दूध थी जेम बधानुं पोषण थाय, ऐम गृहस्थाश्रमथी सौनुं पोषण थाय छे. *पण दूध मां जो मीठुं पडी जाय तो ? तो तेने वाड मां नाखी देवु पडे. माटे गृहस्थाश्रमने पवित्र राखवो.* ऐ बाबत मा शंकरदानजीनी ऐक कविता छे ते हुं बोलुं छुं."
         *.छंद हरि गीत.*
"संसारमां सुख पामवा, कंगालनुं दुःख कापवुं,

याचक अतिथिने यथा शक्ति, दान अन्न नुं आपवुं ;
परणी तिया  पर प्रेम राखी, उच्च करणी आदरी,
भवदधि तरवा भावथी, हरदम समरवा हर हरि... 1

उत्तम विचारोथी निरंतर, शुद्ध अंतर राखवुं,

बदकर्म थी डरवुं बहु, सतकर्म ना सेवक थवुं ;
राखी सु रीती नेक नीति, सत्य बाबत नी समज,
भजवा अजर अज अमर ऐवा, वृषभधव्ज कां गरुडधव्ज...2

निज सुख स्वारथ साधवा, दु:ख दीन ने देवुं नही,

लाखो मळे पण लोभवश, अन्याय थी लेवुं नही ;
काळे करी धन त्रिया काया, त्यागवा पडसे तदन,
(तो) समरवा सुख सदन ऐ, मर्दनमयन कां मधुसुदन....3

ऐवो वखत आवे कदी, अन्न होय ऐकज टंक नुं,

(तो) आपे करो उपवास पण, राजी करो मन रंक नुं ;
ऐवी अजायब मजा लेवा, विरर्दढ राखी वृति,
क्षण क्षण प्रति संभारवा, गिरिजापती का श्रीपति....4

नरनाथ ने घरनाथ ने, जरनाथ सर्वे जाणजो,

सद वखतमा सत्यकर्म करजो, अहंकार न आणजो ;
परहित करो कीर्ति वरो, मृतलोकमां लेवा मजो,
*'शंकर'* कवि नीति सजो, दुर्मद तजो, ईश्वर भजो..." 5

   आम कही पू. आई मां ऐ बे हाथ जोड्या, ने मस्तक नामाव्यू, जे सामे वीस हजार हाथ भेळा थया. दश हजार मस्तक नमी पड्यां. ' सोनल मात की जय ' नो घोष गर्जी उठ्यो.
टाईप :- www.charanisahity.in
संदर्भ :- पिंगळशीभाई पायक रचित मातृदर्शन मांथी पाना नंबर 377 अने 378 पर थी
टाईप मां भूलचूक होय तो सुधारी ने वांचवा विनंती छे
*ख़ास नोंध :- आ खाली जाणकारी माटे ज मातृदर्शन मांथी टाईप करेल छे क्यां पण Copyright नो भंग थयेल होय तो माफ़ करजो*
*Forward To All Friends & Groups*
     * वंदे सोनल मातरम् *

1 जनवरी 2019

पू.आई श्री सोनल मां ना प्रवचनो (पोस्ट ता.01-01-2019)

पू.आई श्री सोनल मां ना प्रवचनो (पोस्ट ता.01-01-2019)

जय माताजी
*पोष सूद -2 ऐटले सोनल बीज (08-01-2018) ऐ निमिते हवे दररोज पू.आई श्री सोनल मां ना मुखे जे प्रवचनो थयेल तेमना केटलाक अंशो आप बधा समक्ष मुकववानो नानकड़ो प्रयास करेल छे*

चारण जयां होय अने जे कोई धंधामां होय, विधार्थी होय, खेडूत होय, पशुपालक होय, मजूर होय, वेपारी होय, वकील, डॉकटर, गमे ते व्यवसायमां होय, के पेन्शन होय, गमे त्यां होय त्यां चारण जातिना स्वयं सेवक बनी जवुं जोईऐ, जातिने जो आगळ लाववी हशे, तेनुं गौरव प्रगटाववुं हशे, तो चारणे व्यसनो छोडवा ज पडशे, सादा बनवुं ज पडशे, पोतानी संपत्ति माथी यथाशकित जाति उन्नतिमा आपवुं ज पडशे तन-मन-धन थी जाति सेवा करवानां व्रत लेवा ज पडशे. आवुं करशुं अने ते पण तुरतो तरत करशुं , तो ज आपणे बीजा समाजोनी हरोळमां उभा रहेवानी पात्रता प्राप्त करी शकशुं. तो ज आपणे बीजाओने प्रेरणाना पाठ भणावी शकशुं.
                   - पू. आई श्री सोनल मां

संदर्भ ::- सोनल संजीवनी मांथी

         *वंदे सोनल मातरम्*

19 दिसंबर 2017

पू.आई श्री सोनल मां

जे कुरिवाजोने संघरे छे ते क्षयने संघरे छे. क्षयनी जेमज कुरिवाजो पण आपणा ज्ञाति शरीरने निर्माल्य अने मृत प्राय बनावे छे.
          - पू.आई श्री सोनल मां
संदर्भ :- सोनल संजीवनी मांथी
     *वंदे सोनल मातरम्*

13 दिसंबर 2017

आई श्री सोनल मांनुं आदेश (पोस्ट ता.26-12-2016)

आई श्री सोनल मांनुं आदेश (पोस्ट ता.13-12-2017)
आपणे जयां सुधी पोताना परसेवाना पैसाथी बोर्डिंग नहिं चलावीऐ त्यां सुधी आपणा बाळकोमां दैवत प्रगटवानुं नथी. बीजाओनी मदद पर आधार राखवाथी बाळको बुध्धिमां अने पुरुषार्थमां पांगळा रहेवाना. माटे दरेक चारण ऐवो निर्णय करे के पोतानी कमाणी मांथी अमुक हिस्सो बोर्डिंगने दर वर्षे जरूर मोकली आपे.
             -  पू.आई श्री सोनल मां
संदर्भ ::- सोनल संजीवनी मांथी

12 दिसंबर 2017

हे चारणी रचयीता :- परम पूज्य आई श्री सोनल मां


हे चारणी रचयीता :- परम पूज्य आई श्री सोनल मां

हे चारणी सुख कारणी ! ब्रह्मचारणी आये शरण .
सच्चिदानंदे शारदे मंगलमयी प्रणमे शरण .
                                                     ..... हे चारणी .....

अंबिके आवड आशापुर्णे , है तुम्हारे बाल हम . 
जगतारणी अधहारणी , कुरु प्रणत की प्रतिपाल तुम.
                                                     ..... हे चारणी .....

हम क्यो पतीत हो गये , जब हो पतीत पावनी मात तुम .
हम क्यो अशांत अरु-असुचि जब हो,शांति सुचिंदा मात तुम.
                                                            ..... हे चारणी .....

पुर्वज सदश नीति पथीक हो , मातृभुमि के भक्त हम.
शुरे-उदार अरु सत्य वक्ता , अमृतमयी अनुरक्त हम .
                                                         ..... हे चारणी .....

द्रढविर वृती सेवक बने , अरु पढे शम-दम पाठ हम . 
अग्नि परीक्षा मे अडिग बन , बढे संयम बाट हम. 
                                                       ..... हे चारणी .....

यम यातना हो नर्क-दु:ख , कर्तव्य पथ छोडे न हम .
दम-दम तिहारा जप जपे , मर-मीटे मुख मोडे न हम .
                                                       ..... हे चारणी .....

आशिष उच्चरो अन्न पुर्णे , श्री चरण मे लीन हो हम .
हम हदय सिंचो अमृत  "सोनल" प्रेममयी लागी लगन .

                                                       ..... हे चारणी .....
रचयीता :- परम पूज्य आई श्री सोनल मां ( मढडा )
टाईप :- महेशदान गढवी नरोडा .
टाईपमां भुल होयतो बंधु क्षमा करजो 
              वंदे सोनल मातरम् 

HE CHARANI SUKH KARNI -SVAR URMILABEN GADHAVI MUNDRA-KUTCH DOWNLOAD MP3 :- Click Here

11 दिसंबर 2017

मढडा संमेलन मां आई मां नुं त्रीजु प्रवचन

*मढडा संमेलन मां आई मां नुं त्रीजु  प्रवचन*
    ' ज्योतिष मां जे होय ते, पण मने उंडे उंडे शंका रहे छे के मारू आयुष्य ओछुं छे. पण तोय *मारी फरज तो मारे बजाववी ज जोईऐ. परंतु कोई नो उद्धार बीजु कोई करे, ऐम हुं मानती नथी. पोतानो उद्धार सौऐ पोते ज करवानो छे. भोमियो तो मार्ग बतावे. चालवानुं तो पोते ज होय छे. नातमां मारा हरवा फरवाथी वातावरण सुधरी जशे, ऐवु निश्वित तो न ज कहेवाय. छतांय मारे माटे तो ऐ ऐक तीर्थ यात्रा थाय. ज्ञाति पण गंगा छे. अहिं तमे सौ आव्या छो ते ज्ञाति गंगानी ऐक धारा छे. पण ऐ गंगानुं समग्र दर्शन तो गामडे गामडे अने झुंपडे  झुंपडे फरवाथी थाय. ऐटले ज्ञातिनुं भलुं करवा करतां मारा पोताना आ स्वार्थ खातर हुं पिंगलशीभाईना कहेवा प्रमाणे मारा आयुष्यनो बनी शके तेटलो बधो भाग ज्ञाति सेवा करवानुं वचन आपु छु.'*
    ताळीओना गडगडात अने सोनल मातकी जय ना घोष थी मढडानुं आकाश गाजी उठयुं. हर्ष नादो थया. हजारोनां ह्रदयोमा उजळा भविष्यना आशादीप प्रागट्या. सेवानुं व्रत लीधेला पु. आई मा सोनल साक्षात शारदा ना रूप मा सौनो नजरे देखाया. थोड़ीवारे वातावरण शांत थयुं, ऐटले पोते फरीथी बोल्या के :-
   " शंकरदानजी ने तबीयत सारी नथी रहेती. ठारणभाई पण वृद्ध  थई गया छे. ऐटले कामनो बधोय बोजो भगत जी अने मेरुभाई ऐ उपाडवानो छे. अ ऐमणे घणु काम कर्यु छे ते माटे ऐमनी प्रशंसा नहि करु. पण उलटु हुं ऐमने ठपको आपवानी छु. का मेरुभाई ! आपुं ने ठपको ! मेरुभाई ऐ हाथ जोडी हसता हसता कह्यु के ' हां माडी ! आपो ठपको ' ऐटले पू. आई मा ऐ हसता हसता कह्यु के :-
  *" तमारी बंनेनी शकितना चार आनाज अत्यार सुधी ज्ञातिनी सेवामां  खर्चाणा छे. पूरा सोळे सोळ आना जो ज्ञाति सेवा मां खर्चाया होत, तो ज्ञाति घणी आगळ वधी जात. पण तमे पण वेवार मा बेठा छो, ऐटले ऐना काम पण करवा पड़े. पण भगतजीने तो सौ बापु कहे छे. ऐटले बापु थनारनी जवाबदारी पण तेटली वधारे छे. साथे साथे बापु कहेनाराओ ऐ पण पूर्ण श्रध्धाथी बापुना बोल ने भगताजीना बोल ने उठावी लेवो जोईऐ.* ऐटले आपणे सौ ऐ हवे अवकाश लई ने आपणी बधी शकित ज्ञाति सेवा मा खर्ची जोईऐ, तो हवे भगतजी अने मेरुभाई पण प्रतिज्ञा ल्ये ( आम कही पोते जराक हस्या) के ज्ञाति सेवामां तन मन बधुं अर्पण करशुं. जे करवानुं छे, ते तमारे ज करवा नुं छे. आ तो तमे बधाऐ कह्यु ऐटले हुं नातमां फरीश , पण मारू स्थान तो आई ना ओरडा मा छे. ऐटले भगतजी अने मेरुभाई ऐ बधी जवाबदारी उपाडी लेवी जोईऐ. आना थी विशेष मारे कंई कहेवानुं नथी. जय माताजी जय अंबे"
संदर्भ :- पिंगळशीभाई पायक रचित मातृदर्शन मांथी पाना नंबर 384 पर थी
टाईप मां भूलचूक होय तो सुधारी ने वांचवा विनंती छे
*ख़ास नोंध :- आ खाली जाणकारी माटे ज मातृदर्शन मांथी टाईप करेल छे क्यां पण Copyright नो भंग थयेल होय तो माफ़ करजो*
     * वंदे सोनल मातरम् *

7 दिसंबर 2017

पू.आई श्री सोनल मां ना प्रवचनो

जय माताजी
*पोष सूद -2 ऐटले सोनल बीज (20-12-2017) ऐ निमिते हवे दररोज पू.आई श्री सोनल मां ना मुखे जे प्रवचनो थयेल तेमना केटलाक अंशो आप बधा समक्ष मुकववानो नानकड़ो प्रयास करेल छे*

चारणो बीजाओनां दु:खे दुखाता, ऐवा तपस्वी हता. आपणी नानकड़ी नात तेमां वाडाना भेद अने उंचा नीचानी वातो...... ऐ बधूं जूनी पुराणी रूढ़िओने लीधे थई गयुं छे खरी रीते कोई ऊंचु नीचुं नथी. *चारण ऐक धारण* छे अने आपणी स्थिति नबळी छे ते आपणे पुरुषार्थ करीने सुधारीऐ. सुधारानुं पहेलुं पगथियुं ते उंचा विचार छे. विचार ऐ बधानुं बीज छे. आपणे उंचा विचारोना बीज वाववा. ऐमांथी महान वृक्षो थशे. नानकड़ा बीज मां मोटो वडलो पड्यो होय छे, तेम शुभ विचारना नाना बीज मां उन्नतिनुं वृक्ष होय छे. माटे सौथी पहेला शुभ विचारनां शुभ विधाना बीज वावो. बाळकोने भणावो. चारण मांगवाने रवाडे चडयो, तेथी माणसाई गई, साच गयुं अने टेक गई, लुखो रोटलो खावो पण मांगवुं नहिं, ऐ चारणोऐ द्रढ करवुं. संपत्ति वधारवी होय, जीवन उंचा बनाववां होय, तो जीवनमां पवित्रता राखजो, आचार पाळजो, पुरुषार्थ करजो अने संप राखजो भाईओ बहेनोने मारी भलामण छे.
             *-  पू.आई श्री सोनल मां*

संदर्भ ::- सोनल संजीवनी मांथी
(पोस्ट तारीख ::- 07-12-2017)
         *वंदे सोनल मातरम्*

24 सितंबर 2017

नवरात्री पूजन अने उजवणी प.पू.आईश्री सोनल मां

*नवरात्री पूजन अने उजवणी माटे प.पू.आईश्री सोनल मां ऐ कह्यु छे के,*
                 *भाग-2*

"नवरात्री ऐ नवदुर्गाओनुं पर्व छे. चंडीपाठना देवी कवचमां नव दुर्गाओना नाम आप्या छे (1)शैलपुत्री, (2) ब्रह्मचारिणी, (3) चंद्रघटा, (4) कुष्मांडा, (5) स्कंदमाता, (6) कात्यायनी, (7) कालरात्रि, (8) महागौरी, (9) सिद्धिदात्री.

     आ नव दुर्गाओ ऐटले भगवतीनां जुदां जुदां नव रूप बने. नवरात्रीमां दररोज ऐक ऐक रूपे भगवतीनी पूजा करवामां आवे छे. झीणवटथी जोईऐ तो आ नवे रूपमां बाईउना जीवननी टूंकी रूपरेखा प्रतिबिंब खेंचवामां आवेल छे,

(1) शैलपुत्री ऐटले हिमालयना दीकरी पार्वती. ऐनुं पूजन ऐटले नानपणथी पर्वतमां वसवा जेवी कठोर तालीम अने सहन शकित केळववी.
(2) ब्रह्मचारिणी ऐटले कुमारी अवस्थामां मन, वचन, कर्मथी पूर्ण ब्रह्मचर्य.
(3) चंद्रघटा ऐटले चंद्र जेनी घंटडीमां छे. ऐटले जेनी वाणीमां चंद्रनुं अमृत, अवाजमां घंटडीनो रणकार, घरेणां कपडा, खानपानमां चंद्रनी शीतळता
(4) कुष्मांडा - दुनियाना त्रणे ताप, आधि, व्याधिने पचावे, संसार वहेवारमां झेर जीरवे ते कुष्मांडा.
(5) स्कंदमाता - देव सेनापति कार्तिकय जेवा पराक्रमी दीकराओनी मां.
(6) कात्यायनी - यज्ञ, दान, पुन्यनां दैवी कामो करवा माटे ऋषिकुळनी परंपरा चलावनारी.
(7) कालरात्रि - र्दुष्टो, अत्याचारीओने काळरात्री जेवी भयंकर.
(8) महागौरी - व्रत, नियम, तपथी  शुद्ध अने उजळी.
(9) सिद्धिदात्री - रिद्ध सिद्ध देवाने शकितमान पावनमूर्ति.

*आपणा आईओ सिध्धिदात्रीओ बनेला, बाळपणाथी बुढापा सुधीमां नवदुर्गाना नवे रूपनी परीक्षामांथी पास थयेला. आपणी बाई, बहेनो, दीकरीओ जो ऊपर प्रमाणे नानपणथी ज नवदुर्गानी रहेणी करणी पाताना जीवनमां उतारे, तो भेळीयाळीओनी खोट न रहे ने साचुं चारणपणु प्रगटे.*

                              *पूर्ण*
*संदर्भ :- मातृदर्शन लेखकश्री पिंगळशीभाई पायक

*टाईप बाय* :- www.charanisahity.in

        *वंदे सोनल मातरम्*

21 सितंबर 2017

नवरात्री पूजन अने उजवणी - प.पू.आईश्री सोनल मां

नवरात्री पूजन अने उजवणी माटे प.पू.आईश्री सोनल मां ऐ कह्यु छे के,

"आसो महिनामां आपणु नवरात्री पर्व आवे छे. आम तो दरेक महिनाना पहेला नव दिवस ऐक नवरात्री छे, पण चैत्र अने आसो महिनानुं महिमा वधारे गणाय छे फागण-चैत्रमां वैदक र्दष्टिऐ कफनो वधारो अने आसोमां पितनो वधारे उपद्रव थाय छे. ऐटले ऐ महिनामां व्रत, नियम राखवानी जरूर होय छे. ऐना थी शरीर साजु-ताजु रहे अने पुजन भकितथी मन पवित्र थाय. वळी ऐ महिनाओ ऐटले ठंडी अने गरमीनी संधिनो वखत ऐटले उत्सव पुजानी अनुकूळता होय छे. फागण चैत्रमां शियाळु पाक आवे अने आसोमां वर्षाळु पाकनी मोसम होय, ऐटले ऐ उजवणीमां वधारे उत्साह रहे छे. अने ज्यारे कुदरत आपणने पाक आपे, संपति आपे त्यारे आपणे नम्र बनीने ऐनी विशेष उपासना करीऐ ऐ जरूर छे."
                                                                                        क्रमश

संदर्भ :- मातृदर्शन लेखकश्री पिंगळशीभाई पायक

टाईप बाय :- www.charanisahity.in

                                                वंदे सोनल मातरम्

19 सितंबर 2017

पू.आई श्री सोनल मां

पोतानी उन्नति सौऐ पोते करवानी होय छे. चारणोने पोतानी उन्नति करवी छे पण तेना माटे तप करवुं. परिश्रम उठाववो, पुरूषार्थ खेडवो नथी. ऐटले उन्नति कयां थी थाय ?

- पू.आई श्री सोनल मां

संदर्भ :- सोनल संजीवनी मांथी

     *वंदे सोनल मातरम्*

17 सितंबर 2017

पू.आईश्री सोनल मां

वाणीनी भकित करवा करता मननी भकित सारी छे, पण आचरणनी भकित सौथी उतम छे.

       - पू.आईश्री सोनल मां

30 दिसंबर 2016

मढडा संमेलन मां आई मां नुं त्रीजु प्रवचन

मढडा संमेलन मां आई मां नुं त्रीजु  प्रवचन

    ' ज्योतिष मां जे होय ते, पण मने उंडे उंडे शंका रहे छे के मारू आयुष्य ओछुं छे. पण तोय मारी फरज तो मारे बजाववी ज जोईऐ. परंतु कोई नो उद्धार बीजु कोई करे, ऐम हुं मानती नथी. पोतानो उद्धार सौऐ पोते ज करवानो छे. भोमियो तो मार्ग बतावे. चालवानुं तो पोते ज होय छे. नातमां मारा हरवा फरवाथी वातावरण सुधरी जशे, ऐवु निश्वित तो न ज कहेवाय. छतांय मारे माटे तो ऐ ऐक तीर्थ यात्रा थाय. ज्ञाति पण गंगा छे. अहिं तमे सौ आव्या छो ते ज्ञाति गंगानी ऐक धारा छे. पण ऐ गंगानुं समग्र दर्शन तो गामडे गामडे अने झुंपडे  झुंपडे फरवाथी थाय. ऐटले ज्ञातिनुं भलुं करवा करतां मारा पोताना आ स्वार्थ खातर हुं पिंगलशीभाईना कहेवा प्रमाणे मारा आयुष्यनो बनी शके तेटलो बधो भाग ज्ञाति सेवा करवानुं वचन आपु छु.'
    ताळीओना गडगडात अने सोनल मातकी जय ना घोष थी मढडानुं आकाश गाजी उठयुं. हर्ष नादो थया. हजारोनां ह्रदयोमा उजळा भविष्यना आशादीप प्रागट्या. सेवानुं व्रत लीधेला पु. आई मा सोनल साक्षात शारदा ना रूप मा सौनो नजरे देखाया. थोड़ीवारे वातावरण शांत थयुं, ऐटले पोते फरीथी बोल्या के :-
   " शंकरदानजी ने तबीयत सारी नथी रहेती. ठारणभाई पण वृद्ध  थई गया छे. ऐटले कामनो बधोय बोजो भगत जी अने मेरुभाई ऐ उपाडवानो छे. अ ऐमणे घणु काम कर्यु छे ते माटे ऐमनी प्रशंसा नहि करु. पण उलटु हुं ऐमने ठपको आपवानी छु. का मेरुभाई ! आपुं ने ठपको ! मेरुभाई ऐ हाथ जोडी हसता हसता कह्यु के ' हां माडी ! आपो ठपको ' ऐटले पू. आई मा ऐ हसता हसता कह्यु के :-
  " तमारी बंनेनी शकितना चार आनाज अत्यार सुधी ज्ञातिनी सेवामां  खर्चाणा छे. पूरा सोळे सोळ आना जो ज्ञाति सेवा मां खर्चाया होत, तो ज्ञाति घणी आगळ वधी जात. पण तमे पण वेवार मा बेठा छो, ऐटले ऐना काम पण करवा पड़े. पण भगतजीने तो सौ बापु कहे छे. ऐटले बापु थनारनी जवाबदारी पण तेटली वधारे छे. साथे साथे बापु कहेनाराओ ऐ पण पूर्ण श्रध्धाथी बापुना बोल ने भगताजीना बोल ने उठावी लेवो जोईऐ.* ऐटले आपणे सौ ऐ हवे अवकाश लई ने आपणी बधी शकित ज्ञाति सेवा मा खर्ची जोईऐ, तो हवे भगतजी अने मेरुभाई पण प्रतिज्ञा ल्ये ( आम कही पोते जराक हस्या) के ज्ञाति सेवामां तन मन बधुं अर्पण करशुं. जे करवानुं छे, ते तमारे ज करवा नुं छे. आ तो तमे बधाऐ कह्यु ऐटले हुं नातमां फरीश , पण मारू स्थान तो आई ना ओरडा मा छे. ऐटले भगतजी अने मेरुभाई ऐ बधी जवाबदारी उपाडी लेवी जोईऐ. आना थी विशेष मारे कंई कहेवानुं नथी. जय माताजी जय अंबे"

संदर्भ :- पिंगळशीभाई पायक रचित मातृदर्शन मांथी पाना नंबर 384 पर थी
                          वंदे सोनल मातरम् 

29 दिसंबर 2016

प्.पु.आई श्री सोनल मां (पोस्ट ता.29-12-2016)

प्.पु.आई श्री सोनल मां (पोस्ट ता.29-12-2016)

ईर्षा थी झेर वधे अने महाभारत मां थयूं तेम छेवटे अंदरो अंदर कपाई मरवानुं थाय. माटे ईर्षा तो बिलकुल काढी नाखवी.

             -  पू.आई श्री सोनल मां

25 दिसंबर 2016

आईमांनो आदेश ता.05-05-54

आईमांनो आदेश ता.05-05-54(पोस्ट ता.25-12-2016)

चारणोऐ पुरूषार्थ वाळु जीवन जीववुं जोईऐ. महेनतनो रोटलो कमावो जोईये परसेवो रेडीने मेळवेलुं अन्न अमृत गणाय छे. ते खावाथी शरीर मां हिम्मत अने बळ आवे तथा मन मां उत्तम विचारो प्रगटे. मांगीने, हीन बनीने मेळवेलुं अन्न धन अपवित्र छे. ऐवुं अपवित्र अन्न धन खानार- भोगवनारनुं शरीर, मन तथा जीवन अशुध्ध बने छे अने विचारो हलकी कोटीना होय छे. ऐवा माणसो मांथी खुमारी, वीरता अने मनुष्यत्व जतां रहे छे. माटे मारी तमने सौने भलामण छे, विनंती छे के पुरूषार्थथी रोटलो मेळवजो.*

             -  पू.आई श्री सोनल मां

संदर्भ ::- सोनल संजीवनी मांथी

22 दिसंबर 2016

पू.आई श्री सोनल मां नुं प्रवचन(पोस्ट ता.22-12-2016)

*🔹पू.आई श्री सोनल मां नुं प्रवचन(पोस्ट ता.22-12-2016)🔹*

आपणी आईओ कोई धुणती न हती, ढोंग करनारां होय ते धुणे छे. अथवा तो नबळा मगज वाळा होय ते धुणे छे. धुणवा धफवाथी कोई फायदो नथी. खोटे खोटा धुणवाथी तमे दंभी ढोंगी बनी जाशो. खोटे खोटूं धुणवुं ऐ पाप छे पोतानी अंदर माताजी आव्या छे, ऐवो खोटो दंभ करवाथी माताजी नाराज थाय. ऐवुं करीऐ तो कदी सुखी न थईऐ माटे सुखी थवुं होय तो कोई दिवस कोईऐ धुणवुं नहि.

             *-  पू.आई श्री सोनल मां*

संदर्भ ::- सोनल संजीवनी मांथी

9 जुलाई 2016

अमदावाद छात्रालयना मकान माटे ता. 9-5-1959 ना रोज मळेल सभामां आई सोनलना प्रवचनना केटलाक अंशो - प्रस्तुति :- कवि चकमक.

अमदावाद छात्रालयना मकान माटे ता. 9-5-1959 ना रोज मळेल सभामां आई सोनलना प्रवचनना केटलाक अंशो.

अमदावादमां माघवसिंहभाई अने केसरभाईऐ मंडळ स्थाप्युं अने बाॅडिंग शरु करी ते माटे तेमने घन्यवाद देवा जोईऐ.
भतृहरि महाराजे कह्युं छे के '' विघाविहीन: पशु:  '' ( विघा वगरनो माणस पशु समान छे )
विघा ऐ तो गुरुनो गुरु छे.
चारणो सरस्वती पुत्रो कहेवाय. कालिका पुत्रो नहि. चारणोनी पडती विघानो त्याग करवाथी थई छे. विघा लेवा मांडशुं, ऐटले घन दोडतुं आवशे. चारणोमां बीजी जरुर ऐकतानी छे. ऐकबीजाना गुण जोवा जोईऐ. अवगुण तो धणा दिवस जोया. टीकाओ पण खूब करी.
निंदा कोलसानी दलाली जेवी छे.
'' पारका उपर आघार राखवो नकामो छे. कोई आवीने आपणो उद्घार करी देशे ऐवी निमाॅल्य वातोमां मने कंई रस नथी. आपणे पोते ज आपणो उद्घार करवानो छे. सौ ऐ पग उपर ऊभुं रहेवुं जोईऐ. महेनतमजूरी करी जीवऐ ऐवा जीवनमां ज स्वाद छे.
चारणोमां देवपणुं हतुं ऐ खोयुं, महेनत छोडी, व्यसनो वघ्यां, अज्ञानतानुं अंघारुं फेलाणुं, चारणोऐ उदार बनवानुं छे. अमदावाद बाॅडिंगना पाया पाताळे नाखवाना छे. तेथी सहुऐ पोतानी स्थितिथी बे डगला आगळ हालवानुं छे. वादविवाद करवामां, मतभेदो करवामां कोईनुं भलुं थतुं नथी.
मने पूणॅ श्रद्घा छे माताजी गुजरात पर दया करशे.
जय माताजी
वडीलोना कथनमांथी
प्रस्तुति,  कवि चकमक.

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