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22 अगस्त 2016

स्तुती - चारण महात्मा इसरदास जी बारहठ

द्वारीकाधिश प्रभु कृष्ण परमात्मा ने चारण महात्मा इसरदासजीए 'हरिरस' नामनो ग्रंथ सभळाव्यो जे कृष्ण परमात्मा ए सामे बेसीने सांभळ्यो. आ ग्रंथ सांभळी प्रभु खुब ज प्रसन्न थइने इसरदास ने कइंक मागवानुं कहे छे. परंतु चारण महात्मा चारण होवाथी कोइ पण वाते वरदान नी याचना नी ना करेछे...
अने ए समय नी स्तुती...

हवे प्रभु सुं मांगु किरतार, सुं मांगु कीरतार
तमे राख्यो अपरंपार,हवे हुं सुं मांगु कीरतार
कृपा करीने चारण कुळमां, आप्यो छे अवतार
याद करुं त्यां आप आवीने,दर्शन द्यो छो दिदार
हवे प्रभु सुं मांगु कीरतार...

नित्य लेवानुं नाम आपनुं,मिथ्या छे संसार
अनित्य वस्तु नी इच्छा करुं, तो धीक् मारुं अवतार
हवे प्रभु सुं रे मांगु कीरतार...

मनुष्यदेह धरी आ जग मा,करवा परउपकार
भवसागर ने तरवा काजे,लख्यो हरीरस सार
हवे प्रभु सुं रे मांगु कीरतार...

नित्य वांचे ने सांभळे एने,न जोवा पडे जमद्वार
हरी भज्या इ पार उतर्या,एम कहे छे "इसरदास"
हवे प्रभु सुं रे मांगु कीरतार...

रचना --- परम वंदनीय चारण महात्मा इसरदास जी बारहठ

टाइपिंग --- राम बी गढवी
नवीनाळ कच्छ
फोन नं. --- 7383523606

चारण महात्मा रचीत भजन :- उघाडोने द्वार

न *चारण महात्मा भक्तवर ईशरदासजी रचीत भजन*
*हरिरस स्वाध्याय सभानुं आयोजन करी अने सभानुं काम शरु करतां प्रथम भक्तवर ईशररदासजी नी समुंहगान स्तुंतिनुं गान करवुं अने भजन ( उघाडोने द्वार ) गांवु*
             *(अेक व्यक्तिना कंठे)*
उघाडो ने द्वार विनंती करुं हुं वारंवार
      हे जी प्रभु उघाडोने द्वारजी.....
माया मिटावी मुज घरेथी हुं आव्यो तारे द्वार ...
मनडुं आतुर छे मळवाने माटे नोधाराना आधार ...
प्रभुजी उघाडोने द्वारजी.(1)
आवे पोताने आंगणे अेनो , कांईक करवो जोई सतकार ,
केम विवेकी विलंब करो छो रुक्ष्मणिना भडथार ,
प्रभुजी उघाडोने द्वारजी.(2)
मारे नथी कांई मागवुं प्रभु मने दियोने दिदारजी ,
दातार थई ने केम डरो छो क्षत्रीय कुळ शणगार ,
प्रभुजी उघाडोने द्वारजी.(3)
हजारो भक्तोना काम  कर्या छे.अेनो शुं करुं विस्तार जी
आज ईशरने दरशन आपी वरतावो जय जय कार ,
प्रभुजी उघाडोने द्वारजी.(4)
*रचियता :- महात्मा ईशरदास जी*
*टाईप.   :- http://charantv.blogspot.com*
                वंदे सोनल मातरम्

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