.

"जय माताजी मारा आ ब्लॉगमां आपणु स्वागत छे मुलाक़ात बदल आपनो आभार "
आ ब्लोगमां चारणी साहित्यने लगती माहिती मळी रहे ते माटे नानकडो प्रयास करेल छे.

Sponsored Ads

Sponsored Ads

.

Notice Board


Sponsored Ads

चारण कवि श्री तखतदान रोहडीयानी रचनाओ लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
चारण कवि श्री तखतदान रोहडीयानी रचनाओ लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

8 जनवरी 2017

लळी लळी पाय लागु रचना :- चारणकविश्री तखतदान रोहडीया (दान अलगारी)

लळी लळी पाय लागु
रचना :- चारणकविश्री तखतदान रोहडीया (दान अलगारी)
लळी लळी पाय लागु दयाळी दया मागु, रे मोगल माडी...(टेक)
तु चौद भुवनमां रेती, उडळ मा आभ लेती,
छोरूने खम्मा केती, रे मोगल माडी
           लळी लळी पाय लागु....(टेक)
डाढाळी देव ऐवी, सुर नाग नर सेवी,
तने केवडीक केवी, रे मोगल माडी
           लळी लळी पाय लागु....(टेक)
घांघणीया घरे आवी, तात देवसुर दिपावी,
वंश चारणे वधावी, रे मोगल माडी
           लळी लळी पाय लागु....(टेक)
तुं छो तरणने तारण, वळी वंशनी वधारण,
चंडीका खरी चारण, रे मोगल माडी
           लळी लळी पाय लागु....(टेक)
त्रिशुळ लईने हाथे, सहु जोगणीनी साथे,
भेळीयो ओढी माथे, रे मोगल माडी
           लळी लळी पाय लागु....(टेक)
धाबळीयाळी धाऊ, सांभळ अमाणी रावुं,
केताक गुण गावुं, रे मोगल माडी
           लळी लळी पाय लागु....(टेक)
दारीद दुःख दळजे, प्रघळा बिरदने पळजे,
वारु करेवा वळजे, रे मोगल माडी
           लळी लळी पाय लागु....(टेक)
गांडी आ देव गरजी, करू हाथ जोडी अरजी,
माडीनी जेवी मरजी, रे मोगल माडी
           लळी लळी पाय लागु....(टेक)
"दान अलगारी" रंग दे छे, भामीणां तोळा ले छे,
तुने उदो उदो के छे, रे मोगल माडी
           लळी लळी पाय लागु....(टेक)
रचना :- चारणकविश्री तखतदान रोहडीया (दान अलगारी)
टाईप ::- www.charanisahity.in
संदर्भ :- चरज थी अरज भाग-1 पाना नं-78 पर थी

खोडल आई खबरु लेजे रचना :- चारणकविश्री तखतदान रोहडीया (दान अलगारी)

खोडल आई खबरु लेजे
रचना :- चारणकविश्री तखतदान रोहडीया (दान अलगारी)
खोडल आई खबरु लेजे, लोबडीयाळी लाभ तुं देजे रे (2)
         खोडल आई खबरु लेजे...(टेक)
माडी तारू बिरद मोटु, जगत तो साव छे खोटु (2)
कळी दळी नाखतो जोटु रे, खोडल आई खबरु लेजे रे
          खोडल आई खबरु लेजे...(टेक)
गुनाहोय बाळना माडी, अवगण करे छोरू अनाडी (2)
पण नगुणी होय नई माडी रे, खोडल आई खबरु लेजे रे
         खोडल आई खबरु लेजे...(टेक)
दैत्योने डारती आवे, पोताना ने पाळती आवे (2)
पातक परजाळती आवे रे, खोडल आई खबरु लेजे रे
         खोडल आई खबरु लेजे...(टेक)
त्रिशूळा तोळती हाथे, सातेय बेनडीयु साथे (2)
भलो ओढी भेळीयो माथे रे, खोडल आई खबरु लेजे रे
         खोडल आई खबरु लेजे...(टेक)
अमी वरसावती आंखे, नवे खंड नजरु नाखे (2)
विरवानी आबरु राखे रे, खोडल आई खबरु लेजे रे
         खोडल आई खबरु लेजे...(टेक)
मामडीयानी ऐटलुं मागुं, जपु तनो पोढता जागु (2)
भेळीयाळी दूर नो भागु रे, खोडल आई खबरु लेजे रे
         खोडल आई खबरु लेजे...(टेक)
माडी तारा नामनी माया, छोरुडाने करती छांया (2)
"अलगारी" ऐ गुणला गाया रे, खोडल आई खबरु लेजे रे
         खोडल आई खबरु लेजे...(टेक)
रचना :- चारणकविश्री तखतदान रोहडीया (दान अलगारी)
टाईप ::- www.charanisahity.in
संदर्भ :- चरज थी अरज भाग-1 पाना नं-79 अने 80 पर थी

पीठड मां ना परचा केवा कर्ता :- चारण कविश्री तखतदान रोहडीया (दान अलगारी)

.      *पीठड मां ना परचा केवा*
कर्ता :- चारण कविश्री तखतदान रोहडीया (दान अलगारी)
पीठडमाना परचा केवा, जगतने जाणवा जेवा (टेक)
लोबडीयाळनी लाकडी आजे, पाटरामा ऐ पुजाय (2)
ऐ.... आदिथी चडे छे चापडा ऐमां, ठीक कौतक घणु थाय
आजु लग साच छे ऐवा, पीठडमाना परचा केवा
          पीठडमाना परचा केवा.....(टेक)
जबरा झांखीने जेर कर्या, ऐवी आगवी वातु अनेक (2)
ऐ... ऐवो भरोसो थाय अटाणे, टाणे राखे कोई टेक
वारे आवे खबरु लेवा, पीठडमाना परचा केवा
           पीठडमाना परचा केवा.....(टेक)
वाणे चडेलाने वावडो वेडे के, भूले दिशानुं भान (2)
ऐ...पोकार करे तेदि' मात पीठडने, सांभळे सर्वे कान
भेरे आवे भीड भंगेवा, पीठडमाना परचा केवा
          पीठडमाना परचा केवा...(टेक)
भेरे रीये नित भेळीयावाळी, वेणे करे नित वात (2)
ऐ... अकलमां कोईने उतरे नई ऐवी, छोरूडाने साक्षात
माडी आपे मीठडा लेवा, पीठडमाना परचा केवा
          पीठडमाना परचा केवा...(टेक)
खलक आखुं तारा खोळले खेले, अलख अविनाशी अंब (2)
ऐ... "दान अलगारी" कये देव दयाळी, बाटीयाणी जगदंब
छोरू आव्या शरणे रेवा, पीठडमाना परचा केवा
          पीठडमाना परचा केवा...(टेक)
कर्ता :- चारण कविश्री तखतदान रोहडीया (दान अलगारी)
टाईप ::- www.charanisahity.in
संदर्भ :- चरज थी अरज भाग-4 पाना नं-31 पर थी

7 जनवरी 2017

दातारेश्र्वर देव भोळीया रचयिता :- चारण कवि श्री तखतदान रोहडीया- " दान अलगारी "


अलगारी ने अंजळी, आज, देतां रडीये दान
जेह सद पाम्या जोगडा, मलक हैयामां मान


 लाखेंणा कवि श्री दान अलगारी नी दिव्य चेतना ने सत सत नमन 🙏🏼
भगवान तेमना आत्मा ने शांती आपे
ॐ शांती


॥दातारेश्र्वर देव भोळीया ॥
                      ॥ आरति ॥
दातारेश्वर देव भोळीया, करू तमारी सेव.
जटामा वसे मात गंगेव, पतितने पावन करती.
पारवतिना पति, खोळले रमे गुणनो पति.
जाप नित जपे जतीने सती, आरति रोज उतरती...१


काळ तणा छो काळ, कंठमा जुली रह्या कंकाळ.
अंग पर रमे विखधर व्याल, मणीधर फणीयल काळा.
गरल धरण निलकंठ, धतुरा भंग त्रप्त आकंठ.
निशाचर भूत प्रेत नाचंत, भयंकर भूरी लटाळा...२


निर्मळ जलरी धार, धरे कोउ बिलीपत्र उपहार.
शिवायं नम :करे उच्चार , ध्यान शंकररो धारे.
धर्म अर्थ ने काम, मोक्ष सह चारु फल दे साम.
सदाशिव हाम्म दाम ने ठाम, समर्पे सेवक द्वारे...३


स्थान भूमि समशान, धूर्जटी धरे अलख रो ध्यान.
दिगम्बर महादेव भगवान, अजन्मा अकळ अनुपम.
देव देत्यने नाग, मानवी कोई न पामे ताग.
अजरवर थारां गुण अथाग, समरीये शंभू दम दम...४


जटा जूटमें चन्द्र, त्रिलोचन अगन जाळ परचंड .
त्रिशूळ कर डमरू डाक बजंत, वास कैलाश निवासी.
भवहर भवरा नाथ, साधरा साध वडा समराथ.
अघोहर अनाथ हंदा नाथ, टाळतल भवरी फांसी...५


चवे चउद हि लोक, पुकारत नाम मिटे सब शोक.
चरित वंचाय जगत्त रे चोक, के जय हो पिनाकपाणी.
" अलगारी "उछरंग, धरी गुण गाय करी मन चंग.
राखीये नाथ त्रिलोकी रंग, वदत नित विमलवाणी...६


रचयिता :-
चारण कवि श्री तखतदान रोहडीया-  " दान अलगारी "
सौजन्य:-     संकलन:-
कवि श्री प्रवीणभा मधुडा     
Mo 09510995109  , 097239 38056            
मोरारदान सुरताणीया -  9979713765

Sponsored Ads

ADVT

ADVT