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"जय माताजी मारा आ ब्लॉगमां आपणु स्वागत छे मुलाक़ात बदल आपनो आभार "
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29 मार्च 2017

चैत्री बीज ऐटले आई श्री सिंहमोई (जीवणी) माताजीनो प्रागट्य दिन

चैत्री बीज ऐटले आई श्री सिंहमोई (जीवणी) माताजीनो प्रागट्य दिन 


जय जीवणी मा
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आई जीवणीना पितानुं नाम गढवी धानोभाइ नैया. आईनां मानुं नाम बायांबाई.
आईनां माताना पितानुं नाम भायोभाइ जामंग. आइना पितानु मूळ वतन कच्छ. कच्छमां वारं वार दुष्काळ पडतां तेओ पोतानां माल ढोर हांकीने बीजा चारणो साथे सौराष्टमां आवेला अने खड - पाणीनी सगवड होय त्यां नेश बांधी ने रहेता. सं  . १७८८ आसपास तेओ सरधारनी सीममां खड-पाणीनी सारी सगवड जोईने नेश बांधीने रहेवा आवेला. आई जीवणीनी उम्मर ते वखते १७ वरस लगभगनी हती आई बहु स्वरूपवान, शरीरे खडतल अने दढ मनोबळवाळां हतां. जगदंबा ना एक निष्ठ उपासक, तप-तेजवंता, चारण वटवाळां, दैवी प्रतिभाथी विभूषित हतां एमने अंगे अंग थी दिव्य रूपनी छटा प्रसरती. एमना मुख - मंडळमांथी जाणे सूर्य नारायणनां किरणो प्रतिबिबित थतां माता पिता कुळ-कुटुब अने अन्य सौ एमने जगदंबानो अवतार मानतां. नानी वयथी ज एमने आई कहीने सबोधतां. तेओ घणी वार पितानी साथे घी वेचवा तथा माल ढोर माटे खाण- दाण कपासीया खरीदवा सरघार जतां. एमनु दिव्य तेजथी दीपतुं स्वरूप जोई सौ लोको तेमने विनयपूर्वक हाथ जोडी वंदन करतां. 'आइ जीवणी जगदंबा स्वरूप छे, ' एवी तेमनी कीर्ति धीरे धीरे सर्वत्र प्रसरवा लागी, एटले आसपासनां गामोमांथी लोको तेमनां दर्शन माटे धाना गढवीना नेशे आववा लाग्यां. आइ जीवणी तथा तेमनां कुटुबीजनो ए दर्शनार्थीओ नो खूब सत्कार करतां, जमाडतां. थोडा वखतमां जन-समाजमां एमनी दिव्यतानी अने एमना परचाओनी वातोनुं वातावरण जामवा लाग्युं.
संवत १७८९ लगभग ज्यारे आइ जीवणीनी उम्मर अढार वर्षनी हती त्यारनी आ वात छे. ए वखते राजकोटना मुसलमान शासन तरफथी सरधारना वहीवटकार तरीके बाकरखान नामनो एक शेख हकुमत चलावतो हतो. जुवान वयनो ए शेख घणो विषय-लंपट हीन प्रकृतिनो, रूप यौवननो रसियो हतो. विषय सेवनने ए स्वर्ग सुख मानतो. प्रजानी अनेक बहेन- दीकरीओ कुळ-वधूओनी लाजमर्यादा एणे लोपेली अनेक बाइओ बहेनो ए कारणे आपधात करी मरी गयेली. एना ए जुल्मथी प्रजा त्रासी गयेली. दरमियान केटलांक त्रासितोनी हकीकतो-फरियादो आइ जीवणी पासे पण पहोंचेली. ए जुल्मोनी वातो सांभळीने आइनो आत्मा कळकळी ऊठेलो. एमणे फरियादीओने आश्र्वासन आपेलुं के " ए दुष्टना पापनो घडो हवे भराइ चूकयो छे. जगदंबा थोडा वखतमां ज तमारां दु:खनुं निवारण करशे.
आ विषम परिस्थितिमां पोतानुं शुं कर्तव्य होइशके ?" ए विचार तेमना मन- हृदयमां रमवा लाग्यो. एमणे ऊंडु आत्ममंथन आदर्युं. अने ए मनोमंथनने अंते जनसमाजना कल्याण माटे, धर्म-मर्यादाना पालन माटे, गमे ते भोगे- जरूर लागे तो पोतानुं आत्म- बलिदान आपीने पण शेख बाकरना जुल्मनो-एनी अनीतिनो अंत आणवानो दढ निर्णय कर्यो. बाद एक दिवस पोते पितानी साथे खरीदी करवा सरधार गएलां. त्यां घीना वेपारी साथे हिसाबनी समजावट चालती हती त्यारे शेख बाकरनो एक हजुरियो आइने जोई गयो. तेनी दुष्ट नजर तथा शंकास्पद हिलचाल ए वेपारीना जोवामां आवतां तेना पेटमां फाळ पडी. ए वेपारीने आइ तरफ खूब पूज्य भाव हतो सर्वे चारणोने ए माननी दष्टिथी जोतो. एटले तेणे धाना गढवीने एक बाजु बालावीने बधी वात समजावी अने चेतवणी आपी के, हवेथी कोइ वखत आइ जीवणीने सरधारमां लावशो नहि. एटले धाना गढवी बीजा काम पडतां मूकीने उतावळ करीने आइ साथे पोताने नेश जता रह्या. त्यां आइए पिताने पूछयुं के बापु ! ए घीवाळा तमने खानगीमां शु कहेता हता  पिताए उतर आप्यो के बेटा ! एमां तमारे जाणवा जेवुं कांइ नथी " एटले आइ बोल्यां के ना बापु ! तमे न कहो तो पण हु बधुं समजी गइ छुं. ए तमने शेखथी चेतता रहेवानुं कहेता हता. पण बापु ! तमे कांइ चिंता करशो नहि. ए शेखना दिवस हवे पूरा थया छे. मा जगदंबाए एनो फेंसलो करवानुं नककी कर्यु छे. अने एकाम मने सोंप्यु छे. ए सांभळीने धाना गढवी बोल्या के बेटा आई ! तारी वात साची, पण सत्ता सामे आपणे शुं करी शकीए आपणे तो जेम बने तेम अहिंथी जल्दी ऊचाळा भरीने जता रहेवुं छे;  कारण के आमां तो आबरूनो सवाल अने जाननुं जोखम. एटले एवुं जोखम आपणे खेडवानु न होय. ए सांभळीने आइ नी आखोमांथी तेज वरस्या अने मेघ गंभीर स्वरथी गाजती आत्माना ऊडाणनी एमनी वाणी प्रगटी के बापु ! धर्म पर धाड आवती होय, बाइओ बहेनोनां शियळ लूटाता होय, त्यारे भयथी ऊचाळा भरीए, पारोठनां पगलां भरीए तो पछी चारण धर्म कयां रहेशे चारणने आइने वळी भय केवो ने जोखम केवु अने आवे टाणे पण मोत न मांगीए जोखम न उठाविए तो पछी नव लाख लोबडी वाळीउनां वारस पण कोण कहेशे बापु ! ए अधर्मीने ऊखेडी नाखवानी माताजीए मने आञा करी छे अने माताजीनी ए आञानुं पालन करवा माटे मारा जीवननुं बलिदान आपवानी पण में प्रतिक्षा करी छे अने ए प्रतिक्षा आवती काले पूरी थशे धाना गढवी तो आईनुं ए समयनुं दिव्य स्वरूप जोइने चारणत्वना गौरवथी भरपूर एमनी अभय वाणी सांभळीने दिग्मूढ थई गया. माता तथा सौ कुटुबीजनो पण प्रभावित थइ स्तब्ध थइ गयां. माता पिताने पोतानां पुत्री आइ जीवणीमां जग आखाने वीटी वळेली महा विराट शक्ति जगदंबानां दर्शन थयां सौ आइना. पगमां पडी गयां अने धाना गढवी पाघडी ऊतारी आइने चरणे मूकी बे हाथ जोडीने बोल्या के मा जगदंबा !! अमे तमने ओळख्या नोता ए अमारू अञान छे . हवे आपनी जे इच्छा ते मारी- अमारी सौनी इच्छा. आ वातचीत बाद आइ पद्मासन वाळी ध्यानमां बेठां-समाधिस्थ थयां.         
धाना गढवीना नेशमां ज्यारे आइ पोताना पिता साथे उपर्युकत वातमां गूंथाएलां हतां, त्यारे बीजी बाजु सरधारमां आइ अंगे पूरी जाणकारी मेळवीने बाकरशेखनो हजूरीयो तेनी मेडीए पहोंचेलो अने बाकर शेखने कहेतो हतो के " हजूर ! आज मैंने जन्नतकी हुर सें भी ज्यादा खूबसूरत औरत देखी, जिसकी पूरी तारीफ जबानसे नहीं हो सकती. उसका गुलाब जैसा मुलायम गोरा गोरा गुलबदन खिले हुए कमलोंसी बडी बडी रसीली अंखे, पतलीसी कमर, पूनम  के चांद जैसा सुहावना गोल मुखडा. क्या कहुं हजुर ! खूब सूरतीका फवाराही समझ लीजिए. बाकर शेखे तेने वच्चेथी ज एटकावीने कह्यु के बहुत खूब बहुत अच्छा, मगर वह कौन है सो तो कहता ही नहीं, हजूरियाए जवाब आप्यो के हजूर ! हमारे यह सरधारकी हदमें चारन लोगोंका एक नेश है--पडाव है.. वहांकी एक जवान कंवारी औरत हररोज यहां सरधारमें घी बेचने और खरीदी करने के लिये आती है. सारे जहांका नूर खुदा तालाने उसके बदनमें भर दिया है. अगर वो आपके हरम में आ जाय तो बस उजाला ही उजाला छा जायगा एटले बाकर शेखे कह्युं के ऐसा ! तो देखो कल तुम दश बारह आदमी तैयार रहना और- जब वह नूरे- जहां आये तब उसे यहां मेरे पास बुला लाना. कहना कि शेख साहेबको घी की जरूरत है इस लिये रूबरू बात करने के लिये बुलाते है हजूरियाए उत्तरमां कह्यु के " मालिक ! हम लोग तो तैयार रहेगे मगर लोग कहते हैं मानते भी है कि वह देवी है- माताजी हुै और करामात वाली है '' बाकर शेखे उत्तर आप्यो के  अरे हिंदु लोग तो मूरख होते हैं. कैसी करामात ! और कौन देवी !-माताजी ! ये तो सब वहम की बातें है. जो हो सो हो. आखिर है तो औरत ना  इस लिये जब वह आये तब यहां बुला लाना. और अगर न आये तो पकडकर ले आना. समझा हजूरीयो बोल्यो " हां हजुर ! नहि आयेगी तो पकडकर ले आयेंगे "
बीजे दिवसे सवारना बीजा पहोरनी शरूआतमां स्नान ध्यान पूजाथी निवृत्त थइने आई जीवणीए सरधार तरफ प्रयाण कर्यु.  धाना बापु पण तेमनी साथेज हता. उपरांत नेशमां सर्वने आ बाबतनी जाण थइ गएली, एटले नेशनां सर्वे सशक्त बाइओ तथा सर्वे भाइओ पण चारणवटनी, चारणी प्रतिष्ठानी रक्षा करवा माटे, पोतानां इष्ट जगदंबानां मान मर्यादानो भंग थाय ते पहेलां मरी मटवाना निर्णय साथे आईनी पाछळ चालवा लाग्यां. आईए तेमने सूचना आपीके तमारे कोइए कंइ उतावळु पगलुं भरवानुं नथी ए शेखनी साथेनो हिसाब हु समजी लइश. मारा तरफथी सूचन थाय तोज तमारे आगळ वधवु. नहि तो तमारे साक्षी बनीने जोया करवानुं छे. जगदंबा एनुं पोतानु कार्य पोते ज करशे सौए आइनी आग्या माथे चडावी. आइ वगेरे सरधारमां पंहोच्यां त्यां शेखनो हजुरियो तेना दशेक साथी ओ साथे राह जोतो ऊभो हतो. तेणे दुरथी आइने आवतां जोयां एटले ते दोडीने बाकर शेख पासे पहोच्यो एने गामनी वच्चे दरबारगढनी तेनी मेडीना बजारना मुख्य रस्ता परना गोखमां शेखने तेडी लाव्यो अने बजारमां दूर आवी रहेलां आइ तरफ आंगळी चीधीने बोल्यो के देखिए हजुर ! वह नूरेजहां--जन्ननवनीत  की रोशनी आरही है. आइनु दिव्य अलौकिक रूप, मृगपति जेवी गौरव भरी चाल अने तेज तेजना  अंबारवाळी दिव्य प्रतिभा जोइने बाकर शेख छक्क थइ गयो. पण  विनाश काळे विपरीत बुद्धि ए न्याये तेनां अज्ञान पडळ ऊघडया नहि. कामुकताना कादवमां खूंचेला ए पापात्माए हुकम कर्यो के जाओ - जाओ, जल्दी जाओ और वह नूरे महताब - जन्नतकी परी को   यहां बुला लाओ.
आज्ञा थतां तो ए हजूरियो दोडयो अने पोताना साथीदारो साथे आईनी पासे पहोंच्यो. अने आइने कह्युं के आपको शेख साहब बुला रहे है तो चलो, हमारे साथ चलो. (आइनी साथे बाकर शेखना माणसो वातो करे छे ते जाणीने गामलोको भेळा थवा लाग्या. परिस्थितिनो ख्याल करी शुं करवु तेनी वातो करवा लाग्या. ) दरमियान आइए हजूरियाने उत्तर आप्यो के  हुं  न आवुं तो तमे शु करशो  एटले हजूरियाए कह्युं के न आओगी तो पकड कर ले जाय गे एटले आइ तिरस्कार भर्या गंभीर स्वरे बोल्यां. ए…म ! पकडीने लइ जशो ? कोण पकडनारू छे एम कहीने आइए बन्ने हाथ मसळ्या, घस्या, त्यां तो आइ जीवणीना अंग प्रत्यगं थी अग्निना तणखा झरवा लाग्या. अने आइए विकराळ रूप धारण कर्यु. ते जोइने पकडवा आवेला भाग्या. त्यां आइए गगन गजवतो पडकार कर्यो कयां छे तमारो बाकर शेख कयां छे ए विषय लंपट जुल्मगार मेडी उपर एम कहेतां कहेतां पोते शेखनी माढ मेडीना प्रांगणमां दाखल थयां अने धम धम धम दादरो चडवा लागयां . ऊपर जइने जुए छे तो बाकर शेख जरियानी रेशमी कपडां पहेरी, हीरामोतीना हारथी शणगाराइने, अत्तर तेल फुलेलमां गरकाब थइने पलंग परना दोढ हाथना रेशमी गादला पर तकीयाने अढेलीने, मूछोने वळ देतो पडयो हतो, ते दादराना धमधमाटने सांभळीने ऊभो थइने आइने भेटवानी इच्छाथी सामो आव्यो;
पण आइनुं विकराळ रूप जोइने ते खचकाणो. त्यां आइए पडकार कर्यो बाकर शेख ! तारे रूप माणवुं छे आव हाल्यो आव. चारण आइनुं  रूप केवुं होय ते जोइ ले. एम कहेतां तो आइए नरसिंह रूप धारण कर्यु. अने भयंकर गर्जना करी बाकर शेख पर झपट करी. बाकर भागी नीकळवानो प्रयत्न करवा गयो. त्यां हाथनो झपाटो लगावीने नरसिंह बनेलां आइए तेने पाडी दीधो. ते उभो थवा गयो त्यां बीजी हाथल (पंजो) तेना माथा पर पडी अने ते पछडायो. आइ तेना पर चडी बेठां बाकर शेखना मोतीया मरी गया. तेना होंश हवास ऊडी गया. मोतना मुखमांथी छूटवानां फांफां मार्या.पण बधु व्यर्थ गयु अने नरसिंह रूप बनेलां ए सिहमुखी आइ जीवणीए तेनी छाती चीरी नाखी, तेने यम--धाममां मोकली दीधो. ऊपाडीने नीचे रस्ता पर फेंकयो. अने फरीने गगन गजावती डणक दीधी. बाकरनां महेल मेडी माळियां ध्रुजी उठयां अने आइ सिंहमोइ जीवणी माढ मेडीएथी गर्जना करतां करतां नीचे ऊतर्या एने बाकरनु लश्कर तेनी शीरबंधी, तेनी बीबीओ भय - आतंक - आश्र्वर्यथी विमूढ बनी दोडी आव्यां आ बाजु शहेरनी सर्व हिंदु प्रजा दोडी आवी.  गामना आगेवानो, महाजनो सौ भेळा थइ गया. सौ प्रथम धानो गढवी अने चारणो नृसिंह बनेल आइ ने पगे लाग्या ऐटले बाकर ना बीबी बच्चा तेना लश्कर वाळापण सौ पगे लाग्या जय माताजी
जय माताजी नो जयघोष थवा लाग्यो
सौ हाथ जोडी पगे लागवा मांडया. पण बाळको आइनु सिंह स्वरूप जोइने गभरातां हतां, एटले आइ जीवणीए पोतानी लीला संकेली लीधी अने पूर्ववत मनुष्य शरीर धारण करीने बन्ने हाथ ऊंचा करी सौने आशीर्वाद आप्या अने पछी बोल्यां बाकर शेखने एनां पापोनी सजा थइछे. प्रजाना दु:खना निवारण माटे मारे तेने संहारवो पधयो छे. अने मारूं जीवन कर्तव्य, तमने एना त्रासमांथी मुकत करवानुं कर्तव्य आजे पूरूं थयुं छे. माताजी- जगदंबा मने पोतानी पासे बोलावी रह्यां छे. एटले हुं तमारी सौनी माता पिता तथा कुटुंबी-जनोनी, सौ चारणोनी अने सरधारनी प्रजानी हवे सदाने माटे विदाय लइश. मारे सती थवुं छे. तेथी कांइ दिलगीर थवानुं नथी. हुं आ शरीर छोडीने आआ विश्र्वमां तमारामां, सौमां व्यापी जईश,नानु खोळियु छोडीने ब्रह्मांडोने आवरतां जग जजननीना स्वरूप साथे एक थइश एटले मांरूं शरीर नहि होय. तो पण हु तमारी साथे ज रहीश. माटे कोइए दु:ख लगाडवानुं नथी आंसू पाडवानां नथी अस्तु. हवे तुरत ज चिता तैयार करावो आटलु बोली आइ पितानां कुटु बीजनो माता पिता सौने यथा योग्य रीते मळ्यां .
दरमिआन  सरधारनी दक्षिण बाजुए हाले ज्यां आइनुं स्थानक छे त्यां चंदन, शभी, पीपळ, ऊबरो वड वगेरे पवित्र वृक्षोनां काष्ठोनी चिता रचाणी, नाळियेर, टोपराथी तेने सजाववामां आवी अने ते पर घीनुं सिंचन करवामां आव्युं. आ बाजु आइए सोळे शणगार सज्या हाथमां त्रिशूळ धारण कर्यु शरणाइओ ए सिंधूडाना स्वरो रेलावी वातावरणने भरी दीधुं. त्रांबाळुं ढोल गर्जवा लाग्या. सुहागणो, कुमारिकाओ मंगळ गीतो गावा लागी. चारण नेशनी बाळाओ- बहेनो चरजो गावा लागी. चारणो चाडाउ चरजो अने चंदो बोलवा लाग्या. धूपोना धमरोळथी आकाश छवायुं. अबील-गुलालनी एली मची. अने आइ जीवणी मोटा समारोह साथे चितास्थाने पधार्यां. चितानी विधिवत पूजा करी. तेनी प्रदक्षिणा करी, गंगाजळनो तेना पर छंटकाव कर्यो पोते सूर्य नारायणने विश्र्वरूप आकाशंने, वायुने, अग्निने, जळने, पृथ्वीने हाथ जोडी नमस्कार कर्या. जनमेदनी तरफ प्रथम हाथ जोडया. पछी हाथ ऊंचा करी आशीर्वाद आप्या. अने जय जगदंबा जय जगदंबा नी धुन गर्जी उठी. आइए चिता पर आरोहण कर्यु. तेना पर पञासन वाळी बिराजमान थयां. जगदंबानु स्मरण कर्यु आहवान कर्यु. हाथ मसळ्या तेमांथी अग्नि शिखाओ प्रगटी ऊठी. फरीने धृत धाराओनुं सिंचन थयुं अने जय जगदंबा जय जगदंबा ना स्वरोनी मंगळ धून साथे जगदंबा आई जीवणीना भौतिक शरीरने अग्नि जवाळाओए लपेटी लीधुं..... बोलीये जीवणी मातकी जय
सरधारना किल्लानी दक्षिण बाजुए राजकोट-भावनगरना धोरी मार्गने कांठे ए स्थान पर आइ सिंहमोइ-आइ जीवणीनी देरी छे.
आइनी ए देरी जीण थइ गएली. जेतपुर पासेना गाम लूणागरीना गढवी श्री देवराजभाइ नैयाए सारी जहेमत ऊठावी फंड फाळो करीने ए देरीनो हाले जीर्णोद्धार कराव्यो छे

(मातृ दशॅन --श्री पींगलसिंह जी पायक)
टाइप :- सामरा पी गढवी
मोरारदान जी सुरताणीया

(गुणीजनो  आइ श्री जीवणी मा नी आ कथा  पू.पिंगलसिंह
पायक बापु लिखीत ग्रंथ मातृ दशॅन  मांथी टाइप करी अंही
मुंकी छे  टाइप मां काळजी राखी छे छतां कोइ भूल रही जवा पामी होय तो हुं आपनी क्षमा मांगु छु  भगवती नी कृपा आपणा पर सदैव बनी रहै एवी कामना भगवती नी आ कथा मांथी प्रेरणा लइ आपणु जीवन अने व्यवहार एवा पवित्र बनावीऐ के भगवती ने फरी आंगणे अवतरवा नी इच्छा थाय  ..
आ तके आप सौ नो आभार मानु छ
जे आ मारा नाना प्रयत्न ने वखाणी  ने पीठबळ  पुरु पाडयु
सौ ने झाझा जय माताजी   

सामळाभाइ गढवी
टाइप :- पोस्ट :- सामरा पी गढवी
मो :- 9925548224
मोरारदान जी सुरताणीया
मो :- 9979713765

कोपी पेस्ट करवानी छुट छे पण सुधारा वधारा करवा नही
जय माताजी

चारण आईओनो ईतिहास अप्राप्य पुस्तक मातृदर्शन मांथी टाईप करीने बधा चारणो सुधी पहोचडवा बदल मोरारदानभाई (चारण हंस) मोरझर कच्छ, शामराभाई अने , कल्याणभाई  मोटी खाखर कच्छ नो खूब खूब आभार

पोस्ट बाय :- www.charanisahity.in
        वंदे सोनल मातरम् 

28 मार्च 2017

आईश्री सोनल विसामो अमदावाद नी वात - कविश्री जीलुभाई सील्गा (चकमक)

श्री समस्त अमदावाद शहेर गढवी ( चारण ) सेवा समाज संस्थाना ' जन सेवा ऐज प्रभु सेवा '' उदेश्यथी चालता '' सोनल विसामा '' विसामानी सेवाकीय प्रवृति निहाळवानो कवि चकमकने मळेलो ल्हावो..!

अमदावाद शहेरनुं न्यु सिविल होस्पिटल ऐशियाभरनुं मोटामां मोटुं अने अघतन साघन सामग्रीथी  सज्ज होस्पिटल छे.

आ होस्पिटलमां गुजरातभरमांथी तेमज राजस्थान, मघ्यप्रदेशमांथी पण चारण परिवारो पोताना आप्तजनोने लईने सारवार हेतु आवे छे. त्यारे सारवार दरम्यान बिमार व्यकित साथे आवेल सगा-स्नेहीऐ कयां रोकावुं ते समस्या मा सोनल कृपाथी हल थई गई छे.

सोनल विसामा माटे नवी केन्सर होस्पिटल सामे मेईन रोडनी बिलकुल नजीक त्रण माळनुं मकान हाल भाडा पेटे राखेलुं छे तेमां ददीॅना सगा-वहालाने रहेवा-जमवानी निशुल्क खरा ह्रदयना भावथी आपवामां आवती सेवा निहाळी हुं भावविभोर थई त्यां हाजर ददीॅना सगाओ कोई सुरतथी कोई अमरेलीथी, कोई मघ्यप्रदेशथी कोई राजस्थानथी ऐक कलाक जेटलो समय तेमनी साथे विताव्यो.

ददीॅओना मुख पर सेवाना लाभनो आत्मसंतोष नजरो नजर तेमनी भाषामां जोवा मळतो हतो तथा तेओ पोतानुं पण योगदान आपवा उत्सुक चारणो में जोया. मारी नजरे ऐक ददीॅना सगाऐ 2100 रुपिया रोकडा आपी योगदान नोघाव्युं. कोईनी पासे पैसा मागवामां न आवता होवा छतां स्वेच्छाऐ चारणो पोतानुं योगदान आपे छे.

बीजु किरिटभाई नोंघुनी निस्वाथॅ सेवा दाद मागी ले तेवी छे.

मारा जाणवा मुजब टुंक समयमां नवुं मकान वेचातुं राख्युं छे तेनो दस्तावेज थई जाय ऐटले तेने पण सुख सुविघाथी सज्ज बनावी समाज सेवामां उपयोगमां लेवा समाज सेवको उत्सुक छे.

आनाथी रुडुं बीजु शुं होई शके मा सोनल सौने शकित आपी आवा रुडा समाज उपयोगी कायोॅ करवानी प्रेरणा अने आत्मबळ आपे ऐवी अभ्यथॅना साथे कवि चकमक प्राथना करे छे.

जय माताजी.

कवि चकमक.

सरधार नी सिंहमोय - रचियता : कवि श्री नागदेव


आवतीकाले आई श्री सिंहमोई ( जीवणी ) माताजीनो प्रागट्य दिवस छे ते निमिते आईमांनी नी चरज माणीयें  
माडी तारी लीली रे वाडी ने लीलो तारो नेहडो ,
लीलो राखजे चारण कुळनो नेह रे सरधारनी सींहमोय .......
आइ ते तो बाकरने मारयो रे भरी बजारमां

पहेला प्रणाम पृथ्वी मातने ,
पछी लीधा काई रवेशी रवराई ना नाम रे सरधारनी सींहमोय ........
आइ ते तो बाकरने मारयो रे भरी बजारमां

आपा रे धनराज हीमत तमे ना हारसो ,
वारे तारी सिंहण जीवणी आइनो साथ रे ,
सरधार नी सिंहमोय .......
आइ ते तो बाकरने मारयो रे भरी बजारमां

माडी तमे बादशाहना चीरीने कर्या बे भाग जो .,
माडी ( एने ). उंधो रे पछाडी ने थाप्यो पीर रे सरधार नी सिंहमोय .............
आइ ते तो बाकरने मारयो रे भरी बजारमां

माडी दीकरीयु नी लाजु राखवा वेली आवजे ,,
नागदेव कहे वीलंब ना करजे मोरी मात रे सरधार नी सिंहमोय ........
आइ ते तो बाकरने मारयो रे भरी बजारमां

रचियता  कवि श्री नागदेव गढवी

पोस्ट.  मनुदान गढवी

 भुल चुक क्षमा करजो  

|| रचना-गंगा मैया || || कर्ता मितेशदान गढ़वी(सिंहढाय्च) ||

*|| रचना- गंगामैया ||*
      *|| कर्ता -मितेशदान महेशदान गढ़वी(सिंहढाय्च) ||*
       *|| छंद - नाराच(चतुष्पदी) ||*

मोक्ष मुक्तदायनी सदाने शुद्ध   मायली,
करत तप्प जप्पवट शंकरे     समायली,
धरा धरे फेलायेली प्रचंड धार  धारिणी,
नमामी मात गंग तु जगतपाप जारिणी(1)

करे किल्लोल ढंग डोल दैव वर  सारिणी,
प्रसिद्ध वेण वायका पदम प्रथम धारिणी,
अप्रम ज्ञान शान ध्यान विमलवेद वारिणी,
नमामी मात गंग तु जगत पाप   जारिणी,(2)

पाताल काल चाल जाल लाल रंग पायके,
कपिल क्रोध काल संग भु परे तू जायके,
हरे जले हजार साठ पुत्र तु    बचावणी,
नमामी मात गंग तु जगत पाप जारिणी,(3)

वीरा जणी बणी घणी पवित्र पुत्र पारिणी,
सपूत भीष्म पोषिणी प्रकृत प्राण शोषिणी,
कथित मीत गंग हे खमा घणी खमा घणी,
नमामी मात गंग तु जगत पाप    जारिणी,(4)

*🙏-----मितेशदान(सिंहढाय्च)-----🙏*

*कवि मीत*

|| नवदुर्गा आराधना || || कर्ता मितेशदान गढ़वी(सिंहढाय्च) ||

*|| रचना ; नवदुर्गा आराधना ||*
           *|| छंद- नाराच ||*
     *||कर्ता - मितेशदान महेशदान गढ़वी(सिंहढाय्च) ||*

नमामी भद्रकालिका प्रचंड मात    शैलजा,
नमामी  सिंहवाहिनी  अखंड रूप आत्मजा
नमामी तेजवाहिनी  विशालनीय  ऊर्जितं,
नमामी  कालनाशिनी  सदाभवानी पूजितं,(1)

नमामी  चक्रधारिणी प्रकोप चंड  कोपितं,
नमामी  दैतमारिणी दुताय दंड    सोपितं,
नमामी  ब्रह्मचारिणी रूपाय शक्त शारदा,
नमामी  वेद वारिणी मयासुणोय आरदा,(2)

नमामी  लोकतारिणी सुधारणाय  सर्जितं,
नमामी  शंखधारिणी निनादनाद   गर्जितं,
नमामी चंद्रघंटिकाय  शीतसोम     सर्वदा,
नमामी  रौद्रचंडीका  निशायकाल गर्वदा,(3)

नमामी कुष्मकाण्डये ब्रह्मांड राज राजिनी
नमामी  दिव्यचेतना स्वरूप मान आंजिनि,
नमामी व्योमराजिनी भुराजिनि सरोजितं,
नमामी प्राणपोषणि प्रकांड भेद भावितं,(4)

नमामी स्कन्धमात जगख्यात रूप  दैवकं,
नमामी ज्ञान कर्मरूप अग्निज्वाल   सेवकं,
नमामी   सत्यशाम्भवी तपस्विनी वृधामता,
नमामी  सुर सुन्दरी   वीणाकरे   जयामता,(5)

नमामी शुद्धक्रोधिनि अज्ञात ज्ञान  भोगणी,
नमामी  कष्टदारनी सुखांकिताय    जोगणी,
नमामी  कात्ययायनी क्रोधरूप    कालिनी,
नमामी   नम्रदायनी जगत   हेत    शालिनी,(6)

नमामी    भुवमोचिनी     बलप्रदा   माहेश्वरी,
नमामी   भव्यरूपीणी     पवित्र     परमेश्वरी
नमामी    सर्ववाहिनी    जलोदरी भवाप्रीता,
नमामी   कालरात्रिया    भयंकरा प्रकोपिता,(7)

नमामी   प्रेमवर्षिणी महामया   शाकम्भरी,
नमामी   हेतहर्षिणी  महाकुशा    शूलंधरी,
नमामी   श्वेतआननी श्वेताम्बरा   सोहावनी,
नमामी   धेनुवाहिनी  सुखायकाज पावनी(8)

नमामी  सिद्धिनायका अमर्ष द्वेष जारीणी,
नमामी  शिवस्हायका   त्रयभुवन  तारिणी,
नमामी  *मीत* मंगला  गुणाय गान   गावतं,
नमामी  नवचंडिके  नमो नमस्तु   ध्यावतं,(9)

*🙏~~~~~मितेशदान(सिंहढाय्च)~~~~~🙏*

*कवि मीत*

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नेजाळी उजवे नोरता - कविश्री कागबापु

आजथी नवरात्रीनो पारंभ थाय छे.ते नीमीते कविश्री कागबापुनी एेक रचना माणीये


नेजाळी उजवे नोरता ...... सोनल उजवे नोरता.

माडी तारे नोरता उजववाना नीम ......नेजाळी उजवे नोरता

माडी आज पाटे पेला गणेश पधारीया ,
माडी एेना घुघरा घमक्या ने दाळदर भाग्या रे दु:ख सौ दाग्या ..... ......नेजाळी उजवे नोरता
माडी आज बीजे नवलाख लोबडीयुं टोळे वळे ,
आहळ ओपे अन्नपुंर्णा ने अंबा रे जोराळी जगदंबा ......नेजाळी उजवे नोरता
माडी तमे त्रीजे सिध्ध चोरासी तेडाव्या ,
साधु तमे वस्ती चेतावो भगवे वेश आपोने उपदेश ......नेजाळी उजवे नोरता
माडी तमे चोथे चारण वरण नोतर्या ,
माडी एेना काढ्या आळस अभिमान विध्याना दीधा दान ... ......नेजाळी उजवे नोरता
माडी तमे पांचमे बळभद्रने बोलावीया ,
माडी तमे कीधा हळधर केरा मान धोरीना सनमान ...... ......नेजाळी उजवे नोरता
माडी तमे छ्ठे भुत भैरवने भेगा कर्या ,
माडी एणे तजी बीजा खोळियानी आश वोळावया कैलाश ...... ......नेजाळी उजवे नोरता
माडी अेवा सातमे रती देव आवीया ,
माडी एेणे स्वीकार्या नारकीनो निवास पापयोनो व कुठवास ....... ......नेजाळी उजवे नोरता
माडी एेवा आठमे दानव सघळा आवीया ,
माडी एेतो जाडाने जोराळा ठीमे ठाम मदिराना लीधा जोम ......... ......नेजाळी उजवे नोरता
माडी तमे नोमे रे खांडाने खडग नोतर्या ,
माडी तमे उगार्या बकरीना मुंगा बाळ उतार्या जुना आळ........ ......नेजाळी उजवे नोरता
माडी तमे दशमे हवन होम आदर्यो ,
माडी एेमां होम्या ईर्षाने अभिमान अग्नाने मद्धपान ......... ......नेजाळी उजवे नोरता
माडी तुं जो जनमी न होत जगतमां जोगणी ,
तो हुं "काग" कोना गुण गात मारा पातक कयांथी ..... ....नेजाळी उजवे नोरता
रचयता :- कवि दुला भाया काग

सर्वे मित्रोने नवरात्री पर्वनी हार्दिक शुभकाना

26 मार्च 2017

चरज मेगेझीन मेळववानी माहिती

.                       *जय माताजी*

*चरज मेगेझीन मेळववानी माहिती*

प्रथम अंक नुं 31-12-2016 (सोनल बीज) ना रोज विमोचन करवामां आवेल बीजो अंक ऐप्रिल-2017 मां बहार पडशे

*"चरज" मेगेझीन त्रिमासिक छे. बे वर्षनुं लवाजम रु.499/ छे.*

*🔵लवाजम भरवानी माहिती*

*(1) ONLINE PAYMENT*

नाम :- NEOPULSE MEDIA PRIVATE LIMITED
बेंकनुं नाम :- SBI
CURRENT ACCOUNT NO.3309 6679 982 ,
IFS code SBI NO 0030142

ओनलाईन / चेक / केशथी पण करी शको छो.

(2) आप चेक पण मोकली शको छो

सरनामुं :-
चरज मेगेझीन
जी-1, समुद्र ऐनेकसी बिल्डीग,
सी.जी.रोड, गिरीश कोल्ड-ड्रिक्स चार रस्ता,
नवरंगपुरा, अमदावाद - 380009, गुजरात

(3) आ उपरांत आप डेबिट / क्रेडीटकार्ड के नेटबेन्किग द्वारा ईन्स्टामोजोनी लिंक https://imjo.in/BWXNs पर सिंगल क्लीकथी पण लवाजम भरी शको छो.

*🔵ख़ास नोंध*

(1) लवाजम भरेलना आधार नीचेना नंबर पर मोकलवानुं रहेशे.

(2)लवाजम भरी आपनु पुरु नाम, सरनामुं नीचे आपेल नंबर पर मोकलवानुं रहेशे.

*अन्य कोईपण माहिती माटे आप WhatsApp नंबर 9428412555 पर "चरज" नेटवर्क टीमनो संपर्क करी शको छो.*

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चारणी साहित्य ब्लॉगना अपडेट Whatsaap पर मेळववा माटे आ नंबर 9913051642 आपना गृपमां ऐड करो