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14 सितंबर 2015

|| मोगल रास सप्तक ||

आई श्री मोगल ने वंदना
हुं भगत बापु नो चाहक छुं ऐमनी कलम तो अदभुत हतीज पण छतां...ऐक स्थळे...मोगल ना पक्षपाती तरीके  कहुतो... पुज्य भगत बापु लखे छे के ..माडी तारा खांडा ने त्रिसुळ रण मां खणरेखण्या..माडी त्यांतो लड्यारे विना ना लशकर भाग्या रे .मछराळी मोगल...गांडी थई डणकी तुं डुंगर .....
तो सवाल ए के..जो लड्या विना लश्कर भागी ग्या होय तो मोगल शुंकाम डुंगर गाळाओ गुंजावे ऐवी डणकुं नाखे ??
पण  ऐम दुस्मनो लड्या विना भागी ग्या होय अने पोते पड्यो जस लई ले ऐ मोगल नई...मोगल तो ऐनी फोई चोरमां नी जेम लड़वा ना मनसुबे थी रणमां रास मांडी ने बेठी ती......अने ई रास केवो हतो.......
.                   ||मोगल  रास सप्तक  ||
.            रचना : जोगीदान गढवी (चडीया )
.                    छंद: मिश्र त्रोटक दुर्मिला
तरवारुंय तांणीय मेघ मंडाणीय घांघणीयाणीय घोर घुमे
फरड़डाट फरे रण फुद्दर मोगल भेळीयो व्रेमंड मांय भुमे
करे हाक बजे ज्यम डाक पडे कन धाक धधाक धधाक धमे
चडीया चरिताळीय कोप क्रोधाळीय रुप डाढाळीय रास रमे. || 01||
हुकळी उकळी हूहूकाट करे झूमती घुमती चख आग झरे
घडे डाट दीये हथ घाव रीपु शीर पीर वदी दुठ पाग परे
खणकी झणकी रणकी खड़गां डंणकी दल तुं अहरांण डमे
चडीया चरिताळीय कोप क्रोधाळीय रुप डाढाळीय रास रमे. || 02||
खणेंणाट करी कर कांकण ने अडेडाट तुं आयल आभ उठे
कडेडाट कडेडीय विजळ सी आय राखह माथेय देव रुठे
रमे राहडो तुं हत्थ जोगणीयुं जेर जम दड्ढी वाका बुक जमे
चडीया चरिताळीय कोप क्रोधाळीय रुप डाढाळीय रास रमे. || 03||
धणेंणाट धणेंणीय केहर सी हणेणाट करी रण हाक रची
गणेणाट करी उचे आभलीये उड्यां माथलडां ज्यम होड मची
खलके खमकारी चारणा चारीय खोट ते मोगल केम खमे
चडीया चरिताळीय कोप क्रोधाळीय रुप डाढाळीय रास रमे. || 04||
करती किलकाट किलोल कली तारुं रुप भयानक आज रणे
दीये ठेक धरा पडतो थडको फड़को पड़तो जाई शेष फणे
तर हुर रुधी रांय रेल तवां त्रब केल मुकेल ना खेल क्षमे (खमे)
चडीया चरिताळीय कोप क्रोधाळीय रुप डाढाळीय रास रमे. || 05||
धर ओखाय घारीये गोरव याळी ये नाळीये गोखण गाम गमे
लीये चारण लेखण नाम लाजाळीय  जोगण तुं नीत नेह जमे
कीरपा कीरपाळीय नेक नेजाळीय नृप घणां पद शिस नमे
चडीया चरिताळीय कोप क्रोधाळीय रुप डाढाळीय रास रमे. || 06||
उचरेल तुं मात उदोह उदोह जुदोह नको कोई आज जडे
तरवार ग्रही  तरवेरोय तेखण पुजण सोजण पाय पडे
जोगी दान करे अनुमान सुजान तुं सोय भले नव तेह समे
चडीया चरिताळीय कोप क्रोधाळीय रुप डाढाळीय रास रमे. || 07||
(पुज्य आई श्री मोगल ना चरणों मां हजारो वंदन सह रास सप्तक)
पेहला पांच अंतरा मां माताजी नो क्रोध छे पण पांचमा अंतरानी
छेल्ले माताजी क्षमे कही ने वळता भाव मां छेल्ला बे अंतरा मां
आई नो राजीपो व्यक्त करवा कालावाला करेल छे...)
रचना : जोगीदान गढवी (चडीया )
पोस्ट बाय :- www.charanisahity.in
.  जय मां भगवती चारण चंडी आई मोगल 
       वंदे सोनल मातरम् 

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