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7 जनवरी 2016

|| शक्ति पीठ स्तोत्र || . रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)

.                   || शक्ति पीठ स्तोत्र ||
.             रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)
.                     छंद: भुजंग प्रयात
नमो हिंगळा ब्रह्म रंध्रम भवानी, नमो शर्करा नैना देवी सवानी.|
अमरनाथ श्रिशैल मे कंठ साजे, रदय अंबिका गब्बरी मात गाजे.|
त्रिपुर मालीनी वक्ष जालंध्र जानो, दुजा रामगीरी शिवानी वखानो.|
सुगंधम् सुनंदा नसीकाय नस्तु, नमामी जपम् जोगीदानम् नमस्तु ||01||
महीष मर्दनी वक्र ईश्वर भुमध्या, यशोर् इश्वरी हस्त कौंणी कमध्या.|
सती मात छत्राल भुजा भवानी, नमो बाहुला मात बंगाल बानी.|
गुजैयेश्वरी म्हाशीरा घुट्टनाई, त्रिपुर सुंदरी पाय दाया पुनाई.|
जीभा कांगडा मात ज्वाला जमस्तु, नमामी जपम् जोगीदानम् नमस्तु ||02||
श्री पर्वत्त्त पायल्ल श्री सुंदरी तुं, करत्तोय तत् अर्पणा उत्तरी तुं.|
कुरुक्षेत्र सावित्री ऐैडी समाई, कपालीनी भीम्रुप विभाष वाई.|
बिराजे बिमल्लाय नांभीं नमोहम्, श्रवन्नी पीठा कन्या आश्रम सोहम.|
नमो गंडकी पोखरा मस्तकस्तु, नमामी जपम् जोगीदानम् नमस्तु ||03||
दयो कान कन्नार्ट दुरगा द्रसन्नी,अटम्म हास ओस्टे फुलररा प्रसन्नी.|
मया पांनीयुं लंक ईन्द्रक्षी आपा, विरातंबीका वाम अंगुल्ल थापा.|
जुगाड्या मया जम्मणा पाव जानी, हथां री प्रयागे ललीता लुबानी.|
नमो नदिनी नंदिपुर हार पस्तु, नमामी जपम् जोगीदानम् नमस्तु ||04||
मणींबंध पौंचाय गायत्री गानम् ,जयंती महा वाम जंघा जहांनम् .|
मणीं कर्णीका घाट काशीय कर्णा, दढां पंच सागर वराहीय वर्णां.|
दया पाव अंगुस्ट काली कराली, उमा वृंन्द वन्ना चुडा केश चाली.|
दया मानसं दाक्षयानी  दयस्तु, नमामी जपम् जोगीदानम् नमस्तु ||05||
असौं दैव गर्भाय कांन्चीय अस्ती, उमा स्कंध वामे मिथील्लाय मस्ती.|
दयो स्कंध रत्नावली मां कुमारी, खटुं चंद्र भागा प्रभासे खुमारी.|
उपल ओठ भैरव्व पर्वत्त अवंती, डढी भ्रामरी मां जनस्थान जंती.|
नमो भ्रामरी वाम त्रिस्तोत्र वस्तु,  नमामी जपम् जोगीदानम् नमस्तु ||06||
उजैनी  कलायुंय चंद्रीका चंडी, कमाख्या कुखे काम गीरी कमंडी.|
नितंबे मया नर्मदा शौन देशम, कमल्ला धवम कालीका विज वेशम् |
सरव शैल विश्वेस्वरी मात गालम् ,तिनो लोक चाले मया स्वास तालम् |
नळो नल्लहाटी महाकाली मस्तु, नमामी जपम् जोगीदानम् नमस्तु ||07||
पढौ नित्य प्रेमे मया पीट्ठ मानीं, जुगौ जुग मां को विधाता वखानी.|
चहु दीश मैं ईश है ऐक धारा, पुकारो मया को पुगारेय पारा. |
ईही मां सती की मती शंकराया, सृजन ध्वंस पोसन्न माने कराया.|
किरिटम विमल्ला मुकट्टांय मस्तु, नमामी जपम् जोगीदानम् नमस्तु ||08||
.             (ईतीः श्री शक्ति पीठ स्तोत्रम् संपुर्णम् )
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