.

"जय माताजी मारा आ ब्लॉगमां आपणु स्वागत छे मुलाक़ात बदल आपनो आभार "
आ ब्लोगमां चारणी साहित्यने लगती माहिती मळी रहे ते माटे नानकडो प्रयास करेल छे.

WhatsApp Update

Sponsored Ads

Sponsored Ads

.

Notice Board


Sponsored Ads

4 अप्रैल 2016

|| गोपीनाथ नी गरबी || रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)

|| गोपीनाथ नी गरबी || .....
ज्यारे गोकुळ नो रास जोवा हेमजा पार्वती निकळ्या अने शिवे पण साथे जवा जीद करी माताजीये शिव ने कह्युं के त्यां मात्र कृष्ण नर अने बाकी बधी नारीयो होय...तो भोळोनाथ रास नो ल्हाव लेवा नापी रुप धरी रमवा पधारेल...तेनुं आछुं वर्णन करती आ गरबी...
.                       || गोपीनाथ नी गरबी ||
.                 रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)
रमे छे कान रंग ताळी गोकुळ मां..रमे छे कान रंग ताळी..
भोळा गोवाळीयाने भाळी.. गोकुळ मां.. रमे छे कान रंग ताळी..टेक
हरखे रमवा ने हेमजा रे हाल्यां, माधेव  मन मां मीठडुं रे माल्या..
कहे, हेते लीयो ने मुने हाळी.. गोकुळ मां..रमे छे कान रंग ताळी...
थोडुं हसी ने पारवती थोभ्या, लेवाने ल्हाव रास शिवजी रे लोभ्या
पछी, सज्या सणगार ओढी साळी.. गोकुळ मां..रमे छे कान रंग ताळी...
अलख जटा नो वाळीयो अंबोडो, गळानो नाग राज थथर्यो रे थोडो
मुकी गंगा ने डुंगरा नी गाळी... गोकुळ मां..रमे छे कान रंग ताळी.
जोगण ने जोगडा नो राहडो रे जाम्यो..पितांबर धारी एनो भेद बधो पाम्यो.
ऐँणे भभुती उडतीरे भाळी.. गोकुळ मां..रमे छे कान रंग ताळी.
प्रभु नी वांसळी लागती रे प्यारी...नाथ कैलास ना बनीया छे नारी
हस्या नभ मां देव जो नियाळी रे गोकुळ मां..रमे छे कान रंग ताळी...


कोई टिप्पणी नहीं:

Sponsored Ads