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"जय माताजी मारा आ ब्लॉगमां आपणु स्वागत छे मुलाक़ात बदल आपनो आभार "
आ ब्लोगमां चारणी साहित्यने लगती माहिती मळी रहे ते माटे नानकडो प्रयास करेल छे.

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9 अप्रैल 2016

ई-बूक

जय माताजी
आप बधाने जणावता आनंद थाय छे के आप बधाना सहकार थी नीचे मुजब ना पुस्तको ई-बुक (PDF) स्वरूपे टुंक समय मां मुकववानो नानकडो प्रयास करीश.
(1) चारणनी अस्मिता
लेखक :- लक्ष्मणभाई पिंगळशीभाई गढवी - जामनगर
कुल पेज :- 553
(अप्राप्य बुक 1983 मां प्रकाशन थयेल )
(2) चारण महात्मा ईसरदासजी रचित हरिरस
संपादक :- लक्ष्मणभाई पिंगळशीभाई गढवी - जामनगर
कुल पेज :- 225
(अप्राप्य बुक 1993 मां प्रकाशन थयेल )
ऊपर मुजबना पुस्तको ई-बुक (PDF) बनाववानी मंजुरी आपवा तथा आ अप्राप्य पुस्तकोनी सी.डी कुरियर मारफते मोकलाववा बदल श्री लक्ष्मणभाई पिंगळशीभाई गढवी नो खूब खूब आभार
सहकार बदल आपनो पण आभार
आप पासे पण कोई चारणी साहित्यना अप्राप्य पुस्तको होय तो ई-बूक स्वरुपे मुकववा माटे मोकली शको छो ( जेम के अवतार चरित्र , मातृदर्शन वगेरे पुस्तको )
Whatsapp / call :- 9913051642
Email :- vejandh@gmail.com
Forward To All Friends & Groups
         वंदे सोनल मातरम्  

2 टिप्‍पणियां:

Unknown ने कहा…

aapke prayas bahot hi nek hai.
aapki iss safalta par aapko badhai.
aap aage bhi pragti karte rhe.

VEJANDH GADHAVI ने कहा…

JAY MATAJI


AABHAR

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