.

"जय माताजी मारा आ ब्लॉगमां आपणु स्वागत छे मुलाक़ात बदल आपनो आभार "
आ ब्लोगमां चारणी साहित्यने लगती माहिती मळी रहे ते माटे नानकडो प्रयास करेल छे.

WhatsApp Update

.

Notice Board


Sponsored Ads

Sponsored Ads

Sponsored Ads

5 अप्रैल 2016

नमियें तुंने हींद नी नारी

.            || नमियें तुंने हींद नी नारी ||
.         रचना: जोगीदान गढवी (चडीया)
दरिया भर हेत दुलारी, खिजवे त्यारे काळ थी खारी
हिंम्मत ना कोय दी हारी, नमियें तुंने हिंद नी नारी..टेक
आवीयो मोल उमेदसिं तेदी, हाडी दीधेलाय हाथ
धर्म त्रीया नो धारीयो साचो, माळ पेरावेल माथ
विरो नी लाज वधारी..नमियें तुंने हिंद नी नारी...०१
जणीयो जोधो जिवतीं बाई, परख्यो रांण प्रताप
रंग राख्यो ऐंणे राजपुताई, जपता क्षत्रीय जाप
सोनगरी मात सन्नारी, नमियें तुंने हिंद नी नारी...०२
जणींयो बाळक बाई जीजांये, सिंह साचो सिवराज
देस आखे तारा दुध ना डंका,  यवन संभारे आज
भडवीर थ्यो तर्क पे भारी, नमियें तुंने हिंद नी नारी...०३
आंण वरती अंगरेज नी तेदी, पाडीयो तें पड़कार
गगन आखुं गुंजावतो थ्योतो ,लक्षमी नो ललकार
आझादीय नाम उचारी, नमियें तुंने हिंद नी नारी...०४
कैक जनेता नी कुंख ना जाया, सहिद थीयां संतान
विध्या वती ना लाल ने वंदीं, ज्वारीयें जोगीय दान
आखो जेनो देश आभारी, नमियें तुंने हिंद नी नारी...०५


कोई टिप्पणी नहीं:

Sponsored Ads