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9 जून 2016

श्री कष्ण अर्जुन रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)

.                    || श्री कष्ण अर्जुन ||
.          रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)
.               छंद : पद्धरी नी चाल
कटी बंध खेत्र कुरु क्रिष्ण चंद. वसू देव पुत्र धट रटत नंद
नटखट नटवर कीन संख नाद ड़ंणकंत डणणण दीय सिंघ साद.
अरजण रण दरसण करत काल.करसण धर धणणण धरत ढाल.
बणणण बरसत गांडीव बांण. तणणण अरजण दीय पणछ तांण.
सणणण रत सौंणीत उडत सोळ. गणणण नभ ग्रिध्धण घुमत गोळ
रणणण बज रथ चक रमत रंग. ठणणण कुद ठैकत कटत अंग.
जणणण कर झुल्लत खलक खाट.सणणण हथ चक्कर सणसणाट
दरसत रण वाळत दैत दाट. नभ धर नटराजन करत नाट
चारण गण चडीया ग्रहत चाळ. मधु कैटभ भरखण मूंड माळ
जळळळ उतरत घर जोगीदान. गणणण कर जगपर क्रिष्ण गान.
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