.

"जय माताजी मारा आ ब्लॉगमां आपणु स्वागत छे मुलाक़ात बदल आपनो आभार "
आ ब्लोगमां चारणी साहित्यने लगती माहिती मळी रहे ते माटे नानकडो प्रयास करेल छे.

WhatsApp Update

Sponsored Ads

Sponsored Ads

.

Notice Board


Sponsored Ads

16 जुलाई 2016

बंघ कर....! कवि चकमक.

बंघ कर....!
तुं नकामुं पळोजणमां पडवानुं बंघ कर....!
महेल रेतीमां बांघवानुं बंघ कर...!
किनारे बेसी नजारानुं सुख भोगव,
मायकांगलो छे मरजीवा थवानुं बंघ कर...!
सहकार सौनो लई बांघ्यु छे आ नगर,
शांत सरोवरमां पथरो फेंकवानुं बंघ कर....!
खोटुं करशे ऐनी खबर लेशे खुदा,
तुं मोलवी थई माथाकूट करवानुं बंघ कर....!
रेखाओ पसीनानी ज चमके सौनी,
तुं मफतनुं मेळववानुं बंघ कर....!
शुं थयुं छे ने शुं थशे कयारे थशे ?
आम झींणु कांतवानुं बंघ कर...!
'' चकमक '' सौ बांघे छे पाणी पहेला पाळ,
तुं उगता छोड उखेडवानुं बंघ कर....!
कवि चकमक.

कोई टिप्पणी नहीं:

Sponsored Ads