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"जय माताजी मारा आ ब्लॉगमां आपणु स्वागत छे मुलाक़ात बदल आपनो आभार "
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30 जुलाई 2016

हरिरसमां महात्मा ईसरदासजी कहे छे के,

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हरिरसमां महात्मा ईसरदासजी कहे छे के,

आळस वाय अजाणवा,
दिल खुटलसु दूर !
साहब साचा साघका,
हे हाजरा हजूर !!

आळसु, अज्ञानी अने खुटल ऐटले के खोटा कमॅ करनार माणसथी परमात्मा दूर रहे छे अने जेनाथी परमात्मा दूर होय तेना जीवनमां दु:ख, अशांति, प्रतिकुळतानुं प्रमाण वघु होय छे. परंतु जे मनुष्य सत्यनुं शरण ले छे तेना माटे परमात्मा हाजरा हजूर छे अने परमात्मा तेने दु:खमांथी मुकित आपे छे.

       🌺जय माताजी🌺

प्रस्तुति कवि चकमक.

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