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22 अगस्त 2016

दातारेश्र्वर देव भोळीया रचयिता :-चारण कवि श्री तखतदान रोहडीया-  " दान अलगारी "

॥दातारेश्र्वर देव भोळीया ॥
                      ॥ आरति ॥
दातारेश्वर देव भोळीया, करू तमारी सेव.
जटामा वसे मात गंगेव, पतितने पावन करती.
पारवतिना पति, खोळले रमे गुणनो पति.
जाप नित जपे जतीने सती, आरति रोज उतरती...१
काळ तणा छो काळ, कंठमा जुली रह्या कंकाळ.
अंग पर रमे विखधर व्याल, मणीधर फणीयल काळा.
गरल धरण निलकंठ, धतुरा भंग त्रप्त आकंठ.
निशाचर भूत प्रेत नाचंत, भयंकर भूरी लटाळा...२
निर्मळ जलरी धार, धरे कोउ बिलीपत्र उपहार.
शिवायं नम :करे उच्चार , ध्यान शंकररो धारे.
धर्म अर्थ ने काम, मोक्ष सह चारु फल दे साम.
सदाशिव हाम्म दाम ने ठाम, समर्पे सेवक द्वारे...३
स्थान भूमि समशान, धूर्जटी धरे अलख रो ध्यान.
दिगम्बर महादेव भगवान, अजन्मा अकळ अनुपम.
देव देत्यने नाग, मानवी कोई न पामे ताग.
अजरवर थारां गुण अथाग, समरीये शंभू दम दम...४
जटा जूटमें चन्द्र, त्रिलोचन अगन जाळ परचंड .
त्रिशूळ कर डमरू डाक बजंत, वास कैलाश निवासी.
भवहर भवरा नाथ, साधरा साध वडा समराथ.
अघोहर अनाथ हंदा नाथ, टाळतल भवरी फांसी...५
चवे चउद हि लोक, पुकारत नाम मिटे सब शोक.
चरित वंचाय जगत्त रे चोक, के जय हो पिनाकपाणी.
" अलगारी "उछरंग, धरी गुण गाय करी मन चंग.
राखीये नाथ त्रिलोकी रंग, वदत नित विमलवाणी...६
रचयिता :-
चारण कवि श्री तखतदान रोहडीया-  " दान अलगारी "
सौजन्य:-                                      संकलन:-
कवि श्री प्रवीणभा मधुडा              मोरारदान सुरताणीया
Mo 09510995109                    Mo.
W.app.  097239 38056         9979713765

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