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9 सितंबर 2016

खाविंद ने खबर छे :- दिलजीत बाटी

*खाविंद ने खबर छे*

            *छंद*

घांघू थवू नहि घडीक मा
बे बाकळा बनवू नही,
वहमां वखतमां निडर रहीने
धीरज थी डगवू नही,
फगशे नहीं जे फिकरमां एनी
प्रभू प्रत्मा पाळशे,
खाविंदने बधी खबर छे ई
योग्य टाणे आपशे....(1)

करगरवा थी कदी कांई कोई ने मळतू नथी,
झांझवाना जळ थकी तृष्णा नूं दूःख टळतू नथी,
विश्वास थी जे वहन करशे
ई प्रम झरणूं पामशे,
खाविंदने बधी खबर छे ई
योग्य टाणे आपशे....(2)

नरसी महेताना काम बावन
स्नेह थी श्यामे कर्या,
हूंडी स्वीकारी हरखथी ने
मोंघा मामेरा भर्या,
तर्पण कराव्यू तात नू विधी श्राध नी वंचावशे,
खाविंदने बधी खबर छे ई
योग्य टाणे आपशे....(3)

बळता निंभाडा थी बचाव्या
बाळ बिलाडी तणा,
ईंडा उगार्या यूध्ध टाणे
त्रिकम टिटोडी तणा,
जबरा भरोंसे जीवशे ई
परम सूख ने पामशे,
खाविंदने बधी खबर छे ई
योग्य टाणे आपशे....(4)

कूंजर थी किडी लगी चिंता
बधी सरकारने,
जीव बधा नू जतन करवू
दूनिया ना दरबारने,
कण किडीने हाथीने मण
महिपत मोकलावशे,
खाविंदने बधी खबर छे ई
योग्य टाणे आपशे....(5)

भू-चरने भूमी मही जळचरने
जळमा मळे,
गगनवाटे विहरनारा गगन
वासी ने गळे,
निर्माण करनारो निभावे
पूरवठो पूगाडशे,
खाविंदने बधी खबर छे ई
योग्य टाणे आटशे....(6)

पापी अपापी क्रोधी कामी
लोभी हो के लालचू,
जेवू जेने तेवू तेने प्रभू
खरो राखे ख्याल तूं,
छोरु बधाने सरखा भावे
प्रेम थी पिरसावशे,
खाविंदने बधी खबर छे ई
योग्य टाणे आपशे....(7)

साधू असाधू के अघोरी
संसारीने सांपडे,
हिंसक अहिंसक हरेकने
वळी जे जोतू ते जडे,
*दिलजीत* बधानो पाळनारो
पोतावटने पाळशे,
खाविंदने बधी खबर छे ई
योग्य टाणे आपशे....(8)

समय समय नू काम करेछे
सारा समय मां छकी न जवू
वहमा वखतमा ज्यां त्यां कोय मोटा समरबंधी पासे जईने दूःख गावू नही रोदडा रोवाथी फजेती थाथ कांय वळे नय मन नी साथे समाधान करो जे से तेमा रोडवो समय नी साथे अनूसरो नहिके देखा देखी करो माटे आ छंद लखायो छे

*दिलजीत बाटी* *ढसा जं.*
ना जै माताजी॥
*मो..9925263039*

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