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4 अक्तूबर 2016

आई श्री चारण बाई माँ : रचना :- दिलजीतभाई गढवी

*आई श्री चारण बाई मां*

             *दूहो*
याद करंता आवजो ऐक आजो तमाणो आई,
तारा छीऐ ने  तारजो समरथ चारणबाई,
        *छंद*
भय हरण छो तूं भगवती ई वडो मू विश्वास छे,
जाई बीजे क्यां जोगमाया ऐच तारी आश छे,
सारा नठारा छीऐ तारा जरुर मां तूं जाणजे,
पंजावाळी प्रगट थई मां कष्ट सहूना कापजे;-1

नथी नोधारा के नमाला आई तूं आधार छे,
तारा छीऐने तारवा वळी ऐमा शूं उपकार छे?
सूणी साद चारणबाई आवी पोतावटने पाळजे,
पंजावाळी प्रगट थई ने कष्ट सहूना कापजे;-2

धाह सूणी झट ध्रोडजे संभाळ लेवा चारणी,
आजो छे साचो आपनो मां जबर दैय्ता जारणी,
बनी बाळ काजे बावरी हवे आई वेगे आवजे,
पंजावाळी प्रगट थईने कष्ट सहूना कापजे;-3

अरजी करुछू आईने भीतर हूंदा भावथी,
उगारजे अंगत गणी दूनिया तणा दरियावथी,
*बेला* धणी तूं बाई साची रहेम द्रष्टी राखजे,
पंजावाळी प्रगट थईने कष्ट सहूना कापजे;-4

अनगळ आडा नीर जाडा वेरी थ्यो छे वावडो,
करु सादने मां केम नावे अभाव शूं छे आवडो,
*दिलजीत* कहे मां दिलथी त्रापो अमाणो तारजे,
पंजावाळी प्रगट थईने कष्ट सहूना कापजे;-5

आ स्तूती बेला (गोधावटा)
मा बीराजमान आई श्री चारण बाई मां नी वंदना छे
दिलजीत बाटी ढसा जं. ना
जै माताजी. मो.9925263039

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