.

"जय माताजी मारा आ ब्लॉगमां आपणु स्वागत छे मुलाक़ात बदल आपनो आभार "
आ ब्लोगमां चारणी साहित्यने लगती माहिती मळी रहे ते माटे नानकडो प्रयास करेल छे.

WhatsApp Update

Sponsored Ads

Sponsored Ads

.

Notice Board


Sponsored Ads

4 नवंबर 2016

आई श्री पीठड स्तूती : रचना :- दिलजीतभाई बाटी

*आई  श्री  पीठड*
          *स्तूती*
         
           ॥दूहो॥
कूळ देवी करुणा करी बेलू थाजो बाई,
बांय ग्रही तव बाळक ने मां
उगारी लेजो आई,
       *छंद दूर्मिला*
सब काज सूधारिये आई ओधारिये,
विघ्न विडारिये वेग करी,
अरिया उथलाविये अटके आविये,
ढाळिये दोखिया तेग धरी,
बळवंत ब्रदाळिये मां-मरमाळिये,
सायते आविये सेवग ने,
परचाळिय पीठड पार उतारिये ,
बांय ग्रही तव बाळकने...1

शकित शूध चारण तरण तारण,
भार उतारण-भू-परथी,
अम कूळ उजाळण तिमीर टाळण,
पाप प्रजाळण प्रथम थी,
सहू ताप समावण नेह निभावण,
हैये वधारण हरख ने,
परचाळिय पीठड पार उतारिये,
बांय ग्रही तव बाळकने,...2

दैयता कूळ डारत पूंह पछारत भूमी मे भारत भूज बळे,
फेफरा रन फारत खंडमें खारत,
टारत दानव तेग तळे,
नवखंड निहारत यूध्ध उचारत
आवी उगारत अंगतने,
परचाळिय पीठड पार उतारिये,
बांय ग्रही तव बाळकने...3

नवघण निहर्यो आवी उतर्यो
पाय नम्यो धरी पाघ तने,
देवी दूःखनो दरियो आज उछळियो,
आई हरी लीयो आफत ने,
*दिलजीत* 'पी दरियो हमीर हणियो,
जशथी लावियो जाहलने,
परचाळिय पीठड पार उतारिये,
बांय ग्रही तव बाळक ने,

*आई श्री पीठड स्तूती*

*दिलजीत बाटी ना*
      *जै माताजी*
ढसा जं.
*मो.9925263039*

कोई टिप्पणी नहीं:

Sponsored Ads