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5 दिसंबर 2016

||बुटभवानी अष्टक|| रचना: जोगीदान गढवी (चडीया)

.          *||बुटभवानी अष्टक||*
.            *छंद:भुजंग प्रयात*
.   *रचना: जोगीदान गढवी (चडीया)*
नमौं कष्ट हर्ताय कल्यांण कारी, नमौं मात देवल्ल देथा दूलारी.
नमौं दोहीता मांड़वा ग्राम मानी, भजौ चारणी बूट मातृ भवानी...01
तुंही मात करणीं भगीनी न काची, सगी बेचरा नी बहन तुंज साची.
चुंवाळां वचाळे त्रवारुंय तानी, भजौ चारणी बूट मातृ भवानी...02
सती नो पती बाप देथो सवायो, जणीं थी दणीं गाम गामे गवायो.
नमौं अंश हिंगोळ बापल्ल बानी, भजौ चारणी बूट मातृ भवानी...03
सवत चौद ने वर्ष विते सताशी, पुरण ज्योत तुं जग्त अंबा प्रकाशी.
ग्रजे गंध्रवां गांन खारौड गानी, भजौ चारणी बूट मातृ भवानी...04
नमौं गाम अरणेंज वागे नीशांणो, जगत नी जणेंता तणुं रुप जांणो.
जती भुपती पुजता पर्स पानी, भजौ चारणी बूट मातृ भवानी...05
खरी खोळले ब्राह्मणां ने खीलावे, महा मान क्षत्रिय ने तुं मीलावे.
तुही वैष्णवा शुद्र नी स्हाय सानी, भजौ चारणी बूट मातृ भवानी...06
तवां आशरे मात जे जन्न आवे, प्रसी पांव ने मन्न वांछीत्त पावे.
हुवे ना कबुं भक्त ने कोउं हानी, भजौ चारणी बूट मातृ भवानी...07
रखौं हाथ चडीयाह ने शीस चंडी, असां आशिसां आप मातुं अखंडी.
रहौ जोगणीं जोगीदानम जुबानी, भजौ चारणी बूट मातृ भवानी...08
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