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14 अप्रैल 2017

|| युद्ध वर्णन || रचना कवि धार्मिकभा गढवी

*|| युद्ध वर्णन ||*
*(छंद मोतीदाम)*
घणी धणणाट घणी घमसाण
मची रणजंग अत्तिशय हाण
नभो परथी बरसे खुब बाण
परस्पर एक दुजा हर प्राण *(१)*
धरी तलवार बिजे कर ढाल
अरि पर वार पडे मन फाल
नभे सब धूळ धरा सब लाल
दिसे वह द्रश कुकोप कराल *(२)*
निरंतर घाव थता हरदम्म
हरेक क्षणेय पधारत जम्म
गजावत गज्ज धरा धमधम्म
फटाफट अश्र्व चले पडदम्म *(३)*
ध्रबांग ध्रबांग बजे हर ढोल
हरीहर ओम रटे मुख बोल
छटाछट भोम उडे लहु छोल
विरो हर रास रमे लग गोल *(४)*
करे हद हास नरा नर नास
दिसे चहुकोर जमीं पर लास
जरा पलभार खमे नह त्रास
अणी पर शस्त्र तणी बस मांस *(५)*
धरा पर धूल मिले सह खून
अत्ति हलचल्ल छता सब सून
मरा मर मार धरी मन धून
निरंतर वार करे विर पून *(६)*
कहेर बहुत्त करे अकरोस
जमावत जुद्ध मही बहु जोस
चुकावत वार अरोस परोस
दखावत विर्ध पक्षे हर दोस *(७)*
महावत धारत आगळ  गज्ज
अने सब अश्र्व सवार सुसज्ज
धमाधम धार उडे रण रज्ज
रहे बनराज रु भागत अज्ज *(८)*
सजी समरांगणमां शणगार
नभे तक आंख खडी लय हार
करी बस राह दिसे बस धार
रु अप्सर हूर अलौकिक नार *(९)*
लडे रण हाथ धरी हथियार
मचावत फौज दु मारम मार
करे सब अंग कु आरमपार
झिले तब भोम विरा तण भार *(१०)*
- *कवि धार्मिकभा गढवी रचित*
9712422105

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