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"जय माताजी मारा आ ब्लॉगमां आपणु स्वागत छे मुलाक़ात बदल आपनो आभार "
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18 अप्रैल 2017

जगतमां त्रण प्रकारना माणसो होय छे...!

जगतमां त्रण प्रकारना माणसो होय छे...!

ऐक गुलाबना छोड जेवा.

बीजा आंबाना वृक्ष जेवा.

त्रीजा फणसना छोड जेवा.

*  गुलाबना छोडने फूल ज आवे, फळ न आवे.
समाजमां केटलाक लोको ऐवा होय छे. जे बोलता होय छे, कांई करता नथी.
केवळ फूल, फळ नहि. ''

*  आंबाने मोर आवे ने फळ पण आवे.
समाजमां केटलाक लोको ऐवा होय छे. जे बोले ऐ करी बतावे छे. ''

* फणसना वृक्षने फूल नथी आवतां, सीघा फळ आवे छे.
समाजमां अमुक माणसो ऐवा होय छे. जे बोलता नथी, कायॅ द्रारा समाजने सीघुं परिणाम आपे छे.

जय माताजी.

प्रस्तुति कवि चकमक.

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