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14 अप्रैल 2017

|| सूर्य वन्दना || ||कर्ता मितेशदान गढ़वी(सिंहढाय्च) ||

*|| रचना - सूर्य वंदना ||*
    *|| छंद- मोतीदाम ||*
  *||कर्ता-मितेशदान महेशदान गढ़वी(सिंहढाय्च) ||*

*फूटी परभात  सुराजण जाप,*
*कटे सब ताप मटे   दर पाप,*
*खगा  कलबल मचावत  भेर,*
*नमा मीत नाथ दिनं कर मेर*(1)

*झटंकीय तेज झरे  परकाश,*
*पटंकिय पान खरे  सुरजाश,*
*लटंकीय फल द्र्से   तरुपर,*
*मनंखीय मीत ऋतु अनुसर,*(2)

*तरहे खगला जलके  बिन जी,*
*वरहे धाखतो पलकें भाण जी,*
*तरुवा सुखता तळीया मुर थी*,
*मीतवा देखता दुखिया दूर  थी,*(3)

*भगति कर भावण भेदमरे,*
*शगति धर  लावण मेदसरे,*
*हरी   मन रेव हरी   समरे,*
*धरी  पर मीत धरी   भ्रमरे*(4)

*कियागुण गान अरक रा आज,*
*गुणागीत गासुय काल  नवाज,*
*गजानन गोविन्द याद   कराव,*
*दिनेकाल मीत गुणा   गणराव,*(5)

*केडो दिन व्यो,हुतो अज काज,*
*कविता रो साज कितो सुरराज,*
*मुके खूब भावत दिनरी  मोज,*
*इ चातो हु मीत हुवे मोज रोज,*(6)

*છપ્પય*

*શનિ તાત સુરજણ,સકલ જગ મેં સમાયા,*
*પરભાતે પ્રગટણ,હરણ તિમિર હટાયા,*
*પાપ દર્દ જિય પ્રાણ,તાણ તિહુ લોકન તાર્યા,*
*જાપ જોગંદર જપે,અપે કૈં જીવ ઉગાર્યા,*
*અદલ સાખ તું એકલો,ભોમ નીરખતો ભાણ,*
*હર્ષ મીત બન હેરતો,રાખ સુખી જગ રાણ,*

*જિય-મન,ચિત્ત*

*🙏---मितेशदान(सिंहढाय्च)---🙏*

*कवि मीत*

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