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"जय माताजी मारा आ ब्लॉगमां आपणु स्वागत छे मुलाक़ात बदल आपनो आभार "
आ ब्लोगमां चारणी साहित्यने लगती माहिती मळी रहे ते माटे नानकडो प्रयास करेल छे.

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22 जून 2017

जोगीदानभाई चडीया

*संध दियो ई सारणा, जेणे, बेटोय हणीयो बाल*
*जाम उनडसें जोगडा, मान कियो सग माल*

ई.स. 930 मां चारण सगमाल नो दिकरो अने जाम उनड नो दिकरो रमत रमता हता जेमा उनड नो दिकरो बकरुं बनेल अने चारण तेनो वध करनार बनेल अने रमत रमत मां रमत साची थई...कुंवर नु माथु कपाई ग्युं...चारण ध्रुजी उठ्यो..त्यारे उनड जामे कहेल के सावज नां संतान बकरां बने पछी तो एनी हालत आ ज होय..चारण कोयदी रांको रजपुत सांखी न सके...एम कही पोते सिंध नी गादी सगमाल चारण ने सोंपी दिधेल...

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