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11 जुलाई 2017

व्रळळ  चम  चम  विजळी रचयिता : राजकवि पिंगलशीभाई  पाताभाई  नरेला.  भावनगर

व्रळळ  चम  चम  विजळी

रचयिता : राजकवि पिंगलशीभाई  पाताभाई  नरेला.  भावनगर

                            छंद

घन  गगन  धमधम  धरा  धम  धम

व्रळळ  चम  चम  विजळी  -

आषाढ  अनगळ  मेघ  मंडळ , चंद्र  कुंडळ  छाजितं ,

खगोळ  खळभळ , थाट  थळ  थळ , रंग  वादळ  राजितं ,

धारा  अढळ  ढळ , पुर  पद्धळ , महोद्ध  नदियां  मली........ घन..1

सुखदाई  श्रावण , नीर  नावण , शिव  रिजावण  सुकृतं ,

पुरलोक  पावण  परस्पर ,  विप्रोव्रतावण  सुवृतं ,

मल्लार  गावण , सुरसुहावण , मोज  साधु  मंडली.........घन..2

भाद्रवभारी  घटाकारी ,  पियु  प्यारी  भामिनी ,

वरसंत  वारी ,  सुखअपारी , जाय सारी जामिनी ,

तंदुल  तैयारी ,  पय  अहारी , करधरी  चंपाकली....... घन..3

आश्विन  आया , अन्नउपाया , मन  रिजाया  मानवी ,

आनंद  पाया ,  सूजन  आया , जात्र  करवा  जानवी ,

पिंगल  बनाया , छंद  गाया ,  सनेहछाया  सांभली......... घन..4

संकलन : अनिरुद्ध  जे. नरेला.  भावनगर

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