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7 फ़रवरी 2018

व्यकित परिचय - श्री हरदानभाई गोवाभाई खडीया (कवाडिया)

काग स्मृति ऐवोर्ड 2018 

हलवद ताबाना कवाडिया गामना वतनी श्री हरदानभाई गोवाभाई खडीयाने काग स्मृति ऐवोर्डथी सन्मानित कराई रह्या छे, त्यारे छेल्ला 40 वर्षथी अविरत वहेती तेमनी लोकसाहित्यकार तरीकेनी सफर पण जांणवा समजवा जेवी छे.

ई.स. 1948 ना मार्च महिनामां जन्म...
पिताश्रीना सरकारी नोकरी होई सोराष्ट्रना कोटडा सांगाणीमांथी तेमणे प्राथमिक शिक्षण लीधुं. शिक्षणना दिवसोने याद करी हरदानभाई कहे छे के स्कुलमां 15मी ओगस्ट ने 26 मी जान्युआरीनी उजवणीमां गुरुजनो मारी पासे जन-गण-मन गीत गवडावता अने ऐ वखते मारी व्यक्तिगत साहित्यनी रुचि ने बल मल्युं.. ने में पहेलुं ज गीत पद्मश्री पू. कागबापूनुं  "नमो हिंदना पाटवी संत नेता".... कंठस्थ  करी लीधुं... त्यारबाद ऐमनी रुचि वधुं ने वधुं प्रबल बनती गई.. .. ते अरसामां जूनागढमां स्थापित लोक साहित्य विध्यालय मां विशेष शिक्षण माटे तेमनो प्रवेश थयो... अहिं छंदशास्त्रना विद्वान चारण कविश्री यशकर्णजी रत्नुं ( राजकवि-पोरबंदर) आचार्य पदे हता. ऐ उंपरांत त्यां बीजा पण ख्यातनाम कविराजो जेम के पींगलशी पाताभाई नरेला (राजकवि-भावनगर), ठारणभाई महेडुं(कविराज- वला स्टेट), शंकरदानजी देथा( राजकवि-लींबडी), कविश्री कागबापू, मेरुभा गढवी, पींगलशी मेघाणंद लीला( छत्रावा) जेवा आ क्षेत्रना तजग्न विद्वान कविओ पासेथी साहित्यने शिस्तबंध रीते शीखवानो मोको मल्यो. श्री पींगलशी मेघाणंदभाई गढवी ऐ दरमियान विध्यालयमां गृहपति तरीके फरज बजावता.
हरदानभाई पोताना संस्मरणो वागोलतां कहे छे के, ऐ वखते पींगलशीबापू सांजे काव्य लखता ने अमारे रात्रे ऐ तैयार करी सवारे रजुं करवानुं रहेतुं. साथे साथे विध्यालयमां कागबापूने मलवा आवता महानुभावोमां रतुभाई अदाणी ने लोकसाहित्यना जतन माटे कागबापू साथेनी अंतरंग वातोथी पण तेओ वाकेफ थता ने पोतानी शैक्षणिक जीवनमां उत्साह वधतो जतो... लोक गायक हेमुभाई गढवी अहिं ज कागबापूना आकाशवाणीना रेकोर्डिंग करवा पण आवता. श्री हरसूरभाई गढवी पण ऐ दरमियान विध्यालयमां तेमनी साथे ज भणता. लोकसाहित्य विध्यालयना 2 वर्षना अभ्यास पछी तेमणे आकाशवाणी राजकोटमां ऐ- ग्रेडना कलाकार तरीके नोमिनेशन प्राप्त कर्युं... हरदानभाई कहे छे के आकाशवाणीना बगीचामां अमे बेठा हता ने  ऐ वखते पू. मोरारीबापू पण ईन्टर्व्युं माटे आवेला.  आकाशवाणी राजकोट परथी हरदानभाई भजन, दुहा, छंदो रजुं करता. ऐ सिवाय पण कच्छ, सौराष्ट्र, गुजरातमां मद्रास मुंबई ठेर ठेर जाहेर डायराना कार्यक्रमो करता. विध्यालय ना शिक्षणनी कृतघ्नता व्यक्त करतां हरदानभाई कहे छे के विविध नदीओ, जातिओ अने डुंगरोना नामो अमे डायरामां ऐकी श्वासे बोली जता, ऐ विध्यालय ना शिक्षणने ज आभारी... तेना गेय स्वरुपने आभारी...।। आजना आधुनिक शिक्षणनी प्रणालीमां आ स्वरुप थकी जो बालकोने शीखवाडवामां आवे तो याद रहेवुं सहेलुं पडे.... तेमनी आ मान्यताने पोते आ उंमरे पोतानी स्मृतिमांथी रजु करी केटलीक रजनाओ रजुं करवा साथे पोतानी मान्यताने द्रढता प्रदान करी.
तेमनी आ साहित्य जीवननी सफर माटे ज्यारे काग स्मृति ऐवोर्ड अपाई रह्यो छे त्यारे लोकसाहित्यनुं पण गौरव वधी रह्युं छे.... आ कार्यने आगल वधारवामां जोडायेला सहुं विद्वानो नो पण आभार....।। आवो ता.१९/२/२०१८ सोमवारे,मजादर ,कागधाम,अमरेली ...आजे खडियासाबना काग एवार्ड साथे आवो जाणीए कवाडिया गाम,अने चारण गढवी समाजना चोराडा प्हाडानी खडिया शाखानी आंछेरी झलक....... विश्व विख्यात जगत मंदिर देवभूमी द्वारकाना प्रवेश द्वारे ज डाबा हाथ पर भक्त कविराज कोलवाजी खडिया नी मूर्ति  छे !जेम जगतनाथ मंदिर भुवनेश्वरओरिस्सा मां पण डाबा हाथ पर भक्त कविराज जयदेवजी नीयादमां उडिया भाषामां १४मी सदीनो लेख छे..चारण संत कवि ईशरदासजी ए हरिरस मां बे स्थाने “जुहारत पग जसां जयदेव” एमजयदेवजी अने सोण दुहामां “दसमे तारे द्वार ,करी हठ बेठो कोलवो; एम कोलवाजी खडियाने ए बन्ने चारण भक्त कविराजोने सादर संभारे छे. राजस्थानना खराडी गामथी वि.स. १६२४मां एक परिवार झालावाडमां आवेछे.कविराज गेलाजी खडिया ने हणवद राजवी चंद्रसिंहजी ए कवाडिया गाम अने साहेबजी झालाए सुरवदर गाम जगाजी खडियाने आपेल.. खडिया परिवारो राजस्थान,उत्तर गुजरात,दक्षिण गुजरात,अने सौराष्ट्रमां वस्या. एमां खराडी राज.ना वि.स.१८२५मां जन्मेला कविराज कृपारामजी खडियानुं नाम सौराष्ट्र, कच्छ,गुजरात, राजस्थानमां सादर लेवायछे. कारण के कृपारामजीए पोतानी सेवा चाकरी करनार राजाराम नामना सादा रजपुतने ‘राजिया’नामथी संबोधी ३००दुहा जीवन निति रिति विषयक लखी काव्य संसारे अमर कर्यो! “मतलबनी मनवार, जगत जमाडे चुरमा; विण मतलबना यार, राब न पिरसे राजिया ।। कविराज कृपारामजीनुं एक कवित पण कविओ वक्ताओमां सुप्रसिध्ध छे जे श्रोता-वक्ताओने संस्कारितानुं जीवनमां आवश्यकतानुं सचोट उदाहरण आपेछे—-कहे कृपाराम बाकी सब है नकाम,—।       
    बोलबो न शीख्यो, तो शिख्यो सब धूर में ।।


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                         सहकार बदल आपनो आभार
                               

                               वंदे सोनल मातरम


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