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27 मार्च 2018

|| रचना : कर्ण || || कर्ता मितेशदान गढवी(सिंहढ़ाय्च) ||

*||रचना:वीरयोद्धो कर्ण ||*
*|| छंद : रेणंकी ||*
*||कर्ता : मितेशदान महेशदान गढवी(सिंहढ़ाय्च) ||*

सम्यक सुत पूरण सकल बल शुरवर,अरक रसिक रूप मुरत अनल,
परसन्न जण प्रगत कु टक सम अरिदल,
अचकत मन नीपना हलबल,
विपळा पर अरक तेज अति प्रबलं,भड़ दळ महा भारत्त भडयो,
कुरुधर हण जुद्ध मच्यो नर बंकड मिहीरनंद बलवान लड्यो,
जिय  अंगराज करणेश लड्यो(1)

अधिरथ कर ग्रहण हरत सत गत उर करण पाल गुरु शरण ग्रयो,
पळ पळ जिय प्रखर  युद्ध कळ अतुलय
धम्म धड़क थल कठिन क्रयो,
दळ भड़के खड़ग भर खळत न खंकर झटक पटक ज्यो द्वंद दळ्यो,
कुरुधर हण जुद्ध मच्यो नर बंकड मिहीरनंद बलवान लड्यो,
जिय अंगराज करणेश लड्यो(2)

लख बख बख लड़त लड़त धर धम धम,उलट पटक दट कमर अटै,
कट कट शीश लपट वटक खट झट झट कपट रपट अडीखम्म वटै,
प्रफुरत जिण किरत मुकुट शुर मट मट,अटअट मति अचकाट अळ्यो,
कुरुधर हण जुद्ध मच्यो नर बंकड मिहीरनंद बलवान लड्यो,
जिय अंगराज करणेश लड्यो(3)

त्रो जय प्रय दट्ट प्रतीक सुरजण खट पोरस ससउ सु क्रोद्ध करे,
भो घट्ट कट्टयो फट फरड़ फरड़ ज्यो गगन तीर सरेराट भरे,
कटु झंख वलंखत वैर वटावत सज्ज निशान कु सिद्ध कळ्यो,
कुरुधर हण जुद्ध मच्यो नर बंकड मिहीरनंद बलवान लड्यो,
जिय अंगराज करणेश लड्यो(4)

झुझत गत अगत परागत संगत सस्म(रथ) चक्र रव बिरळ झगे,
जोयो नह कोई जगत महि जोद्धो कवच कुंडळा चढ़त रगे,
फटकार फटक मन्न दट्ट कियो निरख्यो हरि नजरे जुद्ध खड्यो,
कुरुधर हण जुद्ध मच्यो नर बंकड मिहीरनंद बलवान लड्यो,
जिय अंगराज करणेश लड्यो(5)

जद हर तोडत व्यूह जोर जड़ाधर तद अनहद वेरी विफ़रे
खद बद वेराण सटीक मन कपटत जाल बिछावत करण परे,
बरखा रुत बंजर भुं पर भार भर्यो नय कोई बरुक बडयो,
कुरुधर हण जुद्ध मच्यो नर बंकड मिहीरनंद बलवान लड्यो,
जिय अंगराज करणेश लड्यो(6)

हळळळ घट विख्ख उभारत फुंफळ, वैर तणों गण इंद्र हर्यो,
ईरखा मन विप्र पुरंदर दळ अध,याचक ग्रहणत दान वर्यो,
कुंडल अध हार कवच ले कुंठत,अंगज प्राण ई श्वास छड्यो,
कुरुधर हण जुद्ध मच्यो नर बंकड मिहीरनंद बलवान लड्यो,
जिय अंगराज करणेश लड्यो(7)

वरियण मृत लोक अखुट कूट बहुबल एक गुणों ध्र्म वट्टखरो,
सुरजण तुव नमन पुत्र *मीत* समरण जय जय जय करणेश हरो,
उर औपत तेज विकार कथू अति काट रिपु तूव चरण पड्यो,
कुरुधर हण जुद्ध मच्यो नर बंकड मिहीरनंद बलवान लड्यो,
जिय अंगराज करणेश लड्यो(8)

अंत कड़ी मा सूर्यनारायण वंदनं छे तथा कर्ण ने पण वंदन छे

*🙏~~~मितेशदान(सिंहढाय्च)~~~🙏*

*कवि मीत*
9558336512

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