.

"जय माताजी मारा आ ब्लॉगमां आपणु स्वागत छे मुलाक़ात बदल आपनो आभार "
आ ब्लोगमां चारणी साहित्यने लगती माहिती मळी रहे ते माटे नानकडो प्रयास करेल छे.

WhatsApp Update

.

Notice Board


Sponsored Ads

Sponsored Ads

Sponsored Ads

12 अप्रैल 2018

तत्व चारण तणुं जाय तळीये

.         *तत्व चारण तणुं जाय तळीये*
.            *रचना: जोगीदान चडीया*
.                *ढाळ:गीत सांणोर*

तुट्या मणकाय वण तार जग तारणी,मथ्या बउं तोय नव थियल माळा
भुल्या गंभिरता भुवण भवनेहरी, चारणो लीयाव्या चेन चाळा
सत्व दैवत्व शगती तणां छोरुंडा, भद्र अण भद्र मां केम भळीये
जोग चडीयो भणुं जाग जगदंबिके, तत्व चारण तणुं जाय तळीये..01

हिमाळे सांभळी हिया ना हाकला, डाकला वगर मां दोट्य देती
अभय करवा अमुं लीयण अवतार तें, जीवणी कबुं थई कबूं जेती.
क्रोड खमकार करती नभां कांगरे, नाखतां गुंगळ नुं धुप नळीये
जोग चडीयो भणुं जाग जगदंबिके, तत्व चारण तणुं जाय तळीये..02

प्रतिस्ठा पामवा पुजे पग पारका, ध्रुजे ई जोवतां हाड धरणी
स्वार्थ मा अंध कां बन्या छे सारणो, कारणो जडे नई मात करणी
देखियां कैक ए द्रस्य मे ज्यां दणी, काळजां कपायां हाय कळिये
जोग चडीयो भणुं जाग जगदंबिके, तत्व चारण तणुं जाय तळीये..03

अहाहा शुं तने कउं हवे अंबिका, कैक कांटा लगे जीभ केतां
पीये दारु अने खाय परमाटीयुं, देज काजे वधुं दाग्य देता
फेरवो हाथ आ माथडे फेरथी, वरण दैवे वळी मात वळीये
जोग चडीयो भणुं जाग जगदंबिके, तत्व चारण तणुं जाय तळीये..04

पटाधर थई हवे आव प्रथमी परे,प्रतिष्ठायुं तणा पुर परचा
तोज चारण तने मानशे तारणी, चारणी कही करे तोज चरचा
नकी तुज रिहणां थियां छे मा नके,चारणो धरम पथ केम चळीये
जोग चडीयो भणुं जाग जगदंबिके, तत्व चारण तणुं जाय तळीये..05

क्यां लगी मावडी रहिश तुं क्रोध मा, सोध मां अमे बउ फर्या सगती
भुवा भोपा कनें भेळीया भाळतां, भवां अबतो डगे अचळ भगती
धोम दैवत्व जे खोळीये धबकतुं, प्रखातुं नई हवे एक पळीये
जोग चडीयो भणुं जाग जगदंबिके, तत्व चारण तणुं जाय तळीये..06

खुमारी रई हवे खुंणे के खांचरे, करम खोटां नको जेह करता
सत्त ना उपासक पुजे संपत सता, मता कारण बिजा केम मरता
अहोया समां छे जेहनां आंगणा,  फरी जई जांचता एज फळिये
जोग चडीयो भणुं जाग जगदंबिके, तत्व चारण तणुं जाय तळीये..07

टीका नी टीका पर सर्व पडता फिका, बिकायल कोय नव बात बकता
बळी मरती जुवे बाप नी बेटडी, तोय कायर कनीं राह तकता
हळाहळ झेर आ भाळीयें हाथमां, गळचटुं कई छतां केम गळीये
जोग चडीयो भणुं जाग जगदंबिके, तत्व चारण तणुं जाय तळीये..08

*रचना:जोगीदान चडीया*
*मो.नं.9898360102*
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

कोई टिप्पणी नहीं:

Sponsored Ads