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14 सितंबर 2018

गजानन स्तुति- प्रभाती रचयिता : राजकवि श्री पिंगलशीबापु नरेला

.        *गजानन  स्तुति- प्रभाती*
(जळ कमळ छांडी जाओने बाळा -ऐ राग)

रचयिता : राजकवि श्री पिंगलशीबापु नरेला. भावनगर
            *रचना वर्ष-1876*

*प्रथम समरू गुणपती ने, मात जेनी पार्वती,*
*तात  शंकर देव  तेना, जपे  गुण जोगी जत्ती.      टेक.*

बंधु कार्तिक स्वामी बलिया,सदा तेनी संगती,
गजानन छबी गती गंभिर, आप अदभुत आक्रती. प्र.1

*नाम रटतां विघन नासे, चित प्रकासे सन्मती,*
*भुवन मां नव निधी भासे, सुखद पामे संतती.     प्र.2*

शुंड  दंड  प्रचंड  शोभे ,महा  मंगल  मूरती,
थाय सुक्रत द्वार स्थापन, परम् शुध बुधना पती.  प्र.3

*अमर मोदक ना आहारी, शरण पाळण समृती,*
*कहे  पिंगल  काव्य  रचता  करू तेनी कीरती.    प्र.4*

📌
*-मुळ स्तुती-*
*स्नेहीजनों आ स्तुति ना शब्द प्रयोग ऊपर थी,*
*अन्य कई कई रचनाओ बनी छे तेनो अंदाजो आप सौ आंकी शकशो.*

संकलन-प्रेषक.. अनिरुद्ध जे. नरेला.
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

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