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25 फ़रवरी 2019

|| सूर्यवंदना छप्पय || || कर्ता मितेशदान गढवी(सिंहढाय्च) ||

*||रचना : सूर्यवंदना ||*
*|| कर्ता :मितेशदान महेशदान गढ़वी(सिंहढाय्च) ||*
*|| छंद : वीर छप्पय ||*

(11-2-2019)

*अधिपत्य अवकाश,अतितं तृठी अजायब,*
*अधिपत्य अवकाश,नवोधर अंश कु नायब,*
*अधिपत्य अवकाश,कर्म अर्धांगिय   किन्ना*
*अधिपत्य अवकाश,छाव  तप संज्ञा छिन्ना*
*प्रथमी प्रमाण सह परखियो,अळ अधिपत्य असवारको*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,सुध मित नमे सतकार को*

(12-2-2019)

*अजय देव अखिलज्ञ,उग्र वसु अवनीत अमरा,*
*अजय देव अखिलज्ञ,तात यम जीवतर तमरा,*
*अजय देव अखिलज्ञ,विवस्वत शनि चकित वीर,*
*अजय देव अखिलज्ञ,भजु अमरेश तरुण भीर,*
*जय नरेशआभ जगदीश्वरं,सुर सकळ ज्ञान सुविचार है,*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,सुज प्रसन्न मित शणगार है,*

(13-2-2019)

*नरंद नभे नाराण,तमस्सा तारण तप्पे,*
*नरंद नभे नाराण,अमस्या रूप न अप्पे,*
*नरंद नभे नाराण,गिरी जल तुज बल गरजे,*
*नरंद नभे नाराण,धीर धरती पर धरजे,*
*सर्वेस्वर प्रथम तु सर्वमें,पूजन गुणपत प्रात,*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,घटी सकल मित घात,*

(14-2-2019)

*गरवो गगन गढ़वीर,धरातल   पर पद धरतो,*
*गरवो गगन गढवीर,नयन हर बाल निखरतो,*
*गरवो गगन गढ़वीर,महाबल तेज मनन मढ़,*
*गरवो गगन गढवीर,गजावत सृस्टि  तणो गढ़,*
*रह राय साय हथियार राण तु,बाण किरण परमाण बणावे,*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,जग कथे नमन मित आप जणावे*

(15-2-2019)

*कश्यप नंदन कथु,छाव तुज पौत्र परे छत,*
*कश्यप नंदन कथु,धरा पर माँ कज थ्या धत,*
*कश्यप नंदन कथु,लळी पड़ता जे धर लहु,*
*कश्यप नंदन कथु,संकटा निरख रड़े सहु,*
*कश्यपसुत किरपा करो,तपो पाक धर तापजे,*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,अजवास मित धर आपजे*

(16-2-2019)

*दिग्ध काल दूडीयंद,जकड वा सर भरेय जल,*
*दिग्ध काल दुडीयंद,पकड पा अग्नि धरे पल,*
*दिग्ध काल दुडीयंद,श्वास तप मिश्र समायो,*
*दिग्ध काल दूडीयंद,आस धर चलण अपायो*
*धर पंच तत्व पाताल धरा,सुर अखिल जीव सजावियो*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,गण जसमित तव नित गावियो*

(17-2-2019)

*जगत आत्म जगदीश,चराचर आत्म चलावण,*
*जगत आत्म जगदीश,आत्म परब्रह्म अपावण,*
*जगत आत्म जगदीश,आर्य वंशा तुज आतम,*
*जगत आत्म जगदीश,सृस्टि आतम तुज गौ सम*
*आदि अनाद त्रय काल अरक,हर सकल आत्म कल्याण हो*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,पर आत्म मित परमाण हो*

हे सूर्य नारायण देव,जगत ना ईश्वर आ सकळ जग जेनाथी चाले छे,जेना द्वारा समग्र सृस्टि मा जीव पूरे छे,हवा,पाणी,अग्नि जेना थकी उद्भवी एवा आ समस्त चराचर नो आत्मा तू छो,सजीव ना जीवन थी मृत्यु तु  जीव नो सार तत्व तुज परमब्रह्मदेव छो,आर्य तमने एमना सर्वस्व देव तरीके पूजता,पोताना स्वभाव प्रकृति थी तमो जीव ने जे जीवडो छो,हे देव तमे आ सृस्टि ना नैत्र समान छो,एवा आदि अनादि देव जे त्रणलोक ना कल्याण नो मूळभूत पायो छे एवा देव ने मारा नित्य प्रणाम,

(18-2-2019)

*मृग नैणो मिहिराण,चपळ हर प्रहर विहर नर,*
*मृग नैणो मिहिराण,तहर   जर जर भर सुरवर,*
*मृग नैणो मिहिराण,सखर तट पर अर अमर,*
*मृग नैणो मिहिराण,प्रखर विद गुणभर प्रवर,*
*मही बार मास महीराण तु,नमु विघ्न निवारक नाथने*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,पद धर्यो शबद मित प्रार्थने*

(19-2-2019)

*स्त्रोत शिखर पर सज्ज,अखिल ब्रह्मांड उपायो,*
*स्त्रोत शिखर पर सज्ज,पुंज क्रियकांड पमायो,*
*स्त्रोत शिखर पर सज्ज,सप्त अश्वारथ शोभे,*
*स्त्रोत शिखर पर सज्ज,महिर पद मनोरथ मोभे,*
*गुण वंद गजोदर तुज गण्यो,प्रथम नाम परमेश हे*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,अथ अखर मित अमरेश है*

(20-2-2019)

*यवन आप अजवाश,भाश भरमांड भगीरथ,*
*यवन आप अजवाश,गणे धर लोक आ गरथ,*
*यवन आप अजवाश,भये जल विष्म तमस भय,*
*यवन आप अजवाश,तले नभ छंड हले तय*
*अविनाश आप अवनीतसे,नवनीत मित मन न्याल हो*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,कर वंद यवन किरपाल हो*

*🙏---मितेशदान(सिंहढाय्च)---🙏*

*कवि मित*

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