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21 जुलाई 2019

|| सूर्यवंदना छप्पय || || कर्ता मितेशदान गढ़वी ||

*🙏सुर्यवंदना🙏*

*🌞(11-07-2019)🌞*

*जोइ अमोना जाप,पाप हर जगत पितामह*
*जोइ अमोना जाप,श्राप जे कोइ सभै सह*
*जोइ अमोना जाप,तोड़ हर पाप तपावो*
*जोइ अमोना जाप,दिनंकर जगत दिपावो*
*अमर विश्व पर नजर एक,जोवत सौ कवियन जाप*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,अमृत मित फल उण आप*

*(12-07-2019)*

*खेडण आभ खमीर,अरक आभै नित आवे,*
*खेड़ण आभ खमीर,पुंज धर पाठ पठावे,*
*खेडण आभ खमीर,पाप दर पुण्य पमावे*
*खेडण आभ खमीर,जन्म पर जीत जमावे*
*धरणीधर वंदन धनधणी,अमरत घुंट दियो आप*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,जपिया मित समरण जाप*

*(13-07-2019)*

*प्रथम धरा पर प्रित,किरण वरणीत कलाधर,*
*प्रथम धरा पर प्रित,अखर अवनीत अजरवर,*
*प्रथम धरा पर प्रित,सृस्टि सौगम नर सारे,*
*प्रथम धरा पर प्रित,अति वृष्टि नही आरे,*
*भगवान जदे तू भवपरे,अमियल भव प्रीत उजार*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,भव तरिया मित हर भार*

*(14-07-2019)*

*जरा आभ थीय जो,धरा तुज तापे धसती,*
*जरा आभ थीय जो,करा सम किरणे कसती,*
*जरा आभ थीय जो,खरा बल ताप खलकमा,*
*जरा आभ थीय जो,जरा पळ धरा झलकमा,*
*हाल जराय वरसाव हवा,ने हवे व्रसावो हेम,*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,काश्यप मित    ठरतो केम ?,*

*(15-07-2019)*

*परिस्थितिओ ना पुर,सदा आवे ने जावे,*
*दमन लगे जब दूर,अमन कज आप ही आवे,*
*रूप अलग पणी रीत,काज तु झटपट करतो,*
*नवतम्मो हर नीत,भरण पोषण सुख भरतो,*
*काश्यपसुत तोरा कामणे,जीवतुय रहतु आ जग्ग*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,रस तेज भरी  मितरग्ग*

*(16-07-2019)*

*राम रिदय नू राज,आज तुज पर आधारी,*
*राम रिदय नू राज,सदा सुर ध्यान कु सारी,*
*राम रिदय नू राज,दीपाव्या धर देवळीया,*
*राम रिदय नू राज,फलक परकाशी फळिया,*
*जिण राम समो परकाश जगे,इण आतम जीव नीं आस*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,काटे मित हर कंकाश*

*(17-07-2019)*

*जन्म मरण नो जीव,फरी नही पाछो फरतो,*
*जन्म मरण नो जीव,चिता बन आभै चरतो,*
*जन्म मरण नो जीव,सुर संभाळ ते सारी,*
*जन्म मरण नो जीव,भर्यो मित नयने भारी,*
*तपवे हर देह तु तापमे,फरी जीव जरावी फेर*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,जीवन कुट काढ़े जेर*

*(18-07-2019)*

*विश्व तणा वरणाग,सदा तुज चरणे समणा,*
*विश्व तणा वरणाग,अदा कर देव तु अमणा,*
*विश्व तणा वरणाग,त्याग वैराग्य तपस्या,*
*विश्व तणा वरणाग,धर्म आगे तव ध्रस्या,*
*शिखवे हरदम संसारने,रही एक तपस्वी रीत*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,मलता वैराग्य सु मित*

*(19-07-2019)*

*हार जीत ना हाल,सदा अमने शिखवाडे,*
*वरही तप ना व्हाल,आभ थी आपज आड़े,*
*उगतो इ आथमतो,रमतो खेल रमावत,*
*भलो सदा इ भमतो,जरण जग ताप जमावत,*
*जन्म अजय नही जागतो,हर सदा रह्यो नही होय*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,तपिया मित वरिया तोय*

*(20-07-2019)*

*कुंड आभ ना कोड,भुवन पर आव भाणला*
*जुगत कड़ी ने जोड़,ताप परताप तव तणा*
*आप अमारा आज,राज तुही काल रहंता*
*दुरगुण अमणा दाज,काज उपचार करंता*
*वाणलियु वरते वीर वृति,सत बुध मित करे सहाय*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,वादळ तु भेज व्रहाय*


*🙏---मितेशदान(सिंहढाय्च)---🙏*

*कवि मित*

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