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10 सितंबर 2019

|| सूर्यवंदना छप्पय || || कवि मितेशदान सिंहढाय्च ||

*🌞सुर्यवंदना🌞*

*(01-09-2019)*

*एक मूरत जे आभ,सदा निर्विघ्न स्थपाइ*
*एक मूरत जे आभ,पंच तत्वों भव पाई*
*एक मूरत जे आभ,दिशा चौ धर दिखवाई*
*एक मूरत जे आभ,सुरज पद स्थान सजाई*
*अद्भुत असर सुर आपनी,जे अमर मूरत सुर आप*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,जोता मित जपतो जाप*

है नारायण,जगत मा आपनी मूर्ति नी शु कल्पना करु,जे सकल ब्रह्मांड ने उजागर करे छे,एनी कई रीते कल्पना करवी,तमे नित्य देखाओ छो ए अद्भुत गोळो ज मारा मते मूर्ति छे,जेना पर क्यारेय कोई विघ्न न आवी शके,जेमा थी पांच तत्वों मळ्या,जेनी मूर्ति ना एक प्रकाशना किरणे दिशे दिश देखाई आवे,जे मूर्ति कदी खंडित थई शक्ति नथी एवी अमरत्वता नु प्रतीक,आवी अद्भुत स्थानीय मूर्ति ने जोवि रोज आ अपना धगधगता गोळा ने हु वंदन  करू छु

*(2-8-2019)*

*सुंढाळा समराथ,सहज प्रगट्या धर सुर ज,*
*निरखे दुडियंन्नाथ,नाथ काजे हर नुर ज*
*शुभ काजे शिवसूत,प्रहर प्रथमी गुण पाया*
*तारे  त्रिपदा  तूत,सूरज सथवारे साया,*
*प्रथम पूजा तुज गुणन पति,तद सुरज भेळोय तप्प*
*पट निहर प्रोढ़ अवनी परे,जगमित अज जाम्यो जप्प*

*(3-9-2019)*

*प्रतिसादे पुरणाथ,गजब आप्यो गुणवंता,*
*प्रतिसादे पुरणाथ,आध आदिय अनंता*
*प्रतिसादे पुरणाथ,आप विण कोई न आजे*
*प्रतिसादे पुरणाथ,ताप दल कोई न त्राजे*
*पर वखत जण्यो पुरणाथपणो,है सुणजो आभ सम्राट*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,परोणा मित वादळ पाट*

*(04-09-2019)*

*बारह नाथ ब्रह्मांड,किया किरतार कामणा*
*बारह नाथ ब्रह्मांड,भोर पड़ धरे भामणा*
*बारह नाथ ब्रह्मांड,जन्म् नय प्रगट जोगना*
*बारह नाथ ब्रह्मांड,भरम भ्रांजेय भोगना*
*खराय किरतारी खलकना,आ बार देव ब्रह्मांड*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,भव कुट तोड्या मित भांड*

*(05-09-2019)*

*सरा धरा नो संप,खरा खेलाण खलकना*
*वरा तरा विध्वंत,परा परोणाय पलकना*
*जरा आभ जरजरा,जरा धर हेम जलकता*
*फरा फंट दई फरा,मंद मधुराय मलकता*
*जोड़ण आखा आ जग्गने,तु तांतण किरणे तार*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,साचो आपत मित सार*

*(06-09-2019)*

*शुद्ध समय समराण,अबुद्धि काटण अंगे*
*शुद्ध समय समराण,कबुद्धि नाखण कंगे*
*शुद्ध समय समराण,सबुद्ध ससोहत संगे*
*शुद्ध समय समराण,रमत सह जुद्धण  रंगे*
*रह पट पति नभ राजत रमेय,सह बुद्ध विचारी साथ*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,अंगज मित आपी आथ*

*(07-09-2019)*

*आलम एक उजास,जीवन नु तेज जगावे,*
*आलम एक उजास,फटण कुट दोष फगावे,*
*आलम एक उजास,स्वास्थ नो सार सजावे*
*आलम एक उजास,भ्रमण मित नाम भजावे*
*तुज एक उजासा तापनी,अम सकल जीवन नी आस*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,आ आलम गुण अभियास*

*(08-09-2019)*

*आदि देव अकळाय,जदे जकळाय धरम जड़,*
*आदि देव अकडाय,खलक पर खुद्दर खै खड़,*
*आदि देव अकडाय,बेड तुट्टी जब बांधी*
*आदि देव अकडाय,सदा जे मन भर बांधी*
*मनुसुत पद भूलिया मानवी,आ जोइ सूरज अकडाय*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,पोते मित निरख पिडाय*

*(09-09-2019)*

*महा मेघ महाराज,आभ वरसायो आजे,*
*महा मेघ महाराज,गजारव गळळळ गाजे*
*महा मेघ महाराज,पड्यो दिन प्रात प्रभाते*
*महा मेघ महाराज,सुरज तो होवत साते*
*सुर आप तणा समराज्यमा,आ मेघ न मोटो आज*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,सुर थी ज सज्यो धर साज*

*(10-09-2019)*

*भंकर थर भर भोम,खटंकर खळके खळळळ,*
*रण भरीया रव रोम,फांट जल पोगत फळळळ,*
*सळळळ शांत नही सोम,नोम रवि धोम नरायो,*
*हळळळ आभे होम,जगत ध्रम काज जरायो,*
*बदलाता ध्रम ना वादळा,जोवे सुर करत जगन्न*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,मित भोर जळाय मगन्न*


*🙏---मितेशदान(सिंहढाय्च)---🙏*

*कवि मित*

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