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"जय माताजी मारा आ ब्लॉगमां आपणु स्वागत छे मुलाक़ात बदल आपनो आभार "
आ ब्लोगमां चारणी साहित्यने लगती माहिती मळी रहे ते माटे नानकडो प्रयास करेल छे.

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2 अगस्त 2016

सूर्य वंदना -02-08-16 रचना जोगीदान गढवी(चडीया)

मनगल वार मिहिर तूं, मन गल अमणीं मान
जन मनगल कज जोगडा, मनगल सूर महान

हे भगवान मिहिर नाम सूर्य, मनगल (मंगळ वार) हुं वंदन करी छुं के आप मन गल ( मन नी गल= वात) मानो अने जन (लोको) नु मनगल (मांगल्य ) करवा मन मां रहेल मन गल (मान ने गाळो) हे महान सूर्य नारायण मारा आपने नीत्य वंदन छे
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