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28 सितंबर 2016

चारण आईनी वंदना : रचना :- दिलजीतभाई गढवी

*चारण आई नी वंदना*
     ॥     *चरच*    ॥
राग..मारु संदेशो मोकले...

देव दयाळी डूंगरा वाळी आभ कपाळी आई,
वारु थाजो हवे वेगथी माडी बाकूला वाळी बाई,.......1

बाकूला डूंगर बेहणा तारा
नवखंड गूंजे नाम,
धाबळीयाळी ध्रोडजे रुडा करवा अमणा काम;......2

भान भूलीने भूपती आव्यो नागल हूंदा नेह,
पाट पलटावी पलमां ऐनो वरवो कीधो वेह;..........3

घें-घें-घे करी घूधवी मां तूं चारणी सिंहण रुप,
रोष भरेली राजलने नम्यो भयथी दिल्लीनो भूप;.....4

महवाडी काज आवियो बाबी रोकड मागी राळ,
त्यातों जिभ खेंचीने जगदंबा तूं वेगे बणी विकराळ;.....5

आई हटाणू करवा आव्या सू मत भूल्यो शेख,
तेदी' सरधारे सिंहमोई मंडाणी लखवा ऐना लेख;.........6

ओखा धराने उजाळवां आवी
अंबा लई अवतार,
काळा सर्पोनो कोरडो भाळी दैय्तना डोल्या द्वार;.......7

सातिये सावज जोतर्यो माडी
चोराडी चांपबाई,
आभमां उभो राखियो भानू आण आपीने आई;.......8

शिला उपाडी चांचमां उडी आभमा तेदी आई,
राज वाजानू रोळियू मां ते क्रोध करी कागबाई;......9

आई अमीनो विरडो ऐमा नेहनां भरिया नीर,
भावथी भजो भेळियावाळी ने
मां भवनी भांगे भीर;.....10

आई अमाणो आशरो मोटो शिर तणो सरताज,
जावा दये नही जगदंबा कदी लाखू वाते लाज;.........11

ऐज अवतार आप छो माडी मोड सधू महमाई,
*दिलू* माथे अमी द्रष्टी राखो
स्नेहनी *सोनलआई*;....12

आपणा सर्वे चारण जगदंबा ना आराधना माटे मां प्रार्थना

दिलजीतबाटी ना जै माताजी
ढसा जं. मो.9925263039

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