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"जय माताजी मारा आ ब्लॉगमां आपणु स्वागत छे मुलाक़ात बदल आपनो आभार "
आ ब्लोगमां चारणी साहित्यने लगती माहिती मळी रहे ते माटे नानकडो प्रयास करेल छे.

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Notice Board


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14 नवंबर 2017

चारण समाजनो गौरव :- राष्ट्रीय कक्षानी कबड्डी कन्या टीम मां पसंदगी

चारण समाजनो गौरव :- राष्ट्रीय कक्षानी कबड्डी कन्या टीम मां पसंदगी

राष्ट्रीय कक्षा नी कबड्डी कन्या गुजरात नी टीम मां कच्छ जील्ला मांथी मोटा भाडिया प्रा.शाळा (ता.मांडवी-कच्छ) नी 2 विधार्थीओनी राष्ट्रीय कक्षानी रमत माटे पसंगदी थयेल छे

(1) सभाईबेन वाछीया गढवी (बांढा)

(2) जयश्रीबेन खेंगार गढवी (तुरीया)

राष्ट्रीय लेवलनी रमत रमवा माटे राज्यनी टीम मां पसंद थयु ऐ बहु ज मोटी उपलब्धी छे

खूब खूब शुभेच्छाओ

मोटा भाडिया प्राथमिक शाळाना समग्र स्टाफ ने खूब खूब अभिनंदन

13 नवंबर 2017

कां झघडे छे?? - रचना घनश्यामदान गढवी (धानडा)

कां झघडे छे?? - रचना घनश्यामदान गढवी (धानडा)

पाणीनो परपोटो काया - रचना घनश्यामदान गढवी (धानडा)

पाणीनो परपोटो काया - रचना घनश्यामदान गढवी (धानडा)

चारण परीवार

चारण परीवार ना दरेक सभ्य ने
आ लेख खास वाचवा विनंती

चारण परीवार नी ऐक संस्था बनावी छे
( वृध्धा आश्रम ) पण आ नाम न सारु लागे ऐटले आपणे
" चारण परीवार " नाम थी ओडखीये

" चारण परीवार " संस्था मा
निराधार,
निसहाय ,
वृध्ध मावतर,
निसहाय, बाळको,
त्यकता (विधवा बहेनो)
निसहाय भाई ओ नो पण समावेश करशु

पण आ बधु अधुरु छे आप सव ना साथ,सहकार,सहमती,अने मदद विना

आपणा समाज मा ऐवा घणा घर छे
जयां आथीँक तकलीफ होय।
घर ना सभ्यो वधु होय।
अने
कमावनार ऐकज होय समाज ना घणा घर दुबडा छे।
ऐवा दुबडा घर ने सहमत करीये। संस्था मा जोडावा।

आप सव ने ऐम नथी लाग तु के
ऐ लोको पण सध्धर थाय
सुखी थाय
बाळको ने सारु भणावी शके ,
परीवार ने सुख आपी शके।

पण दरेक व्यकती  ऐमज विचारे छे के अमारा  मावतर। भाई बहेन।
निराधार आश्रम मा न जाय।

आपणे आज विचार ने मन मांथी ने समाज मांथी नाबूद करवो छे।
ने आगळ आवु छे।

आपणे ऐक संस्था बनावीये जेमा आपणा समाज माथी सव जोडाय।

आपणे ऐम मानीये छी के आपणा समाज माथी कोय दिकरा दिकरी मावतर ने निराधार आश्रम मा मुकवा नो जाय।
पण आपणे कया सवेँ कयोँ छे ?
ऐकवार दरेक व्यकती तमारी आस पास ना ,निराधार आश्रम मा तपास करजो 100 मांथी 10 दिकरा ना मावतर तो मळशे ज।

पण आपणे ऐम नय विचार करवा नो के मावतर ने निराधार आश्रम मा मुकवा?
आवोज विचार करशु तो
जे जे व्यकती ने घरना कोय पण  व्यकती ने  " चारण परीवार " ( निराधार आश्रम )मा मुकवा हसे ते व्यकती आगळ नय आवे।
आपणा मा अहंम ( ईगो )आडो आवे छे
अहंम ने दुर करीये ने सव ने मदद करवा माटे प्रेरणा आपीये ।

ऐटला माटे ज कहिये छी के आपणा समाज माटे।
चारण परीवार ट्रस्ट, ( संस्था निराधार आश्रम ) बनावीये
जे पण व्यकती ने आमा जोडावु होय।
मदद करवी होय।
साथ सहकार आपवो होय। ते लोको आपणी संस्था मा जोडाव।

माफ करशो अमारा थी वधारे लखाय के कहेवातु होय तो

पण आ हकीकत कव छुं आपणे हवे माताजी नी सेवा पुजा
भजन भाव भेळीया
संतवाणी बहु करीया
माताजी ना मंदिर वाडी
घणा बनाव्या छे

कइ केटला विस्तार मा जग्या रोकाण छे
गामे गामे समाज वाडी छे
विसामो छे
बोल्डींग पण छे
पण मंदिर नानु ने जग्या मोटी छे
पण ऐ जग्या मा निराधार निसहाय वृध्ध मावतर ने माटे थई ने समजा सेवा संस्था तरफ थी कोय जग्या नथी

माफ करशो
पण
माताजी ना मंदिर (जग्या) बनावा करता निराधार निसहाय वृध्ध मावतर माटे थई ने ऐक संस्था  (आश्रम )बनावा मा आवे तो बव सारु

घणा घर ने आथीँक तकलीफ वाळा ने मदद मळी रेसे
आपणा विचारो थी
आपणे सव ऐक थय ने जोर शोर थी प्रचार करीये ने समाज मा सवँ करीये
साथ सहकार अने सहमत थाय ने ऐकता बनावीये

समाज माटे ऐक नवुज कायँ करीये

संस्था बनावा माटे जग्या
नाणा नी सहाय माटे दाता नी मदद लय
मां अंनपुणाँ भोजनालय व्यवस्था
संस्था माटे जरुरीयात सर सामान माटे सगवडता करवी ऐ बधा माटे सव ने संस्था मा जोडाववा माटे प्रयास करीये

आज अमे ऐक सामान्य ने मीडल क्लास वाळा ने  विचार आवे तो

मानो समाज ना मोटा मोटा अग्रणी उध्योग पती
विदेश मा वस्ता समाज ना घणा सभ्य ने आ विचार आवोज जोये

अमारे तो शुन्य माथी सजँन करवा नो विचार छे

जे अधुरु छे आप सव ना साथ सहकार अने मदद विना
खाली वात करवा थी समाज ऐवा घणा लोको ऐ कह्यु

आ संस्था स्थपाय ऐ जरुरी छे
समाज ना घणा लोको नो विचार छे

आपणा समाज मा घणा सध्धर दाता ओ ने  आमा जोडावा माटे प्रेरीये ।
चारण समाज ना घणा लोको नो विचार छे आ संस्था स्थपाय ऐमा
पण बोली नथी सकता समाज सुं विचार से?
धिक्कार से ?
नफरत करसे ?
कोय बोली नथी सकता
केम कहेवु ?
कोने कहेवु ?
आवा विचार थी कोय आगळ नथी आवता

चारण परीवार जाग्रत बने 
पण समाज सव ना साथ सहकार अने सहमत  विना अधुरो छे

मारा लखवा मा काय भुल चुक थाय तो माफ करशो

अमे तो सारु कायँ करवा नु विचारीये छी
आप सव ना साथ विना अधुरो छे

आप सव ना विचारो जणावशो

आपणो " चारण परीवार " निराधार निसहाय वृध्ध मावतर माटे थई ने आश्रम बनावे ते भाव थी आगळ आवो

आपणा चारण समाज ना ज ऐक परीवार ना विचारो 💐💐💐💐💐

जय माताजी चारण समाज ने 🙏🏻🙏🏻

Mayaben .V. Gadhavi Jasdan
WhatsApp no : 81405 92592
vanraj Bhai gadhvi
Mo : 9574184348

Jasdan , Rajkot

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