.

"जय माताजी मारा आ ब्लॉगमां आपणु स्वागत छे मुलाक़ात बदल आपनो आभार "
आ ब्लोगमां चारणी साहित्यने लगती माहिती मळी रहे ते माटे नानकडो प्रयास करेल छे.

WhatsApp Update

.

Notice Board


Sponsored Ads

Sponsored Ads

Sponsored Ads

29 सितंबर 2015

|| चारण गांन || रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)

.                || चारण गांन ||
.      रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)
राग: श्री रामचंद्र कृपालु भजमन (मिश्र सारसी)

श्री शारदा सुंण आरदा सत वचन धर्म न छोडीये
नित प्रोढ जागी प्रेमथी जगदंबीका कर जोडीये
यादी करी ऐ अगम नी ने दीव्य तेज दीपावीये
जप जांन जोगी दांन चारण गांन पावन गावीये..||01||

छे भव्य जे भूत काळ ऐने अधीक सौ उजळो करो
जळ हळ थतो जे जगत मां ऐ धरम ने पाछो धरो
वंदन करी विश्वे श्वरी ना रदय ने रे  रीझावीये
जप जांन जोगी दांन चारण गांन पावन गावीये..||02||

दारु ने गणींये दैत्य सोनल वात ने संभारी ये
व्यसनो तजी ने वेगळां नीज धर्म चारण धारीये
आयल तणां आदेश बावन नियम सर्व निभावीये
जप जांन जोगी दांन चारण गांन पावन गावीये..||03||

पद मान वैभव विमळ वांणी वाल जन विश्वेसरी
सुख सायबी मां सकल चारण ओपवो मां ईश्वरी
ज्ञाती सकळ गंगा गणी बद लेश ना उर लावीये
जप जांन जोगी दांन चारण गांन पावन गावीये..||04||

दीकरी ने गणींये देव ने नव द्हेज कारण दोभीयें
आयल उपासक अगम ना सुध आचरण थी सोभीये
नीज पुत्र वधु ने पुत्री गणी खुब व्हाल नेह व्रसावीये
जप जांन जोगी दांन चारण गांन पावन गावीये..||05||

ईरशा अहम त्यागी हरीरस नित्य चाखे चाह थी
कुड कपट ना हो काळजे नव छके ई वाह वाह थी
ऐवा अजाचक निम धारी खाज अखज न खावीये
जप जांन जोगी दांन चारण गांन पावन गावीये..||06||

आतम बली मन अडग निर्भय निडर हो जग नाथ सु
सत करम जन हीत हो सदा हे मात चारण हाथ सु
निज देश ध्रम पत नार कज बंबोळ रगत बहावीये
जप जांन जोगी दांन चारण गांन पावन गावीये..||07||

आयुं जगत मायुं फरी अवतार लई ने आव शे
जय जय जपी जगदंब नी ए गीत अमियल गावशे
प्हाडा ने वाडा सकळ त्यज सब ऐक बन जग आवीये
जप जांन जोगी दांन चारण गांन पावन गावीये..||08||

.            अथः श्री चारण गांन स्तुती 
.  वंदे सोनल मातरम्   

कोई टिप्पणी नहीं:

Sponsored Ads