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8 नवंबर 2015

|| कागडा कदीये कारहे नावे || रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)

.          || कागडा कदीये कारहे नावे ||
.     रचना : जोगीदान गढवी (चडीया) कृत
.    (राग: केदी हवे राम राज आवे ने मळतो..)
कागडा कदीये कारहे नावे.(०२).ऐतो अवळा गाळीया भरावे.....ई कागडा कदीये कारहे नावे.......टेक.
त्रण आंना नी लीये तमाकुं ने..चुनो सोपारीयुंय चावे..
मोटा मोटा नी हारे ई मालता.(०२) गीतडां ऐमनांज गावे..
ई कागडा....||01||
वळे नई कांय ऐवी खोटडी वातमां..खी खी खी दांत खखडावे
पतावी काम ने थाय ई पारका.(०२) अवसर मांय ना आवे...
ई कागडा...||02||
व्याज वाटा नी  वातुं करी ने..मुडीयुं कैक नी मुकावे..
डायरे जाय ने करे ई दाखडो.(०२)उसीना लई ने उडावे..
ई कागडा.....||03||
मिठडी मीठडी वातडी मांडीने ..तमने खुब ई तावे...
घडता घाट ने घोचु बनावता..(०२) फांहलो दई ने फसावे..
ई कागडा..||04||
किरतन करवा जाय कथामां..भले भजनीयां न भावे..
जोगीदान के बकता जाय एे..(०२) बउ करी जो ने बावे..
ई कागडा..||05||
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