.

"जय माताजी मारा आ ब्लॉगमां आपणु स्वागत छे मुलाक़ात बदल आपनो आभार "
आ ब्लोगमां चारणी साहित्यने लगती माहिती मळी रहे ते माटे नानकडो प्रयास करेल छे.

WhatsApp Update

Buy Now Kagvani

Sponsored Ads

Sponsored Ads

.

Notice Board


Sponsored Ads

15 नवंबर 2015

अंबे माडी रे रचना -- राम बी. गढवी नविनाळ कच्छ

अंबे माडी रे
ढाळ सैयर मोरी रे
अंबे माडी रे...चारणकुळ तारनारी
आयुं अमारी क्यां गइ रे जी
इतो सुरज ने रोकनारी
आवड माडी क्यां गइ रे जी
अंबे माडी रे...समंदर मे सोसनारी
इ आइ हवेे क्यां गइ रे जी
आइ तें कुलडी कटक जमाड्या
साथे चकली रुपे चालती रे जी
अंबे माडी रे...हीणी नजर करनारो
बासर बेठो ओरडे रे जी
सिंहण थइ पलंग थी पछाड्यो
बाकर तारे पाये पडे रे जी
अंबे माडी रे...विनवुं वंदु विधाता
भुल अमारी माफ करो रे जी
अमने आसरो एक तिहारो
वखते वेला आवजो रे जी
अंबे माडी रे.....जीवतर अमणो सुधार्यो
सोनल पाछी क्यां मले रेजी
जेणे साची राह बतावी
आइ मारे श्वासे वसी रे जी
अंबे माडी रे....खोडे बेसाड ने हेते
जगदंबा केम मुंगी बेठी रे जी
'राम' ने शरणे राख ने माडी
होंकरो देजे हाकले रे जी
रचना -- राम बी. गढवी
नविनाळ कच्छ
7383523606
आ रचनानो ऑडियो उर्मिलाबेन गढवी मुंदरा वाळाना स्वर मां
ऑडियो डाउनलोड करवा माटे Click Here

कोई टिप्पणी नहीं:

Buy Now Kagvani

Sponsored Ads