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16 दिसंबर 2015

|| राम ना रुदानी || रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)

.                 || राम ना रुदानी ||
.       रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)
.       राग: अंधो अंधी बे तपसी नो ढाळ
रांम ना रुदीया केरी रे....वातडीयुं..
आखाये जग थी अजाणीं.....
वातुं राघव नां दल नी वांची .त्यांतो ..
पड्यां आखडीये थी पांणी....राम ना रुदीया केरी रे...टेक.
जोईती जेदी ऐने जनक पुरी त्यारे ..काळजे मारे कोरांणी..
भोळीया नाथ ना धनुं ने भागी मेतो..प्रेमे ग्रह्यां जेनां पांणी..
राम ना रुदीया केरी रे वातडीयुं...आखाये जग थी अजांणी..||01||
मारे खातर जेंणे मेली म्हेलातु..जंगले फरती  जांणी..
जाडवे जाडवे रोयो हुं जोगी ज्यारे..असुर लई ग्यो आंणी..
राम ना रुदीया केरी रे वातडीयुं...आखाये जग थी अजांणी..||02||
राम ने कायम राख्यो रदय मां..लंका मां ना ललचांणी
ई विदेही केरा व्हाल ने मारे,...वदवुं ते कई वांणी...
राम ना रुदीया केरी रे वातडीयुं...आखाये जग थी अजांणी..||03||
फाट्युं काळजुं ने आतमो फफड्यो..सीता ज्यां धर मां समांणी
पाड्या पोकार मे सरयुं  पांणी..हवे..तुं लईजा मने तांणी..
राम ना रुदीया केरी रे वातडीयुं...आखाये जग थी अजांणी..||04||
जानकी केरी तो जगते जांणी पण...अवध पति नी अजांणी
जोगीदांन के जडे नही ऐनी..,वेदना लखवा वांणी..... राम ना रुदीया केरी रे वातडीयुं...आखाये जग थी अजांणी.
.||05||
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