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16 दिसंबर 2015

उलट सुलट दोहानो रचना:  जोगीदान गढवी (चडीया)

.              उलट सुलट दोहानो
.     ..दुमेळी प्रबंध .(चाकण प्रबंध)...
.     रचना:  जोगीदान गढवी (चडीया)
दोहो..
वशी यही वधरा तन्न, यज नवरा किनजा नरा
वजी यद हखरा वन्न, डागजो यहिय जोगडा.१
आ दोहाने नीचेथी उल्टो (ईती थी अथः सुधी/ छेल्लेथी सरु करी शरुवात सुधी उलटा अक्षरे) वांचो ऐटले...आंम थशे...
दोहो...
डाग जो यहीय जोगडा, न्नव राखह दय जीव
रान जानकी रावन जय,न्नत राघव हिय शीव. २
पेहला नो अर्थ..आंम लघर वघर देहे हुं वशी के ज्यां केवां नर छे ऐय खबर नोहती पडती..वजुज ने हखरी (संकोरवु) ने वन्न मां पडी ते डाग मारा हैये जेमनो तेम रह्यो.....
बीजा नो अर्थ..डा (डामवुं) गजो (कलेवर..गजु) ऐ थयुं के जे राखह ना जीव मां दया नोहती, त्यां रान मां जानकी नो रावन पर जय थयो ..कारण न्नत (नित्य..कायम) राघव ना हैया मां शीव नो वास हतो...

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