.

"जय माताजी मारा आ ब्लॉगमां आपणु स्वागत छे मुलाक़ात बदल आपनो आभार "
आ ब्लोगमां चारणी साहित्यने लगती माहिती मळी रहे ते माटे नानकडो प्रयास करेल छे.

WhatsApp Update

Buy Now Kagvani

Sponsored Ads

Sponsored Ads

.

Notice Board


Sponsored Ads

3 अप्रैल 2016

सायबो छे गोवाळीयो रे मारो - रचना राजभा गढवी

.         सायबो छे गोवाळीयो रे मारो
.         ढाळ :- तुंबडी वेलो हालीयो वीरा
.        रचना :- राजभा गढवी
सायबो छे गोवाळीयो रे, मारो सायबो छे गोवाळीयो,
हुं गोवालण गीरनी रे, मारी श्याम राघानी जोडली ...,,,टेक
सायबो मीठो मेवलो रे, मारो सायबो मीठो मेवलो,
हुं अषाढी वीजळी रे, मारा वालम साथे दीपती.
              सायबो छे गोवाळीयो रे मारो...,,,1
सायबो शितळ चांदलो रे, मारो सायबो शितळ चादलो,
हुं चकोरी वनरानी, नीरखुं वालीडाने नेहथी.
                 सायबो छे गोवाळीयो रे मारो...,,,2
सायबो डुंगर गीरनो रे, मारो सायबो डुंगर गीरनो,
हुं डुंगरडानी रिंछडी रे, मारा वालम हार्ये रमती.
                   सायबो छे गोवाळीयो रे मारो...,,,3
सायबो घेरो घुंघटो रे, मारो सायबो घेरो घुंघटो,
हुं मोंघी मरीयाद वालाना, संगमां हुं तो शोभती.
                  सायबो छे गोवाळीयो रे मारो...,,,4
सायबो लीलो वडलो रे, मारो सायबो लीलो वडलो,
हुं शिळुडी छांयडी, बेईनो आतम "राजा" ऐक छे.
                 सायबो छे गोवाळीयो रे मारो...,,,5
रचना :- चारण कवि राजभा आलसुरभा गढवी
संदर्भ :- गीरनी गंगोत्री पाना नं-38
टाईप बाय :- www.charanisahity.in
 ©वंदे सोनल मातरम् ©

कोई टिप्पणी नहीं:

Buy Now Kagvani

Sponsored Ads