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12 मई 2016

जरा ढळंता जोगडा रचना: जोगीदान गढवी (चडीया)

.     || जरा ढळंता जोगडा ||
.                  दोहा
.रचना: जोगीदान गढवी (चडीया)
डगमग काया डोलसे, स्वासा पडशे सोस
जरा ढळंता जोगडा, जाय जवानी जोस.०१
चरमई जासे चांमडा, रुप रहे नई रंग
जरा ढळंता जोगडा,अबखे पडसे अंग. ०२
आज तने अभीमान छे, भाय जवानी भाय
कंपी उठसे काय, जरा ढळंता जोगडा. ०३
कामण आ जे काय ना, त्रिसां दाह तलक्क
खोटा जांण खलक्क, जरा ढळंता जोगडा.०४
जुठ जवानी जांणीये, मोह मुकी ले माळ
कोतर खासे काळ, जरा ढळंता जोगडा.०५
खुब जवानी खोलती,ओसव अंगो अंग
पडसे देह पलंग, जरा ढळंता जोगडा.०६
पोताना नई पुछसे, भाव विनाना भाव
अंगत नई के आव, जरा ढळंता जोगडा.०७
आँख्यु सामे आवसे, करीयल भुंडा काम
रजू रहे नई राम, जरा ढळंता जोगडा.०८
श्रवण पछी नई सांभळे, देख सके नई द्रग्ग
स्वास धमांण्युं सग्ग, जरा ढळंता जोगडा.०९
लेसेय टेको लाकडी, मांणह दे नई मग्ग
पडसे आडा पग्ग, जरा ढळंता जोगडा.१०
जे भटकेल जवानीये, छोडे न कोदी स्याम
ऐनी, रसणे नावे राम, जरा ढळंता जोगडा.११
चितरे ठाकर चोपडा, समजो बात सुजान
तो, भेळो रे भगवान, जरा ढळंता जोगडा.१२
लींबु बे लटकावतो, खलके फरतो खांट
डोहा न पडती डांट, जरा ढळंता जोगडा.१३
हेमर जेवो हालतो, वदतो ठरडां वेंण
नेजां मांडे नेंण, जरा ढळंता जोगडा.१४

आज जवानी आडमां, कह्युं धरे नई कान
ऐने, तूरांय थासे तान, जरा ढळंता जोगडा.१५
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