.

"जय माताजी मारा आ ब्लॉगमां आपणु स्वागत छे मुलाक़ात बदल आपनो आभार "
आ ब्लोगमां चारणी साहित्यने लगती माहिती मळी रहे ते माटे नानकडो प्रयास करेल छे.

WhatsApp Update

Buy Now Kagvani

Sponsored Ads

Sponsored Ads

.

Notice Board


Sponsored Ads

28 जून 2016

अखूट खजानो प्रेम नो तारो रचना श्याम गढ़वी

श्याम गढ़वी नी एक सूंदर रचना जरूर वंचजो

     
   अखूट खजानो प्रेम नो तारो

     
राग _कादजा केरो कंटकोमारो

अखूट खजानो प्रेम नो तारो ,मावड़ी माप ज नहीं
जग हाले आखु यात्रा करवा ऊंबरे ओड़खे नहीं,,,,,,,(अखूट,,,,)
भाई मुके भामिनि मुके पण, मावड़ी मुके ज नहीं
दोढ् दुकाडे नावडि सुके पण सागर सुके ज नहीं ,,,,(अखूट ,,,)
चकली माडु बांधवा चांचे लाखो तनखा लई
उड़ता सीखे बाड़ आकासे पछि एनु मात थी नातू नहीं ,,,,(अखूट,,,)
पूछ जो ओला पूत ने कोई दी जे मात विण मोटा थई
मात विण छोरु नु  काज छे कोरू ई कवियों थाक्या कही,,,,(अखूट,,,,)
लाड लदाव्या लाख ते माड़ी गोत ता गोदे लै
'श्याम 'मडि साँची सुख नी गडी जननी खोडे जई ,,,,(अखूट ,,,,)

        लेखक -श्याम गढ़वी (लोकसाहित्य कार ।करोडिया)

कोई टिप्पणी नहीं:

Buy Now Kagvani

Sponsored Ads