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19 जुलाई 2016

मोगल तारो आसरो मागुं - रचना: जोगीदान गढवी (चडीया)

.    *|| मोगल तारो आसरो मागुं ||*
.   *रचना: जोगीदान गढवी (चडीया)*
.     *ढाळ: सोनल मां आभ कपाळी*

लोबडीयाळी पाय हुं लागुं, पाळे मां उतारीये पागु,
जोगण नां जाप थी जागुं, मोगल तारो आशरो मागुं....टेक

लाख गुना तारा लाल ना माडी, लेखती नई लाजाळ
जाय तारा वींण जोगडो क्यां मां, बाई हुं नानो बाळ
भेळीया नी ओथ मां भागुं, मोगल तारो आसरो मागुं...०१

सामटा वेरी आवता छो ने, थडको ना उर थाय
भरोहे तारो भेळीयो भाळ्यो, कंपती वेरी नी काय
खेधाळीय खेलती खागुं, मोगल तारो आसरो मागुं...०२

रेम जाया पर राखजे रूडी, पाप मां दउं नई पाय
चुकींये नई मां ध्रम चारण नो, जीव भले आ जाय
तुंने जोई देह आ त्यागुं,मोगल तारो आसरो मागुं...०३

गाम गोकळ ने गोंदरे माडी, कोक दी थाजे कान
महा रासो मारी मावडी मंडे, जोउं हुं जोगी दान
वांसलडी जेम हुं वागुं, मोगल तारो आसरो मागुं...०४

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