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7 जुलाई 2016

समजण नुं सूळ - रचना: जोगीदान गढवी (चडीया)

महाभारत नुं ऐक पात्र सहदेव जोशी के जे बधु जांणता होवा छतां होमाता जता हता कोईने कही नोहता सकता, ऐ मनोदसा केवी हशे ? ते स्थिति ने काव्य मां ढाळवानो  ऐक नानो प्रयास

,             *||समजण नुं सूळ ||*
,   *रचना: जोगीदान गढवी (चडीया)*
,              *छंद : सारसी*

दोहा

कांटा वागे काळजे, समजण ने नई सूख
जोशी हैये जोगडा, दळ दळ भरीयां दूख.

हाथे करी ने होमशुं, कुर खेतर मां कूळ
जोने वागे जोगडा, समजण थई ने सूळ.

छंद

कळीयेल सघळा कोरवो ना करतूतो ने कारहा
सम समे भेतर साद वचमां वचन केरा वारहा
पांडीत्य आ बउं पीडतुं मुंझा वतुं मारी मती
जांणींन मुंगुं जोई रेहवुं, गुंगळावे ऐ गती. ०१

हुं भाळतो भडथुं थता मुंज भाई पाछुं भोंयरुं
समजुं छतां सहदेव शुं कउं वेदना फाडे वरु
कोई पुछे तो कई दुं जट ज्ञान द्रस्टी गोतती
जांणींन मुंगुं जोई रेहवुं, गुंगळावे ऐ गती.२

जुगटेय जोगीदान थ्युं  अनुमान दन ऐ आवशे
चाले धरम जे चाल वातुं जूग जतां ना जावशे
देखाय सामे द्रोपदी त्यां थीर आंख्युं ना थती
जांणींन मुंगुं जोई रेहवुं, गुंगळावे ऐ गती. ३

कुरखेत कच्चर घांण कटमी ओरवाना आगमां
मांडी हशे शुं साव माठी भुंड्य पांडव भागमां
पुजनीय जन ने पींखवा नी हाय हैये हबकती
जांणींन मुंगुं जोई रेहवुं, गुंगळावे ऐ गती. ४

काळज पीछांणे कान जोगीदान पण कंईना कहे
समजण बनी ने सरप काळो डंख आतम ने डहे
करज्यो न आवुं कोई ने ऐ विनवज्यो मारा वती
जांणींन मुंगुं जोई रेहवुं, गुंगळावे ऐ गती. ५

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